डेढ से दो हजार में मिल रहा मौत बांटने का लाइसेंस

आरटीओ में खुलेआम चल रहा जनता की जान से खिलवाड़ करने का खेल

इंदौर (आशीष साकल्ले)।
आप मानें या न मानें, लेकिन हकीकत यह है कि महज डेढ से दो हजार रुपए में ही मौत बांटने का लाइसेंस मिल रहा है। यह गौरखधंधा चल रहा है इंदौर आरटीओ में, जहां पर खुलेआम जनता की जान से खिलवाड़ करने का खेल चल रहा है। हद तो यह है कि तमाम जिम्मेदारों को खबर है और सभी को पता भी है, लेकिन शुभ-लाभ के गणित के चलते सभी ने अपनी आंखों पर गांधारी की तर्ज पर पट्टी बांध रखी है।

दरअसल दो पहिया-चार पहिया एवं भारी वाहन चलाने के लिए परिवहन विभाग व्दारा ड्रायविंग लाइसेंस जारी किए जाते हैं। इन्हें जारी करने के लिए सख्त नियम हैं और इसके लिए आवेदक को बाकायदा ट्रायल देना होता है। बावजूद इसके, इंदौर आरटीओ में इन दिनों डेढ से दो हजार रुपए में लाइसेंस बिक रहे हैं। इन्हें ही मौत का लाइसेंस कहा जा रहा है। ट्रायल के नाम पर यहां आवेदक से ३००-४००० मीटर ट्रेक की जगह पर ५०-१०० मीटर बाइक व अन्य वाहन चलवाकर उन्हें फेल-पास करने के बाद लाइसेंस जारी किए जाते हैं। जो आवेदक ट्रायल देकर लाइसेंस नहीं बनवाना चाहते, वे दलालों को डेढ से दो हजार रुपए देकर लाइसेंस प्राप्त कर लेते हैं। कहने का मतलब, दक्षता साबित किए बिना ही लाइसेंस देकर इंदौर आरटीओ मौत बांटने का लाइसेंस जारी कर रहा है।

 

क्या है लाइसेंस की व्यवस्था…
देखा जाए तो केन्द्र सरकार के सारथी ऐप पर लर्निंग ऐप पर लाइसेंस को आनलाइन कर दिया गया है। आनलाइन दस्तावेज जमा कर इसके लिए अप्लाय किया जा सकता है। आनलाइन ही फीस जमा हो जाती है और वहां से लर्निंग लाइसेंस जारी हो जाता है। बावजूद इसके इंदौर आरटीओ में अलग ही व्यवस्था है। यहां ऐप पर आने वाले दस्तावेजों का वैरिफिकेशन इंदौर आरटीओ व्दारा ही किया जाता है। कई लोगों के दस्तावेजों का महिनों तक वैरिफिकेशन ही नहीं किया जाता और जो लोग दलालों को भेंट-पूजा अर्पित कर देते हैं या जिनका अपना रसूख होता है, उनका काम जल्दी बन जाता है।

 

कैसे चल रहा है गौरखधंधा…
यहां पर यह पासंगिक है कि दस्तावेज सही होने पर दो पहिया-चार पहिया वाहन चालक का ट्रायल ट्रेक पर ट्रायल लिया जाता है। कैमरे से निगरानी की जाती है और यातायात नियमों के पालन की रिकार्डिंग की जाती है। इसके बाद दस्तावेजों की कम्प्यूटर में इंट्री करते हुए आनलाइन फोटो अपलोड किए जाते हैं। फिर, सिग्रेचर की पुष्टि होने पर लाइसेंस जारी किया जाता है। बावजूद इसके, इंदौर आरटीओ में लाइसेेंस के लिए आने वाले आवेदकों के दस्तावेजों की जांच करने के साथ ही फोटो और डिजटल सिग्रेचर करवा लिए जाते हैं। आवेदक ने यदि रिश्वत दी तो बगैर टेस्टिंग के ही आवेदन स्वीकृत कर लिया जाता है। अन्यथा ट्रायल देना होता है। लाइसेेंंस के लिए आरटीओ में अत्याधुनिक ट्रायल ट्रेक बनाया गया था, लेकिन अब यह बरबाद हो चुका है और इसके छोटे से हिस्से में १०० फीट की जगह पर ट्रायल लेकर टेस्टिंग ले ली जाती है। लनिंग लाइसेंस की सरकारी फीस ४४७ रुपए है किन्तु ऐजेन्ट इसके ५०० रुपए वसूलते हैं। इसी प्रकार परमानेंट लाइसेंस के लिए ट्रायल देने पर १०७२ रुपए की जगह २५०० रुपए वसूले जाते हैं और यदि ट्रायल नहीं दिया तो डेढ हजार से दो हजार रुपए देना होते हैं।

 

कोडवर्ड से चलता है यहां सारा खेल
सूत्रों के मुताबिक, इंदौर आरटीओ में लर्निंग लाइसेंस के लिए आनलाइन टेस्ट आवेदक की जगह पर एजेंट ही दे देते हैं। वे ओटीपी अपलोड करते रहते हैं। परमानेंट लाइसेंस के लिए एजेंट दस्तावेज पर गत्ते का टुकड़ा लगा देते हैं। उस पर अपने नाम या फर्म की सील होती है। टेस्टिंग के साथ लाइसेंस बनाने की बात होती है तो दस्तावेजों पर सील के साथ सीधी लाइन खींचकर उस के नीचे तारीख डाल दी जाती है। यदि लाइसेंस बिना ट्रायल के बनना है तो सीधी लाइन और तारीख के आसपास गोल घेरा बना दिया जाता है। यहां पर महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि लाइसेंस शाखा के बाबू थंब मशीन पर अपने अंगूठों के निशान से स्वीकृति देते हैं। ये हाथों हाथ होना चाहिए, लेकिन यहां पर प्रक्रिया शाम के बाद होती है। जब सारे एजेंट चले जाते हैं तो दस्तावेजों के निशान देखकर उन्हें थंब मशीन के जरिए स्वीकृति दे दी जाती है।

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