भाजपा को भूलिए ! मुसलमानों की ज़रूरत किसी भी दल को नहीं ?- श्रवण गर्ग
आबादी के कोई सोलह प्रतिशत (या लगभग बाईस करोड़)मुसलमानों को इस सचाई का पता चलने में पचहत्तर साल लग गए कि भाजपा ही नहीं किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल को अब राष्ट्रीय स्तर पर उनकी ज़रूरत नहीं बची है।मुसलमानों का यह भ्रम ध्वस्त कर दिया गया है कि कोई भी दल उनके वोटों के बिना सरकार नहीं बना सकता।सर्वोच्च संवैधानिक पदों-राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति- के लिए उम्मीदवारों की घोषणा होने तक मीडिया द्वारा प्रचार किया जा रहा था कि दो में से किसी एक पद के लिए भाजपा किसी मुसलिम नेता को एनडीए का उम्मीदवार बना सकती है।
