फिनिक्स टाउनशिप: चिराग, प्रदीप अग्रवाल, राजेश मित्तल और परिसमापक ने उलझाया, 100 भूखंडों का निराकरण

कुल 129 प्रकरण थे, 58 भूखंडों का निराकरण हुआ, अब मामला उच्च् न्यायालय के द्वार

इंदौर। उच्चतम न्यायालय ने फिनिक्स टाउनशिप को लेकर भूखंड पीड़ितों को भूखंड दिये जाने को लेकर बनाई गई स्टेटस रिर्पोट के आधार पर यहां बहुत ज्यादा निराकरण नहीं हो पाये हैं। स्टेटस रिर्पोट में कुल ८८ मामलों का निराकरण किया जाना था इसमे प्रकरण की सुनवाई के दौरान ही ४१ और नये प्रकरण भी जुड़ गये। फिनिक्स टाउनशिप में प्रदीप अग्रवाल के २३ भूखंडों के निराकरण किये जाने को लेकर तात्कालिन कलेक्टर के समक्ष दिये गये सरैंडर पत्र के बाद भी भूखंड नहीं दिये जा रहे हैं। इस मामले में उच्च न्यायालय ने प्रदीप अग्रवाल की याचिका भी खारिज कर दी है। इसके अलावा स्टेटस रिर्पोट में २५ भूखंड चिराग शाह को देने है इन पर भी अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा कालिंदी गोल्ड, सेटेलाइट हिल्स और फिनिक्स को लेकर की गई सुनवाई के बाद जारी की गई स्टेटस रिपोर्ट में हर कॉलोनी के लिए अलग अलग जवाबदारियां तय की गई थी। उच्च न्यायालय द्वारा इस मामले की सुनवाई के बाद बनाई गई कमेटी द्वारा तीन माह से ज्यादा सुनवाई के बाद बीस पृष्ठों की रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंपी है। यह कमेटी सेवानिवृत्त न्यायाधीश आईएस श्रीवास्तव की अध्यक्षता में सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई के बाद फिनिक्स टाउनशिप को लेकर अंतिम आठ पन्नों में दी गई जानकारियों में स्पष्ट किया गया है कि ५८ भूखंडों को लेकर कमेटी के समक्ष निराकरण किये जाने को लेकर शपथ पत्र दिये जा चुके हैं। इसके अलावा २३ भूखंडों का निराकरण प्रदीप अग्रवाल को कहना था। प्रदीप अग्रवाल ने यहां गलत तरीके से जमीन खरीदी थी तात्कालिन कलेक्टर मनीष सिंह ने उक्त जमीन कुर्क कर यह भूखंड दिये जाने की कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी थी। प्रदीप अग्रवाल ने जिला प्रशासन को लिखित में जमीन सरैंडर करने और रजिस्ट्री कराये जाने को लेकर सहमति दी थी परंतु कलेक्टर के तबादला होते ही प्रदीप अग्रवाल ने जमीन देने से इंकार करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी। न्यायाधीश एस.के. धर्माधिकारी के यहां सुनवाई के बाद याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि यह याचिका किसी भी स्थिति में सुनवाई योग्य नहीं है। हालांकि इन २३ प्लाटों पर जिला प्रशासन द्वारा कब्जे दिलाये जा चुके हैंकेवल रजिस्ट्री होनी है।

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दूसरी ओर मेडिकेप्स के मालिक राजेश मित्तल को भी ३१ प्लाट की रजिस्ट्री करानी है। वे २००८ से २००९ के बीच फिनिक्सटाउनशिप में संचालक रहे। वे भी रजिस्ट्री कराने को तैयार नहीं है। इसके अलावा कंपनी में बैठाये गये परिसमापक अधिकारी को भी २२ भूखंडों की रजिस्ट्री करानी है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में परिसमापक अधिकारी के बारे में तल्ख टिप्पणी करते हुए स्पष्ट लिखा है कि उन्होंने कोई सहयोग प्रकरणों के निपटारे में नहीं किया है। इसी जमीन पर एक ओर हिस्सेदार चिराग शाह को लेकर स्टेटस रिपोर्ट में २५ भूखंडों के निराकरण का निर्देश दिया गया था। उन्होंने भी निराकरण के लिए अंडरटेकिंग देने के बाद भी इन प्रकरणों के निपटारे के लिए खुद को निर्दोष बताया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट उन्हें इन भूखंडों के निपटारे के लिए निर्देशित कर चुकी है।

कमेटी की रिपोर्ट में १७ वें पृष्ठ पर फिनिक्स टाउनशिप में रितेश अजमेरा को सभी जिम्मेदारी के पूर्ण निर्वहन को मानते हुए मुक्त किया है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह द्वारा की गई कार्रवाई से भूखंड पीड़ितों को न्याय मिलने के लिए बड़ा आधार माना है। अब इस मामले में उच्च न्यायालय ने सुनवाई का दौर प्रारंभ होगा। इसके बाद तय होगा कि कौन जेल जायेगा? और किसे बेल मिलेगी? तीनों टाउनशिप में रितेश अजमेरा, हैप्पी धवन, चिराग शाह, प्रदीप अग्रवाल, राजेश मित्तल, केसी गर्ग, मोहन चुघ को लेकर सुनवाई होनी है। उल्लेखनीय है कि 20 पृष्ठों की रिपोर्ट में कालिंदी गोल्ड के 55 मामलों के निराकरण के निर्देश उच्च न्यायालय ने दिए थे। वहां पर भी 35 मामलों का निराकरण चिराग शाह को करना है। कुल 96 प्लाटों का निराकरण यहां पर भी होना है।

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