एनटीसी की जमीन पर खड़ी की गई 60 दुकानों को लेकर मामला उच्च न्यायालय पहुंचा

एनटीसी ने अवैध माना, निगम से भी मांगा जबाव

इंदौर। एनटीसी की जमीन पर खड़ी 60 दुकानों को लेकर मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया है। कोर्ट में मामले में सुनवाई के बाद दुकानदारों को नोटिस दिए हैं। सभी दुकानों के बाहर नोटिस चस्पा किए हैं। नोटिस मिलते ही पूरे मामले से निगम ने पल्ला झाड़ लिया है। यह दुकानें दो माह पहले अवैध रुप से बनाई गई थी। इन दुकानों के बनने से कई बार विरोध भी हुआ था।

 

कुलकर्णी भट्टा की नई दुकानों को कोर्ट का नोटिस एनटीसी ने अवैध माना, निगम से भी मांगा जबाव नवनिर्मित कुलकर्णी भट्टा की दुकानों को लेकर कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। इसमें निगम से भी जबाव मांगा है। कोर्ट में इस संबंध में एनटीसी ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि दुकाने बगैर उनकी अनुमति के खड़ी की गई है, निगम ने अब तक दुकानों को जमींदोज करने की कार्रवाई नहीं की।

जानकारी के मुताबिक, निगम ने कुलकर्णी भट्टा पुल के साथ स्वदेशी मिल तक बेहतर यातायात के लिए सड़क चौड़ीकरण का काम शुरू किया था। नवनिर्मित कुलकर्णी भट्टा की दुकानों को लेकर कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। इसमें निगम से भी जबाव मांगा है। कोर्ट में इस संबंध में एनटीसी ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि दुकाने बगैर उनकी अनुमति के खड़ी की गई है, निगम ने अब तक दुकानों को जमींदोज करने की कार्रवाई नहीं की। कल्याण मिल पर बनी 60 से अधिक दुकानों के मालिकों को कोर्ट ने बेदखली का नोटिस जारी किया है। बेदखली के लिए एनटीसी ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। दुकानों के साथ इसमें निगम को भी दोषी मानते हुए प्रतिवादी(पार्टी) बनाया है। नोटिस मिलते ही दुकानदारों में हड़कंप मच गया है। कुलकर्णी भट्टा पुल निर्माण के दौरान स्वदेशी मिल तक सड़क चौड़ीकरण को लेकर निगम ने करीब डेढ़ माह पहले 51 दुकानों को जमींदोज किया था। सभी दुकानें निगम के आधिपत्य की थी, लेकिन सड़क चौड़ीकरण में बाधक होने से उन्ेहं हटाया गया। दुकानों को तोड़ने के बाद निगम ने सड़क निर्माण का काम शुरू किया था। इसी बीच, कतिपय दबंगों के संरक्षण में बेदखल दुकानदारों ने फिर दुकानों को खड़ा कर दिया।

दुकानों के अचानक खड़ी होने से विरोध के स्वर मुखर हो गए। दुकानों का निर्माण कैसे हो गया, इसे लेकर निगम ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। नई दुकानों के पुन: संचालित होने से फुटपाथ का काम प्रभावित हुआ, वहीं वाहन चालकों को भी परेशानी आने लगी। क्योंकि, दुकानों के सामने ग्राहकों व दुकानदारों के वाहन बेतरतीब ढंग से खड़े रहते हैं। निगम की मंशा थी कि यह सड़क चौड़ी होने से वाहन चालकों को सुगम यातायात मिल सकेगा। मामले में जानकारी लगने पर एनटीसी ने पिछले दिनों संज्ञान में लेते हुए कोर्ट में याचिका दायर की थी।

इसमें उल्लेख किया कि बगैर एनटीसी की अनुमति के दुकानदारों ने अवैध रुप से निर्माण कर लिया है। कोर्ट ने एनटीसी का पक्ष सुनकर दुकानदारों व निगम को नोटिस जारी किया है। नोटिस में निगम ने जबाव मांगा है कि दुकानों का अवैध निर्माण कैसे हो गया। नोटिस मिलने के बाद निगम में अपना बचाव करते हुए कहा कि दुकानों को लेकर उन्हें कोई जानकारी नहीं है। दुकानें निगम की जमीन पर नहीं है। एनटीसी अपनी जमीन को सुरक्षित करने के लिए स्वतंत्र है।

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