Sulemani Chai – दोस्त दोस्त न रहा…बत्ती बत्ती में फर्क…पटरी से उतरती तहजीब की बस…

दोस्त दोस्त न रहा…

पिछले दिनों खजराने के दो जय पाजी और वीरु पाजी बड़ी शान से बीजेपी कार्यालय पहुंचे लेकिन एक को अध्यक्ष महोदय ने खरी खरी सुना दी और चलता कर दिया, इसी बीच दूसरे को पता चला कि कही उसके खिलाफ कुछ छप रहा है तो साहब जय ने वीरु वाला मामला वहां बता कर अपनी गर्दन निकाल दोस्त की फंसा दी और एनआरसी के समय के फोटू भी उपलब्ध करा दिए। अब साहब वीरू को जब पता चला कि जय ने ही उसकी गर्दन पेश की है तो दोनों में खूब तीखी बहस हुई, अब इस मामले में हम तो यूं ही कहेंगे कि हमें तो अपनों ने लुटा गेरों में कहा दम था…मेरी कश्ती भी वही डूबी जहाँ पानी कम था।

बत्ती बत्ती में फर्क…

प्रदेश वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डाक्टर साहब की सर्जरी का दौर जारी हैे। साहब को जब से बत्ती मिली हैे तभी से वक्फ के गुनाहगारों को बत्तियों पर बत्ती दी जा रही है। पिछले दिनों इसी क्रम में पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शौकत मोहम्मद को भी बीजेपी से बत्ती मिल गई और साहब के निष्कासन के पर्चे भी चस्पा हुए। सूत्रों के अनुसार अब अगली सर्जरी इंदौर की तरफ भी हो सकती है और अगर सब ठीक रहा तो इधर भी एक बड़े अल्पसंख्यक नेता जी जो पहले वक्फ की पुंगी बजा चुके है ओर सनव्वर की टीम से दूर भी है उन्हें भी कभी भी बत्ती मिल सकती है अब साहब ये फैसला आप करो कि बत्ती कौन से कलर की होगी और कहा लगेगी गाड़ी के ऊपर या गाड़ी के पीछे।

पटरी से उतरती तहजीब की बस…

पिछले हफ्ते खजराना की आईके सोसाइटी की ज़मीन से रास्ते के विवाद की आग में सियासी लोगो ने भी रोटी सेकने में कोई कसर नहीं छोड़ी, कागजों ओर कोर्ट में सोसायटी की मजबूती देख रुबीना इक़बाल खान ने मामले से दूरी बना ली है, जिसकी वजह से उनकी मुस्लिम नेता की छवि का कबाड़ा निकाला जा रहा है। अब सोसाइटी की जमीन को लेकर इंसानियत का तकाजा भी क़ौम को शिक्षित करना कुछ लोगो रास्ता देने से बेहतर है ओर मसला भी करोड़ों के नुकसान का है। अब किसी से कुछ मांगने का तरीका भी ये नहीं जो लोग अपना रहे है, साथ ही सोसाइटी की बस भी जवाब देने के चक्कर में पटरी से उतर रही हे बल्कि ये भी हो सकता है कि जवाबी बस का ड्राइवर कोई ओर ही हो जो सोसायटी को बदनाम कर रहा हो। लब्बोलुआब अवाम और खजराना इलाके को भी निशाना बनाने की गुगली बाल से राजनीति के चाणक्य खुद को मेहफूज़ कर नो बाल पर फ्री हिट ले रहे हैं।

दुमछल्ला,
कांग्रेस के पिटारे में ढेर सारे जुम्मन निकले…

भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कार्यकारिणी में एक भी मुस्लिम को अपनी टीम का हिस्सा नहीं बनाया ,वही कांग्रेस के पिटारे से प्रदेश की युवा टीम में कई युवा चेहरे खिल रहे है ,पर जिलाध्यक्ष एक भी नहीं। पिछली बार प्रदेश से सात जिला अध्यक्ष थे पर सवाल ये उठता हैं कि गैर सत्ता में इन ओहदो का कुछ वजऩ है भी कि नहीं, और जब इतनी कसीर तादाद की फेहरिस्त पदों की अहमियत ख़त्म कर देती है। इसी के साथ जब सत्ता में कांग्रेस आती है तो प्रदेश में आठ परसेंट को दूध में मख्खी की तरह बाहर कर दिया जाता है जबकि हाल ही में राहुल गांधी ने कहा हे कि जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी। इसी के तहत बिहार चुनाव में अठारह परसेंट के हिसाब से मुस्लिमों को टिकट दिया है तो क्या एमपी में भी कांग्रेस 22 टिकट मुस्लिमो को देगी?

मेहबूब कुरैशी ९९७७८६२२९९

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