अब 15 अगस्त भी विशेष दिन नहीं त्यौहार हो गया है…

आजादी के 76 वर्ष पूरे होने के साथ ही अब देश कहां खड़ा है यह सबसे बड़ा प्रश्न है। देश की जनता भी जानना चाहती है कि तरक्की के जो मापदंड तय किए गए है। क्या उस पर गर्व कर सकते हैं। आज देश विश्व की पांचवी आर्थिक शक्ति बनने जा रही है। वहीं तीसरी बड़ी महाशक्ति भी बनने का दावा भी किया जा रहा है। किसी भी देश ने उसकी शक्ति आम आदमी के चेहरे पर खुशी के रूप में दिखनी चाहिए। आम आदमी का आर्थिक आधार भी कुछ इसी प्रकार होना चाहिए।

चीन आबादी के मामले में हमसे कहीं आगे है। इसके बाद भी ज्यादा आबादी के साथ ज्यादा तरक्की की ओर लगातार बढ़ रहा है, जो देश आगे बढ़ रहे हैं वे कभी पीछे की ओर नहीं देखते। सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या आजादी का यह दिन अब गर्व का दिन बनने की बजाय अच्छे कपड़े और हाथ में झंडा लेकर घूमने का रह गया है।

धीरे-धीरे हम इस महान दिन को त्योहार के रूप में बदलते जा रहे हैं, इधर विपक्ष भी देश को कहां ले जा रहा है किस तरह के सपने दिखा रहा है यह और ज्यादा निराशाजनक है। कोरे सपनों के बीच क्या वह बेहतर विकल्प देने की स्थिति में है। आजादी के 76 साल की यह यात्रा बता रही है कि विकास के प्रयास को सामूहिक नेतृत्व के अभाव में अब इतिहास को किस कदर कोसा जा रहा है। किसी भी देश की आर्थिक उन्नति ही उस देश को अन्य देशों से आगे ले जाती है।

भारत में आर्थिक उन्नति के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वे बता रहे है कि देश उस दिशा में पहुंचेगा जरूर परन्तु जिस प्रकार से स्वप्न दिखाकर दावा हो रहा है, उस समय पर नहीं। यह भी याद रखना होगा कि क्या आज देश में रोजगार बेहतर स्थिति में है। 10 करोड़ विनिर्माण नौकरियां जोड़ने का पिछले 5 सालोंं में वादा किया परन्तु 24 लाख नौकरियां कम हो गई।

स्थिति यह है कि अब 33 हजार नौकरियों के लिए सवा करोड़ आवेदन आ रहे हैं। यह भी समझना है कि सबसे ज्यादा बंदूकों के लायसेंस मणिपुर और नागालैंड में ही जारी किए गए। बंदूक संस्कृति के परिणाम भी देखे जा सकते है। पूरा मणिपुर नफरत की आग में झुलस रहा है।

दो समुदायों के बीच पैदा की गई नफरत किस स्थिति तक पहुंच सकती है मणिपुर इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है। राहत शिविरों में रह रहे लोग क्या स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे? देश में बढ़ते अलगाव को देखते हुए बड़ी आबादी असहज महसूस कर रही है। इन सबके बीच भी देश अपने आप में बड़ी संभावनाएं देख रहा है और यह तब ही पूरी होगी जब समूचे देश में हर व्यक्ति आजादी का महत्व समझे और यह भी समझे कि वह अगली पीढ़ी को क्या देकर जा रहा है।

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