फिल्मी गलियों से संसद तक का सफर उनका शानदार रहा

वैजयंती माला के जन्मदिन के अवसर पर

इंदौर। 13 अगस्त को ‘सुनहरे युगÓ की पहली सुपर स्टार अभिनेत्री और कुशल नृत्यांगना ‘वैजयंतीमालाÓ का जन्म दिवस है।


आपका जन्म सन् 1936 में हुआ था, बचपन से ही नृत्य का शोक था। परिवार ने उनके लिये प्रशिक्षण की व्यवस्था की जल्दी हो उन्होंने भरत नाट्यम और कर्नाटक शैली के नृत्य करने में महारत हासिल कर ली। उन्हें अपनी आयु के 16 वे वर्ष मे रंगमंच पर अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन करनें का अवसर मिला। उन्हें पहली तमिल फिल्म वरसई में अभिनय का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने फिर पीछे पलटकर नहीं देखा। लगातार हिंदी फिल्मों में भी उनकी मांग बनी रही।

सन् 1955 में महान फिल्मकार बिमलराय ने उन्हें दिलीप कुमार, सुचित्रा सेन और मोतीलाल के साथ ‘देवदासÓ फिल्म में प्रस्तुत किया। फिल्म में उनके अभिनय और नृत्य दोनों के लियें उन्हें प्रशंसा प्राप्त हुई। इस फिल्म के लिए उन्हें ‘फिल्म फेयरÓ द्वारा श्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार घोषित किया गया परन्तु उन्होंने ये पुरस्कार ये कहते हुए स्वीकार नहीं किया कि वो इस फिल्म की नायिका है, सह नायिका नहीं।

फिल्म ‘नागिनÓ की जबरदस्त सफलता के बाद वो दर्शको की चहेती हीरोईन बन गई। इसके बाद उन्होंने नया दौर, संघर्ष सहित संगम, गंगा जमुना जैसी अनेकों पुरस्कार प्राप्त फिल्मों में अभिनय किया।
कालांतर में उन्होंने राजकपूर साहब के पारिवारिक चिकित्सक ‘डॉक्टर बालीÓ से विवाह कर लिया। आगे चलकर वे राजनीति में सक्रिय हो गयी और ‘राज्यसभाÓ की संसद सदस्या चुनी गई। भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। फिल्म फेयर द्वारा उन्हें सन् 1959 मे ‘मधुमतीÓ सन् 1962 में ‘गंगा-जमुनाÓ और सन् 1965 में ‘संगमÓ के लिये श्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार प्रदान किया गया।
अपने कैरियर के सुनहरे समय में उन्होंने अपना ‘डांस ग्रुपÓ बनाया और उसके माध्यम से दुनिया भर में स्टेज शो करती रही। फिल्मों में काम करना बंद किया इसके बाद भी स्टेज शो जारी रहे। वैजयंतीमाला को जन्म दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं।

-सुरेश भिटे

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