भोपाल के दरबार में हाजिरी बजा रहे कांग्रेसी पार्षद

नेता प्रतिपक्ष-स्थानीय स्तर पर पार्षदों को साधने के लिए नेताओं के घर बैठकों का दौर शुरू

 

इंदौर। घोषणा से लेकर मतगणना तक इंदौर नगर निगम का चुनाव तराजू पर टिका हुआ था। पड़ला किस तरफ झुकेगा, इसको लेकर पूरे शहर का बाजार गर्म था, पर जैसे ही परिणाम आना शुरू हुए भाजपा का पंच भी दिखने लगा और भाजपा महापौर प्रत्याशी की बढ़त एक लाख से अधिक वोटों की हो गई, जहां निगम में भाजपा को स्पष्ट बहुमत के साथ विजयी महापौर दिख रहा था तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी वरिष्ठ पार्षदों ने मतगणना स्थल से ही तैयारी शुरू कर दी, जिसकी सुगबुगाहट अब दिखने लगी है।

कांग्रेस से जीते वरिष्ठ पार्षद भी जानते हैं कि कांग्रेस में इतनी आसानी से कुछ भी तय नहीं होता और मेंढकों को तराजू में तोलने का हुनर भी कांग्रेस के पास ही है। ऐसे में शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल के साथ अन्य वरिष्ठ नेताओं के घरों पर निगम में नेता प्रतिपक्ष को लेकर जीते हुए पार्षदों में सहमति बनाने का दौर चल रहा है, जिसमें प्रबल दावेदार के रूप में विधानसभा पांच से पूर्व नेता प्रतिपक्ष फौजिया शेख अलीम, एक से विनितिका दीपू यादव और दो चिंटू चौकसे को लेकर कांग्रेसी गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म है।

मप्र अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शेख अलीम महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा, विधायक विशाल पटेल और शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल के माध्यम से अपनी पत्नी फौजिया शेख को फिर से प्रतिपक्ष बनाए जाने की जुगत में लगे हुए हैं, परन्तु उनकी राह में कांग्रेस के अल्पसंख्यक पार्षद रुबीना इकबाल खान, अनवर कादरी, सादिक खान रोड़ा बने खड़े हंै तो वहीं इस बार उनको अंसाफ अंसारी, अयाज बेग, अनवर दस्तक का साथ भी मिलना मुश्किल दिखाई दे रहा है, जिसको लेकर शोभा ओझा ने सभी पार्षदों से चर्चा भी की।

विनितिका यादव के लिए उनके पति दीपू यादव पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के यहां से समर्थन जुटाने का प्रयास कर रहे है जिसके लिये अनिल यादव के साथ शहर के अन्य वरिष्ठ नेता पार्षदों से सम्पर्क कर रहे तो वहीं दो नम्बर विधानसभा से जीते चिंटू चौकसे भी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भरोसे नेता प्रतिपक्ष बनने की कतार में लगे हुए हैं और स्थानीय स्तर पर स्वयं पार्षदों को साधने में लगे हंै।

पटवारी और संजय फंसे धर्मसंकट में

एक तरफ संजय शुक्ला अपनी विधानसभा में विनितिका दीपू यादव की दावेदारी से पशोपश में हैं तो वहीं दूसरी तरफ जीतू पटवारी धर्म संकट में हंै। एक तरफ उनके कट्टर समर्थक चिंटू चौकसे ने ताल ठोक रखी है तो दूसरी तरफ उनके मित्र व सहयोगी शेख अलीम अपनी पत्नी के लिए एक बार पुन: नेता प्रतिपक्ष के लिए उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब देखना यह है कि फौजिया शेख अलीम को एक कार्यकाल मिलने के बाद वे चिंटू चौकसे के नाम पर सहमति बना पाते हैं कि नहीं पटवारी के लिए एक तरफ कुआ है तो दूसरी तरफ खाई है। अंतत: राऊ विधायक जीतू पटवारी एवं महापौर प्रत्याशी संजय शुक्ला की चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है।

गैर अल्पसंख्यक को बनाए जाने की मांग

जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी अकर्मण्यता की राजनीति कर रही है, जिसके कारण ज्यादातर कांग्रेस के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की मंशा है कि कमलनाथ किसी गैर अल्पसंख्यक नेता को नेता प्रतिपक्ष बनाए अन्यथा 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा। भाजपा कांग्रेस पर फिर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाएगी और चुनाव फिर मूल मुद्दों से भटक कर हिन्दू-मुस्लिम के इर्दगिर्द आकर खड़ा हो जाएगा। बहरहाल इंदौर से लेकर भोपाल तक इन नेताओं ने जमावट करना शुरू कर दी है। अब देखना यह है कि जिस तरह सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति कमलनाथ कर रहे वह इंदौर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष के पद पर किसे महत्वपूर्ण जवाबदारी देते हैं।

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