उपलब्धियों और विफलताओं के बीच निकल गए 8 वर्ष

प्र धानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आठ साल के कार्यकाल में जहां कई उपलब्धियां उनके साथ खड़ी हैं तो वहीं कई क्षेत्रों में वे अपने आपको सफल सिद्ध करने में लगे हुए हैं, इसके बाद भी उपलब्धियां नहीं मिल पा रही है। तात्कालिन फैसलों से कई मौके पर सरकार खुद ही जवाबदेही की स्थिति में नहीं खड़ी हो पा रही है तो दूसरी ओर ऐसे कई फैसले जो वर्षों से लटके पड़े थे वे लागू होते गए। सरकार ने अपना निर्यात भी बढ़ाकर इस वर्ष 400 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया है तो वहीं आयात घाटा भी इसके साथ बढ़ना सरकार की उपलब्धियों में दाग लगा रहा है। कोरोना काल में विश्व की सबसे बड़ी आबादी को टीकों के लिए तैयार करना और लगवाना सबसे बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है। परंतु दूसरी ओर लॉकडाउन जैसे फैसलों ने बेरोजगारों की संख्या बढ़ा दी। हालात यह हो गए कि अब देश में 90 करोड़ लोग नौकरी योग्य हैं, परंतु इनमें से 45 करोड़ ने रोजगार तलाशना छोड़ दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में बेरोजगारी इस समय 8.7 प्रतिशत हो गई है। जहां दूसरी ओर मोदी सरकार का शिक्षा बजट तो बढ़ाया गया, परंतु देश में 9000 स्कूल कम हो गए। 10 में से 6 लड़कियां 10वीं से ज्यादा नहीं पढ़ पा रही हैं और 10 में से 5 पुरुष नौकरी की तलाश में पढ़ाई छोड़ रहे हैं, पर दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीटें बढ़ना भी एक उपलब्धि है। कोरोन काल में आनन-फानन में पारित किए गए तीन कृषि कानून को सरकार को किसानों की जिद के सामने वापस लेना पड़ा। मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दुगनी करने का वादा भी किया था, जो अभी भी यथावत है और सबसे महत्वपूर्ण 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री का नारा था बहुत हुई महंगाई की मार, अब की बार मोदी सरकार, लेकिन बेतहाशा महंगाई ने 70 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। गैस पर सब्सिडी लगभग समाप्त हो गई है। 8 साल में आटे की कीमत 48 प्रतिशत, चावल 31 प्रतिशत, दूध 40 प्रतिशत, नमक 35 प्रतिशत महंगा हो गया है, सबसे अच्छी बात यह है कि इतनी महंगाई को लेकर भी मोदी सरकार के खिलाफ कोई जन आंदोलन नहीं हुआ, यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। मनमोहन सिंह सरकार के दौरान जिस महंगाई को डायन माना जाता था, अब वह प्रेमिका हो गई है।

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