इंदौर। मध्यप्रदेश में अब अफसरों की इतनी कमी हो गई है की एक अधिकारी सप्ताह में दो शहरों में जाकर दो संभाग का काम संभाल रहा है। यह स्थिति इंदौर में पदस्थ नापतौल नियंत्रक की है, जो सप्ताह में तीन दिन इंदौर और 3 दिन भोपाल के नापतौल विभाग में बैठकर विभाग का काम संभाल रहे हैं। वहीं प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में लाखों व्यापारिक प्रतिष्ठान सिर्फ दो नापतौल निरीक्षक के भरोसे चल रहे हैं। शासन ने पिछले दिनों आदेश जारी कर कई शहरों में नापतौल कार्यलयों को बंद भी कर दिया है।
इंदौर संभाग कमिश्नर कार्यालय के समीप नापतौल विभाग की प्रयोगशाला के साथ ही कार्यालय संचालित होता है। आरएस चौहान की ड्यूटी 3 दिन भोपाल और 3 दिन इंदौर रहती है। मजबूरी यह की कोई योजना पूरी चला नहीं सकते। अधिकारी के साथ कर्मचारियों के अभाव के चलते इंदौर में तो ठीक से काम नहीं हो पा रहा है, बल्कि भोपाल में भी काम प्रभावित हो रहे हैं। नापतौल विभाग भी एक अहम सरकारी विभाग होने के साथ-साथ नापतौल विभाग की जिम्मेदारियां भी अधिक है, जिसमें तौल कांटे बांट आदि की जांच के साथ-साथ समय-समय पर अभियान भी चलाया जाता है, लेकिन इंदौर में तो लंबे समय से विभाग की कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है।
सेवानिवृत्ति के बाद नए पद भरे ही नहीं जा रहे हैं। हालत यह है कि भोपाल में ही केवल चार निरीक्षक हैं, जबकि दो लाख से ज्यादा प्रतिष्ठान हैं। इंदौर में तो केवल दो निरीक्षकों से ही काम चल रहा है। निरीक्षकों के 110 पदों में से 42 पद खाली हैं। हाल ही में मप्र शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने आदेश जारी कर आठ तहसील कार्यालयों को बंद कर जिला कार्यालयों में अटैच किया है। आदेश के अनुसार महेश्वर जिला खरगोन, बड़नगर जिला उज्जैन, जावरा जिला रतलाम, राजगढ़ जिला धार, नरसिंहगढ़ जिला राजगढ़, गंजबासौदा जिला विदिशा, डबरा जिला ग्वालियर, गोहद जिला भिंड कार्यालयों को बंद कर दिया गया है।
मेरी मजबूरी है मुझे 3 दिन भोपाल देखना पड़ता है और 3 दिन के लिए इंदौर रहता हूं। कभी-कभी समय अभाव के कारण यहां समय नहीं दे पाते हैं। नापतौल विभाग का काम प्रभावित नहीं है, इसलिए हम लोग काम कर रहे हैं। आर. एस. चौहान, संयुक्त नियंत्रक,नापतौल विभाग।