इस बार सयाजी होटल पर कार्रवाई तय

प्रबंधन और व्ययन नियम 2018 में संशोधन से प्राधिकरण का दावा मजबूत

इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण ने अधिनियम में नए प्रावधान करते हुए 1 अक्टूबर 2018 या इसके बाद निरस्त हुई लीज संपत्तियों, भूखंड को ही पुनर्जिवित करने का निर्णय लिया है। प्राधिकरण के व्ययन नियम में संशोधन का फायदा अब सयाजी होटल प्रबंधन को नहीं मिलेगा, क्योंकि सायाजी की लीज 2018 से पहले ही प्राधिकरण निरस्त कर चुका है, इसलिए इस बार प्राधिकरण की कार्रवाई में सयाजी पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
प्रदेश की सभी प्राधिकरण के लिए शासन ने जो व्ययन नियम में संशोध किया है, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लीज धारकों को उसका लाभ मिल जाए। 1 अक्टूबर 2018 के बाद निरस्त हुए भूखंडों को जहां इसका लाभ मिल सकता है। वहीं सयाजी, चाय-किराना, लोहा मंडी से लेकर अन्य प्रकरणों में की गई लीज निरस्ती के आवेदकों को इसका लाभ नहीं मिलेगा क्योकि 2018 में प्राधिकरण द्वारा लागू किए गए प्रावधान से पहले इन प्रकरणों पर कार्रवाई शुरू हो गई थी, और इन भूखंडों की लीज 2018 से पहले ही प्राधिकरण निरस्त कर चुका है।
प्राधिकरण बोर्ड ने इस मसले पर एक बार फिर प्राधिकरण, प्रशासन, नगर निगम, मप्र ग्राम निवेश और पीडब्लूडी के अफसरों की एक कमेटी बनाकर नए सिरे से सयाजी लीज निरस्ती की फाइल खोली है। शहर में प्राधिकरण द्वारा मनी सेंटर और नगर निगम द्वरा नेहरू स्टेडियम की 50 से ज्यादा दुकानें संशोधित अधिनियम के तहत तोड़ी गई थी, इसलिए इस बार यह तय माना जा रहा है कि सयाजी प्रबंधन भी कार्रवाई से बच नहीं पाएगा। हालांकि इनमें प्रकरण कोर्ट में भी चल रहे हैं, लिहाजा प्राधिकरण को जब तक कोर्ट आदेश स्पष्ट नहीं होते, तब तक इन विवादित और चर्चित संपत्तियों को संबंध में निर्णय नहीं ले पाएगा, क्योंकि इनमें कई प्रकरण लोकायुक्त जैसी जांच एजेंसियों में भी विचाराधीन है।

35 दुकानें है विवाद का कारण
सयाजी प्रबंधन ने होटल निर्माण के कुछ दिनों बाद होटल के आगे प्लॉट पर दुकान का निर्माण कर अलग-अलग हिस्सों में इन्हें 35 व्यक्तियों को बेच दिया था, इस संबंध में प्राधिकरण को पहले भी शिकायत मिली थी। लीज डीड शर्तों का खुला उल्लंघन है। बेसमेंट में 10, ग्राउंड फ्लोर पर 11 दुकानें और पहली मंजिल पर हॉल सहित कई दुकानें हैं। कुल कंस्ट्रक्शन अनुमति के विपरीत 615 वर्गमीटर है तथा एमआर-10 की पार्किंग में भी शर्तों का उल्लंघन की बात सामने आई है। मप्र ग्राम निवेश के व्ययन नियम 1975 के सेक्शन 29 का भी उल्लंघन बताया जा रहा है। हालांकि इस विवाद के बीच सयाजी प्रबंधन ने बेची गई सभी दुकाने वापस खरीद कर सभी दुकानदारों को अपना किरायदार बात दिया है, लेकिन इस बार सयाजी की दुकानें टूटने स्व बचने के लिए यह सब प्रयास नाकाफी साबित होंगे। सयाजी लीज निरस्ती मामले में प्राधिकरण ने विशेषज्ञों की एक कमेटी बना दी है, जिस पर नए सिरे से जांच करने के बाद प्राधिकरण कोर्ट में अपना पक्ष रखेगा, यह तय माना जा रहा है, की 2018 में प्राधिकरण के संशोधित नए प्रावधान से सयाजी मामले में प्राधिकरण का पक्ष मजबूत होगा और सयाजी प्रबंधन पर कार्रवाई होगी।
ठ्ठ जयपाल चावड़ा,
अध्यक्ष, इंदौर विकास प्राधिकरण

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