दोनों दल के प्रत्याशियों का नया वार्ड, कांटे की टक्कर

चंदू शिंदे को भाजपा के दिग्गजों का सहारा, राजू भदौरिया अपनी टीम के साथ सक्रिय

इंदौर। नगर निगम चुनाव में संभवत: पहली बार भाजपा-कांग्रेस के कई दिग्गज नेता आमने-सामने है। इससे किसी एक के एकतरफा जीत के दावे नहीं किए जा सकते। विधानसभा 2 में वार्ड 22 पं. दीनदयाल (लवकुश आवास) भी ऐसा ही वार्ड है जहां पिछली बार भाजपा पार्षद ने 15 से 20 करोड़ के विकास कार्य का दावा किया, मगर घरों के बाहर पीछे बेकलाइन में अभी भी कचरा, गंदगी है। वार्ड में जलजमाव, ड्रेनेज, गंदे पानी की समस्या रहती है। गर्मी में यहां भी निजी टैंकर निगम को चलाने पड़ते है। इस बार दोनों ही दलों के नए प्रत्याशी आमने-सामने है। भाजपा से चार बार के पार्षद चंदूराव शिंदे को यहां उतारा गया है तो कांग्रेस ने युवा और मिलनसार राजू भदौरिया को टिकट दिया है। दोनों प्रत्याशियों में काटे की टक्कर बताई जा रही है।

शहर की लगभग हर विधानसभा में दिग्गज नेता आमने-सामने है। भाजपा ने अपने 56 पार्षदों के टिकट काटकर नए लोगों को जहां मौका दिया। वहीं कांग्रेस ने अधिकांश वार्डों में पुराने पार्षदों पर ही भरोसा जताया है। दिग्गजों के चुनाव में किसी एक प्रत्याशी की एकतरफा जीत का दावा अब तक कोई नहीं कर रहा है। वार्ड 22 में करीब दो दर्जन कॉलोनियां है और 28 हजार मतदाता है। यहां लवकुश आवास विहार सबसे बड़ी कॉलोनी है जहां लगभग 200 बिल्डिंगें हैं और हजारों परिवार रहते है। इसके अलावा रविदास नगर, शबरी नगर, सुखलिया टीएम सेक्टर, सीएम सेक्टर, एएम सेक्टर से लेकर आदर्श मौलिक नगर, वीणा नगर जैसी मुख्य कॉलोनियां और बस्तियां हैं। सबसे अधिक महाराष्ट्रीयन, राजपूत, ब्राह्मण समाज के मतदाता है इस हिसाब से शिंदे और भदौरिया दोनों को यहां समर्थन मिल रहा है मगर जीत किसकी होगी यह तो मतगणना के बाद ही ज्ञात होगा।

बेकलाइनों में कचरा, गंदे पानी की भी समस्या
वार्ड में गंदे पानी, ड्रेनेज, सीवरेज की सबसे अधिक समस्या है। बारिश में कई सड़कों, गलियों में 1 से 2 फीट पानी भर जाता है और लोगों के घर भी डूब जाते है। पूर्व पार्षद शकुन्तला गुर्जर ने कहा कि मैंने अपने कार्यकाल में 15 से 30 करोड़ के काम करवाए है। हालांकि भाजपा ने गुर्जर को टिकट नहीं दिया और दूसरे वार्ड से चंदूराव शिंदे को यहां लाकर चुनाव लड़वाया जा रहा है। इसी तरह राजू भदौरिया भी गौरीनगर क्षेत्र में पिछला चुनाव लड़े थे और इस बार कोई भी पहली बार यहां चुनाव लड़ रहे है। वार्ड में सरकारी अस्पताल नहीं है न ही दूसरी शासकीय योजनाओं का लाभ पूरी तरह से लोगों को मिल रहा है।

बगीचों में रहता है अंधेरा
लवकुश आवास विहार के कई बगीचे खस्ता हालत में है। रात में बगीचों, सड़कों की लाइट बंद रहती है। अंधेरे के कारण कई स्थानों पर असामाजिक तत्व बैठे रहते है। शराबखोरी, जुआखोरी धड़ल्ले से चलती है। सुरक्षा को लेकर भी यहां पुलिस निष्क्रिय होती है। सड़क, फुटपाथ पर अतिक्रमण, कब्जे है। जिससे कई बार वाहन चालकों को मुख्य सड़कों से निकलने में परेशानी उठाना पड़ती है।

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