मेंदोला तय भी,मजबूत भी, फिर भी कांग्रेस ने पकड़ा मैदान

इंदौर। कभी कांग्रेस व कम्युनिस्ट का गढ़ रही 2 नम्बर विधानसभा अब भाजपा के अजेय गढ़ में बदल चुकी है जिसकी शुरुआत राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने की थी। अब यहां 3 बार से रमेश मेंदोला विधायक हैं। प्रदेश में सर्वाधिक वोटों से जितने का रिकार्ड भी यही से दर्ज हुआ है, लेकिन इस बार मामला रौचक हो सकता है, जिसका कारण पिछली परिषद में जहां कांग्रेस के मात्र 2 पार्षद जीते थे वहीं इस बार 4 पार्षद हैं व कांग्रेस से निगम के नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे विधायक मेंदोला के सामने हो सकते हंै। वे युवा होने के साथ साथ बड़ी टीम तैयार कर चुके हैं। वहीं, तीन वार्डों में भाजपा के पार्षद 500 से कम वोटों से जैसे-तैसे जीत हासिल कर पाए हैं। इसमें पांच बार के पार्षद मुन्नालाल यादव, रुपेश देवलिया और संजय जायसवाल शामिल हैं। सबसे कड़ा मुकाबला मुन्नालाल यादव के वार्ड में रहा। यहां उन्हीं की समाज के कांग्रेस उम्मीदवार ने कड़ी टक्कर दी थी।
भाजपा जहां अपने संगठन से मजबूत है। वहीं कांग्रेस संगठन विहीन हो चुकी है। उसके बावजूद कांग्रेस के नेता अपने दम पर टीम खड़ी करके मुकाबला कर रहे हैं। विधानसभा 1 नम्बर हो या राऊ विधानसभा यहां कांग्रेस नहीं नेता चुनाव जीते हैं। वैसा ही विधानसभा 2 नम्बर में नजर आ रहा है। यहां कांग्रेस संगठन नाम की चीज नहीं बची है। फिर भी उसके नेता यहां लड़ाई लड़ रहे हैं। यहां से 2023 के चुनाव को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। भाजपा से जहां रमेश मैंदोला तय है। वहीं कांग्रेस से चिंटू चौकसे से अपनी जमावट शुरू कर दी है। कांग्रेस यहां पिछले नगर निगम में 2 पार्षद ही जीता पाई थी, लेकिन इस बार नजारा बदला है। यहां कांग्रेस 4 सीट जीतकर आई है। कांग्रेस से चिंटू चौकसे, राजू भदौरिया, विनीता धर्मेंद्र मौर्य, श्रीमती अमित पटेल का जीतकर आना विजयवर्गीय गुट के लिए झटका था। अब चिंटू ही यहां विधानसभा में दम भरेंगे। वहीं जो निगम चुनाव में हारजीत के वोटों का आंकड़ा भी 7 हजार के ऊपर जाता था, वह 2 से 4 हजार में सिमट गया। उसका कारण पार्षदों के प्रति नाराजगी भी रही है लेकिन विधानसभा में ये परिदृश्य नहीं होगा, फिर भी मुकाबला रौचक ही होगा, क्योंकि चिंटू चौकसे ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है।

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