Indore Master Plan: नये मास्टर प्लान के बिना शहर बेतरतीब विकास की ओर बढ़ना शुरु

पुराने मास्टर प्लान के कार्यों को लेकर एक साल बाद भी कोई समीक्षा नहीं

Indore Master Plan

Indore Master Plan इंदौर। शहर के मास्टर प्लान का कार्यकाल २०२१ में पूरा हो चुका है। नया मास्टर प्लान बनाने को लेकर अभी तक कोई जमीनी तैयारियां शुरु नहीं हो पाई है। पिछला मास्टर प्लान भी पंद्रह साल बाद १९९० में पूरा हो पाया था। इसके बाद मास्टर प्लान बनाने की कार्रवाई शुरु हुई थी परंतु पिछले मास्टर प्लान की १६ से अधिक महत्वपूर्ण योजनाएँ आज भी अपने विकास की राह देख रही है।

सबसे बड़ी बात यह है कि इन विकास योजनाओं पर जब तक काम पूरा नहीं होगा तब तक इस शहर के विकास की रफ्तार को पंख नहीं लग पायेंगे। सारा दबाव चंद मार्गों पर ही लगातार बढ़ रहा है। सबसे महत्वपूर्ण चार ट्रांसपोर्ट हब भी पिछले मास्टर प्लान में प्रस्तावित थे इनमे से एक पर भी अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।

परिणाम यह हो रहा है कि नये मास्टर प्लान की शुरुआत के पहले इंदौर शहर के पुराने मास्टर प्लान के बचे हुए कार्यों की भी समीक्षा हो जानी चाहिए। दूसरी ओर बिना मास्टर प्लान केे शहर में बेतरतीब विकास भी प्रारंभ होना शुरु हो जायेगा। हालांकि नये मास्टर प्लान को लेकर कहा जा रहा है कि इसमे पीथमपुर, धार, देवास को भी जोड़ा जाएगा।

पिछले मास्टर प्लान ने वर्ष २०२०-२१ में अपना कार्यकाल पूरा कर लिया। इसके बारे में बताया जाता है कि १९९२ से लेकर २००५ के मध्य दो बार मास्टर प्लान बने और वह योजनाओं के सही क्रियान्वयन नहीं किये जाने से निरस्त हो गये। तीसरा मास्टर प्लान २००५-०६ में बनकर शासन के पास गया था जो २००८ में लागू हो पाया था। याने १८ साल तक शहर बिना मास्टर प्लान के ही बढ़ता चला गया।

एक बार फिर शहर में यही स्थिति दिखाई दे रही है। क्योंकि तमाम प्रयास के बाद भी कम से कम चार साल मास्टर प्लान की योजना बनाने में लग गायेंगे। तब तक बेतरतीब विकास शहर में होता रहेगा। पिछले मास्टर प्लान में शहर के बंद रास्ते खोलकर विकास की रफ्तार दिये जाने के $प्रयास किये गये थे। परंतु फिर भी लगभग यह मार्ग आज भी यथा स्थिति में ही खड़े हुए हैं। कुछ मार्गों पर काम प्रारंभ हुआ है पर रफ्तार बेहद धीमी है इसमे प्रमुख रुप से एमआर-१ एबी रोड़ पर यह निरंजनपुर चौराहे से राजीव गांधी चौराहे तक बनना था।

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इसकी लंबाई ३५ किमी के लगभग है। एमआर-२ यह ४५ मीटर चौड़ा और साढ़े चार किमी लंबा है। एमआर-४ से एमआर-११ तक बनाया जाना था। एमआर-३ इसकी लंबाई ५ किमी और चौड़ाई ४५ मीटर यह चोइथराम चौराहे से ट्रूबा कॉलेज तक बनाया जाना था। एमआर-४ लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन से बाणगंगा रेलवे क्रासिंग तक बनना है। इसकी लंबाई साढ़े चार किमी है।

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एमआर-५ यह १४ किमी लंबा तिलकपथ से होते हुए बांगड़दा तक बनाया जाना था। एमआर-६ छह किमी लंबा कलेक्ट्रेट से धार रोड़ महूनाका होते हुए गाड़ी अड्डा तक जाना है। एमआर-७ यह नवलखा चौराहे से एबी रोड़ नेमावर रोड़ तक बनना है। एमआर-८ साढ़े आठ किमी लंबा है और बंगाली चौराहे से बायपास तक बिचौली हप्सी वाले मार्ग पर बनना था। इसी प्रकार एमआर-९ लगभग १४किमी खातीपुरा से आईटीआई, न्यू देवास रोड़, रिंग रोड़ खजराना दरगाह से बायपास होते हुए बनाया जाना था। इसमे एमआर-१० पर भी उज्जैन से सीधे एबी रोड़ तक का काम हो चुका है।

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एमआर-११ ग्राम पिपल्याकुमार से लसुड़िया काकड़ के लिए है। एमआर-१२ पर अभी काम प्रारंभ हुआ है। यह बायपास पर ग्राम अरन्या से शुरु होकर लसुड़िया मोरी, तलावली चांदा, भांग्या होते हुए उज्जैन रोड़ पर पहुंचेगा। इनमे से कई मार्ग अभी भी विकास की राह देख रेह हैं। इन मार्गों के पूरी तरह विकसित हो जाने से शहर के मुख्य मार्गों पर यातायात का दबाव तीस प्रतिशत तक आसानी से कम किया जा सकेगा। अभी तक पिछले मास्टर प्लान में जो कार्य नहीं हुए हैं उनको लेकर कोई समीक्षा नहीं की गई है। जबकि मास्टर प्लान में हुए कार्यों और किये गये प्रस्ताव पर एक रिपोर्ट का आना बेहद जरुर है इससे नये मास्टर प्लान में किस क्षेत्र में कितना विकास होना है और क्या सुधार हो सकता है यह देखने में बड़ी आसानी रहेगा।

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