16 गृहनिर्माण संस्थाओं की 48 याचिकाएं खारिज 1200 करोड़ की जमीनें प्राधिकरण को मिली

इंदौर उच्च न्यायालय में 2007 में याचिकाएं दायर की गई थी, प्राधिकरण को मिलेगा बड़ा लाभ

इंदौर। उच्च न्यायालय की डबल बैंच ने कल एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 2007 में 16 गृहनिर्माण संस्थाओं की 1200 करोड़ से अधिक की जमीनों पर किए दावे को खारिज कर दिया है। अब यह जमीनें इंदौर विकास प्राधिकरण के अधीन आ जाएंगी। उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि 20 प्रतिशत विकसित प्लाट देने की पात्रता केवल किसानों को हैं, उन संस्थाओं को नहीं जिनकी जमीनें पहले से ही अधिग्रहित हो चुकी है। जिन गृहनिर्माण संस्थाओं ने उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की थी, उसमें कई विवादास्पद गृहनिर्माण संस्थाएं भी शामिल हैं, जो लम्बे समय से अपने सदस्यों को इन्हीं विवादों के चलते भूखंड नहीं दे रही थीं।

स्कीम नंबर 136 और 140 में 16 से अधिक गृहनिर्माण संस्थाएं ऐसी थी जिनकी जमीनों का इंदौर विकास प्राधिकरण ने अधिग्रहण कर लिया था। दूसरी ओर नए भूअधिग्रहण कानून के हिसाब से उन संस्थाओं ने उन जमीनों पर 20 प्रतिशत भूखंडों की दावेदारी की थी।

इस मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जब जमीनें अधिग्रहित हुई थी, तब संस्थाओं ने कोई आपत्ति क्यों नहीं ली और अब क्यों, भूमि अधिग्रहण कानून में किसानों को 20 प्रतिशत प्लाट देने की पात्रता दी गई है, ना कि प्लाट काटने वाली किसी संस्था को। जस्टिस विवेक रूसिया और अनिल वर्मा की बैंच ने 7 दिसंबर 2007 को दायर हुई इन 48 याचिकाओं को एकत्रीकरण के बाद कल सुनवाई के बाद शाम 5 बजे यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा स्कीम नंबर 136 और 140 योजनाएं इंदौर विकास प्राधिकरण आवास के लिए ही लाया था, ताकि आवासहीन लोगों को भूखंड दिए जा सकें।

संस्थाओं ने अधिनियम 1973 की धारा में संशोधन के लिए भी चुनौती दी थी। इस मामले में निचली अदालत ने याचिकाकर्ताओं को मुआवजे के बजाय 20 प्रतिशत विकसित प्लाट देने की सीमा तय कर दी थी। प्राधिकरण की मांग पर ही कलेक्टर ने भूमिअधिग्रहण की कार्रवाई की थी, तब कोई भी संस्था 20 प्रतिशत प्लाट देने के लिए न कोर्ट गई और न ही कलेक्टर के पास। इसलिए मामले का गहराई से अध्ययन करने के बाद सभी 48 याचिकाओं को खारिज किया गया। उल्लेखनीय है कि योजना क्रमांक 136 और 140 में इन्हीं याचिकाओं के कारण संस्थाओं ने एक हजार से अधिक प्लाट सदस्यों को न देते हुए इन्हीं मामलों के उच्च न्यायालय में चलने का बहाना दिया जा रहा था। अब संस्थाओं को इन सदस्यों के भूखंडों का निराकरण करना होगा।

कौन-कौन सी संस्थाएं शामिल

लगभग 1200 करोड़ की जमीनें अब इंदौर विकास प्राधिकरण के कब्जे में आ जाएगी। इन पर बड़ी तादाद में बसाहट की जा सकेगी। इनमें मालवीय नगर, महावीर गृहनिर्माण, आदर्श मैकेनिक गृहनिर्माण, परशुराम गृहनिर्माण, विनय नगर गृहनिर्माण, माणीकृपा गृहनिर्माण, सविता गृहनिर्माण, जयहिंद गृहनिर्माण, सुखलिया गृहनिर्माण सहित 16 संस्थाएं शामिल हैं, जिनकी याचिकाएं खत्म होते ही जमीनें प्राधिकरण की होगी। इन्हीं में जमीनों के जालसाज दीपक जैन मद्दा की संस्थाओं की जमीनें भी शामिल है।

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