
इंदौर (धर्मेन्द्र सिंह चौहान)। सरकार ने शहर के प्राकृतिक जल ोतों को बचाने के लिए करोड़ों रुपए स्वाह कर दिए, मगर उन्हें बचाने में आज तक कामयाब नहीं हो पाया। शहर के ज्यादातर तालाबों पर हुए अतिक्रमण के चलते उनकी चैनलों पर कब्जे हो गए, इन अवैध कब्जों ने 70 प्रतिशत तक इन तालाबों की आव पर रोक लगा रखी हैं। नतीजतन भरपूर बारिश होने के बाद भी यह कुछ तालाब 70 प्रतिशत तक ही भर पाए हैं। इन तालाबों में गर्मी के दिनों में भी पर्याप्त पानी बच पाएगा यह कहना संभव नहीं हैं। नगर निगम के उदासीन रवैए के चलते चैनलों के कब्जे नहीं हटाए जाने से ज्यादातर तालाबों की यह दुर्दशा हो रही हैं। वहीं शहर के मध्य से गुजरने वाली कान्ह नदीं पर करोड़ों रुपए स्वाह कर दिए गए मगर, वह आज तक नदी का रुप नहीं ले सकी।
शहर में स्थित तालाबों की स्थिति जानने के लिए दैनिक दोपहर की टीम ने शहर के तालाबों का जायजा लिया, तो पाया कि इन दिनों ज्यादातर तालाबों की स्थिति दयनिय हो रही हैं। चैनलों के माध्यम से प्राकृतिक रुप से भर जाने वाले तालाब इन दिनों 70 प्रतिशत भी पूरे नहीं भर पा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण इन तालाबों की चैनलों पर सालों से हो चुके कच्चे-पक्के अतिक्रमण है, जो नगर निगम को अभी तक नहीं दिखाई दिए या इन्हें हटाने की हिम्मत अधिकारी नहीं जुटा पाए। शहर के शुरुआती तालाबों में सबसे पहले मुंडी तालाब आता हैं, जो इंदौर शहर की सीमा पर स्थित पहाड़ों से बहने वाले पानी से प्राकृतिक रुप से भर जाता हैं।
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