indore mayor: दो महीने बीते, महापौर के दावों में नहीं दिखा दम

स्मार्ट सिटी, हॉकर्स जोन, एयर क्वालिटी में सुधार सहित कई काम अधूरे

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pushyamitra bhargava

इन्दौर। indore mayor महापौर पुष्यमित्र भार्गव के पदभार ग्रहण में तीन महीने का रोडमैप जारी किया था। इसमें स्मार्ट सिटी, हॉकर्स जोन, एयर क्वालिटी में सुधार, बहुमंजिला पार्किंग सहित कई प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देकर दावा किया कि ये प्रोजेक्ट तीन महीने में पूरे कर लिए जाएंगे, लेकिन दो महीने बाद भी इसमें से एक भी दावे पर काम होता नहीं दिख रहा है। हालांकि इन कामों के दावों को पूरा होने में अभी एक महीना और बचा है, लेकिन इनमें से एक भी काम गति पकड़ता हुआ दिख नहीं रह है। ऐसे में ये काम कब पूरे होंगे, इसे लेकर संशय है।

महापौर भार्गव ने 6 अगस्त को शपथ ग्रहण के बाद पांच संकल्प दिलाने के साथ ही घोषणा की थी कि वे अपना रोडमैप जारी कर तीन महीने में प्रमुख कामों को प्राथमिकता से पूरा करेंगे। इनमें भी सबसे पहले स्मार्ट सिटी अधूरे काम पूरे किए जाएंगे, लेकिन ढाई महीने का समय बीत जाने के बाद महापौर के दावे हवाई होने जा रहे हैं। राजबाड़ा, गोपाल मंदिर, मल्हारराव होलकर एवं बोलिया सरकार छत्रियों को जीर्णोद्धार, बड़ा गणपति से कृष्णपुरा पुल, एमजी रोड तक का काम, खजराना गणेश मंदिर प्रवेश द्वार का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। आगामी 3 माह में 3 किमी लंबी प्रमुख सड़कों का कार्य पूर्ण करने का दावा किया गया था, जिनमें 400 करोड़ से अधिक राशि से निर्माणाधीन प्रस्तावित 37 किलोमीटर के मेजर रोड, इसमें तेजाजी नगर से भंवरकुआं, आई-2, एमआर-3, एमआर-55, आरडब्ल्यू 1 आदि प्रमुख सड़कों के निर्माण एवं चौड़ीकरण की शुरुआत करने की बात कही थी।

टैंडर के बाद काम शुरू नहीं

हाथीपाला पुल का का निर्माण टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी शुरू नहीं हो पाया। तीन इमली चौराहा के पास स्थित पुल के चौड़ीकरण, साउथ तोड़ा, नार्थतोड़ा, सर्वहारा नगर गली नंबर 5-6, न्याय नगर, तीन इमली बस स्टैण्ड के पास, ग्राम कनाड़िया में सेवाकुंज अस्पताल के पास, आदर्श इंदिरा नगर धार रोड तथा तुलसी नगर मेनरोड के निर्माणाधीन पुल-पुलियाओं का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। तीन महीने में शहर के प्रत्येक वार्ड में एक हॉकर्स जोन का निर्माण का दावा किया था, लेकिन जो हाकर्स जोन बने हैं वहां भी रेहड़ी पटरी वालों को शिफ्ट करने में निगम अब तक असफल रहा है। 80 हजार स्ट्रीट लाइट को एलईडी लाइट्स में परिवर्तित करने के तहत 20 हजार नई एलईडी लाइट्स लगाने का काम अब तक आधा अधूरा ही हो पाया है।

संजीवनी क्लीनिक की शुरुआत नहीं हो पाई

निगम के प्रत्येक वार्ड में संजीवनी क्लीनिक की शुरुआत अब तक नहीं हो पाई है। जबकि महापौर ने इसे अपनी तीन माह की प्राथमिकता पर रखा था। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए 85 नए संजीवनी क्लीनिक की सौगात तीन महीने खत्म होने से पहले दिखना मुश्किल है।

अभियान भी ठंडा पड़ा

शहरी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की रोकथाम तथा वायु गुणवत्ता के लिए जिला प्रशासन, म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, यातायात विभाग, औद्योगिक संस्थाओं के साथ समन्वय कर वायु गुणवत्ता सुधारने के प्रयास का अभियान अब शहर की सड़कों पर दिखाई नहीं दे रहा है। हरियाली क्षेत्र में वृद्धि एवं एयर क्वालिटी में सुधार के लिए सिटी फॉरेस्ट डेवलप करने के लिए टिगरिया बादशाह सहित अन्य चयनित स्थानों पर काम शुरू नहीं हो पाया। पर्यावरण सुधार को लेकर निगम कई महीनों से काम रहा है, लेकिन कुछ दिन बाद अभियान को विराम दे दिया गया। indore mayor

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सातवीं बार नंबर वन आने के लिए

शहर के प्रमुख मार्ग देवासनाका चौराहा, नवलखा चौराहा, भंवरकुआं चौराहा इत्यादि प्रमुख चौराहों के लेफ्ट टर्न एवं सौन्दर्यीकरण के कार्य के लिए सिर्फ टेंडर जारी हो पाए हैं। तीन महीने में काम होना असंभव है। इस काम के लिए यातायात पुलिस से समन्वय कर विभिन्न चौराहों के लेफ्ट टर्न का काम, रोड मार्किंग, ट्रैफिक सिग्नल का सिक्रोनाइजेशन का काम कराया जाना था।

सभी महत्वपूर्ण चौराहों पर अत्याधुनिक सिग्नल व्यवस्था स्थापित किया जाना था। सिटी सर्विलेन्स नीति लागू कर दी गई है, लेकिन इस पर योजना बनाकर अबतक काम शुरू नहीं किया गया है। शहर के सार्वजनिक स्थल भवनों व कॉलोनियों के रास्ते, गेट एवं पार्किंग स्थानों को सीसीटीवी कैमरों से इंटीग्रेटेड कन्ट्रोल कमांड सेंटर से जोड़ने का काम तीन महीने की समय सीमा में होना असंभव है। वहीं, बहुमंजिला पार्किंग,अहिल्या वन, अमृत योजना के काम भी गति नहीं पकड़ पाए। भू-जल संवर्धन महाभियान भी ठंडा पड़ गया। indore mayor

भिक्षुक मुक्त शहर को लेकर काम नहीं हुआ

देश के 10 शहरों में चयनित इन्दौर शहर में भिक्षुकों का सर्वेक्षण, रेस्क्यू, पुर्नवास व कौशल प्रशिक्षण देकर भिक्षुक मुक्त अभियानÓ चलाया जाना था और इन्दौर शहर को भिक्षुक मुक्त शहर बनाया जाना था, जिसे लेकर अब तक कोई काम होता नहीं दिख रहा है।

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