होटल सायाजी: बचाने की कवायद पूरी, फिर कमेटी बनाई जो बतायेगी लीज शर्त का उल्लंघन हुआ है या नहीं…?

उल्लंघन के कारण ही तो लीज निरस्त की थी, बड़े आईएएस अधिकारी के दबाव में कुछ नहीं हो रहा

इंदौर।
शहर के मध्य स्थित होटल सायाजी में लीज शर्तों के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर मामला गरम हो रहा है। हर बार की तरह इस बार भी सख्त कार्रवाई का संदेश बाजार में पहुंचा है। परंतु सूत्र बता रहे हैं कि इंदौर विकास प्राधिकरण होटल सायाजी के मामले में कुछ भी नहीं करने जा रहा है। दूसरी ओर होटल सायाजी द्वारा नियमों का उल्लंघन कर अपने यहां के बेचे गये दोनों गार्डन वापस खरीद लिये हैं। अब केवल होटल के आगे खाली प्लाट पर दुकान का निर्माण कर अलग अलग हिस्सों में ३५ व्यक्तियों को लीज शर्तों के खिलाफ बेचे जाने का मामला ही सामने बचा है। दस साल से केवल प्राधिकरण नोटिस पर ही खेल खेल रहा है। परंतु यहां पर भी कोई कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर एक बार फिर अपनी आदत के अनुसार प्राधिकरण ने कमेटी का गठन कर दिया है, जो यह बतायेगी कि होटल सायाजी के संचालकों ने उल्लंघन किया है या नहीं? जबकि दूसरी ओर छोटे छोटे प्रकरणों में पाँच हजार से अधिक भूखंडों पर भूउपयोग का उल्लंघन किया गया है। इनमे से चंद ही जो कमजोर पड़ पाये वे ही केवल अपनी जमीन से हाथ धो बैठे।

इंदौर विकास प्राधिकरण ने होटल सायाजी में लीज शर्तों के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर फाइल खोली है जबकि सायाजी प्रबंधन इस मामले में उच्च न्यायालय में अपने आप को प्रकरण के चलते सुरक्षित किये हुए हैं। होटल सायाजी के संचालकों ने लीज शर्तों के कई उल्लंघन किये परंतु एक ताकतवर सेवानिवृत्त आईएस अधिकारी की इस होटल में बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण यहां पर कार्रवाई कभी भी संभव नहीं हो पाई। राजनैतिक बोर्ड भी यहां पर केवल मामले को झूलाता रहा और बाद में यह मामला अदालत की शरण में जाने के बाद पूरी तरह सभी ने मौन धारण कर लिया। अब एक बार फिर लीज शर्तों के उल्लंघन का यह मामला बाहर आने के बाद कई और लीज शर्तों के उल्लंघन के मामले भी प्राधिकरण के दरवाजे पहुंचने वाले हैं। जिन दो मैरिज गार्डन को बेचकर लीज शर्त का उल्लंघन किया था उसे होटल सायाजी ने वापस खरीद लिया है और कहा है कि उन्होंने अपनी गलती सुधार ली है। पर जानकारों का कहना है कि उल्लंघन तो हो ही चुका है। दूसरी ओर हर होटल के आंतरिक क्षेत्र में होटल संबंधी लाबी बनाकर उसमे एक रेडिमेड की, गिफ्ट आयटम की दुकानें बनाई जा सकती है। इसी का लाभ उठाने हुए होटल सायाजी के संचालकों ने यहां बाहर की ओर ३५ दुकानें निकालकर करोड़ों रुपए कमाये और इसमे टेलीफोन कंपनियों सहित कई बड़े दिग्गजों को बेच दिया। प्राधिकरण के ही सूत्र कह रहे हैं कि होटल सायाजी पर कोई कार्रवाई संभव नहीं है। इसका कारण यह है कि इसमे एक सेवानिवृत्त आईएएस की बड़ी हिस्सेदारी है। जब तय ही हो गया है कि उल्लंघन हुआ है तो फिर नये सिरे से कमेटी बनाने का क्या तुक? इसके पहले भी तो कमेटी ने ही तय किया था कि लीज शर्त का उल्लंघन हुआ है। इधर सूत्र बता रहे हैं कि इंदौर के जमीनों के सबसे बड़े कारोबारी पिंटू छाबड़ा जो इंदौर में ही दो हजार करोड़ों से ज्यादा की जमीनों के मालिक हैं और इसके अलावा शहर के लगभग सभी माल वे खरीद चुके है। इसके बाद अब वे होटल सायाजी में भी बड़ी हिस्सेदारी ले रहे हैं। उनका अनुभव यहां काम आयेगा कि नियमों के विपरित जाकर किसी काम को किस प्रकार से करवाया जाता है और उसमे क्या खर्च आता है? आने वाले समय में सायाजी का प्रकरण भी इसी तर्ज पर अब निपटने जा रहा है। सायाजी का मामला तो चावल की हंडी की बानगी है। शहर में पाँच हजार से अधिक मामले प्राधिकरण के लीज शर्तों के उल्लंघन के सामने आ चुके हैं। परंतु प्राधिकरण कुछ ही स्थानों पर बिन बजा रहा है।

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