अगले माह बंद हो जाएगा टैंकरों से जल वितरण

इंदौर। शहर में भीषण गर्मी के चलते शहर के 50 से अधिक क्षेत्रों में जलसंकट से जूझ रहे हैं। इन क्षेत्रों में निगम ने नियमित रूप से टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति कराई। अब जून के पहले सप्ताह में टैंकरों से जल वितरण बंद कर दिया जाएगा। ज्ञात हो कि टैंकरों को अप्रैल माह में शुरू किया गया था। पानी वितरण के लिए निगम ने 135 से अधिक निजी टैंकर किराए पर लिए थे।
हर साल गर्मी में निचली व आबादी बहुल बस्तियों में जलसंकट गहरा जाता है। भूजल स्तर में गिरावट आने से बोरिंग सूख जाते हैं। गर्मी की तपिश से तालाबों का जल भी कम होने लगता है। जीवनदायिनी यशवंत सागर तालाब शीत और वर्षा ऋतु में 19 फीट का आंकड़ा पार कर लेता है, जो वर्तमान में 12 फीट पर सिमट कर रह गया है।
हर साल करोड़ों खर्च, फिर भी हालत भयावह
पानी संकट दूर करने हर साल निगम करोड़ों रुपए खर्च करता है। बोरिंगों का संधारण, नई पेयजल टंकी बनाना, नर्मदा लाइन से नल कनेक्शन जोड़ना, तालाबों का गहरीकरण, अन्य जलस्त्रोतों की सफाई का काम अप्रैल माह से शुरू कर दिया जाता है। लेकिन बेहतर कार्ययोजना के अभाव में हर साल पानी को लेकर हालत भयावह बने रहते हैं।
इस बार कागज पर काम
इस बार निगम का सारा फोकस भूजल संरक्षण के तहत रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर है। इससे जलसंकट लगातार बढ़ रहा है। जलसंकट दूर करने केवल टैंकरों के अलावा अन्य कार्य कागजों पर पूरे हो गए हैं, जिससे खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है।
प्री मानसून बता रहे कारण
निगम के सूत्रों की मानें तो मई माह के अंत तक प्री मानसून की आहट हो जाएगी। इसके चलते कुछ हद तक भूजल स्तर में बढ़ोतरी होगी। टैंकर बंद होने के बाद तालाबों के जलस्तर पर ध्यान दिया जाता है।
इनका कहना है…
वर्तमान में निगम और निजी टैंकरों से संकटग्रस्त क्षेत्र में जलापूर्ति की जा रही है। कहीं भी भयावह स्थिति नहीं है। मई माह के अंत में टैंकरों का संचालन बंद कर दिया जाता है। बारिश की आहट होने के चलते तालाबों के जलस्तर को लेकर काम करते हैं।
-संजीव श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, नर्मदा प्रोजेक्ट।

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