सुलेमानी चाय-नफरतों के दौर में मोहब्बत जिंदा रखने की कोशिश… सिलसिला यारी का…खान बहादुर के गुनाहगार को कड़ावघाट की भी जिम्मेदारी…मुस्लिम इलाकों से बीजेपी को उम्मीदवारों का टोटा…

नफरतों के दौर में मोहब्बत जिंदा रखने की कोशिश… सिलसिला यारी का…


आज के दौर में हर मजहब, हर तबके और हर उम्र के लोगों को एक जाजम पर बैठाना बहुत मुश्किल हो गया है, लेकिन फिर भी मोहब्बत को जिंदा रखने की कोशिश जारी है, सिलसिला यारी का, खजराना में बड़े खान के नाम से मशहूर हिदायतुल्ला खान बड़े बड़े कामों को अंजाम दे रहे। हाल ही में ईद की मिठास बांटने के लिए अपनी टीम के साथ शहर में बड़ी और कामयाब महफ़िल सजाई, जिसमें नामी हस्तियों के साथ ही आम लोगों की अच्छी तादाद रही। आधे खजराने ने पूरे शहर की मेजबानी की। आने वाले निगम चुनाव को लेकर जहा दावेदारों की भी अच्छी हाजरी रही। वहीं हिदायत ने भी दावेदारों के सामने अपना शक्ति प्रदर्शन कर डाला। खैर बुरे दौर में अच्छी कोशिशों की हौसला अफजाई होना चाहिये हम भी ऐसी कोशिशों को सलाम करते है।

खान बहादुर के गुनाहगार को कड़ावघाट की भी जिम्मेदारी…


वक्फ संपत्तियों को गरीब की जोरू समझने वाले जिम्मेदारों को बोर्ड की तरफ से सजा के बदले इनाम दिए जा रहे हैं। कुछ जिम्मेदार तो कांग्रेस और बीजेपी दोने ही सरकार में अपनी सदारत पर काबिज रहे, जिसमें इंदौर शहर की बड़ी वक्फ संपत्ति खान बहादुर के जिम्मेदार साबिर हाशमी ने सदर बनाए जाने के एवज में भाजपा कार्यालय के पीछे वक्फ संपत्ति का एक बड़ा टुकड़ा बीजेपी के नाम कर दिया था। कांग्रेस सरकार आने के बाद कांग्रेस को खुश करने के लिये एक हलफनामे ने बीजेपी को नियमों के खिलाफ जाकर जमीन देने की बात ख़ुद हाशमी ने कुबूल भी की थी। इसके बाद इन्हें तुकोगंज का भी प्रभार दिया गया। वहां भी इनका कार्यकाल संदिग्ध रहा। इस सब के बावजूद सजा के बदले इन्हें उम्र के इस पड़ाव पर कड़ावघाट की जिम्मेदारी दी गई, जिससे जाहिर होता है कि या तो वक्फ बोर्ड के जिम्मेदारों के पास ईमानदार नौजवानों की कमी है या हाशमी जैसे उम्रदराज़ लोग इन सम्पत्तियों से अच्छे से कमाना और आला जिम्मेदारों को अच्छे नजराने देना जानते है।

मुस्लिम इलाकों से बीजेपी को उम्मीदवारों का टोटा…


लगता है इस निगम चुनाव में भी शहर कांग्रेस अपनी इज्जत मुस्लिम क्षेत्रों से मिली चुनरी से ही बचाएगी। खजराना वार्ड 38, 39 से कोई दावेदार नहीं है। उस्मान यहां से बीजेपी से लड़ना चाहते है पर कार्यालय से फरमान जारी हो चुका है उस्मान को ले भी लेंगे तो टिकट नही देंगे। फहीम उल्लाह खान ने जन्मदिन के बहाने ताकत तो दिखाई है, लेकिन फिर भी लड़ना पक्का नही है, पूरे शहर से बीजेपी से लड़ने वालों में सिर्फ आज़ाद नगर से नए नवेले मोर्चा अध्यक्ष शेख़ असलम ही है जो पूरे दम खम से हाज़िर है और दम खम ठोकने वाला चाहिए भी, सामने शेख़ अलीम है, जो बहुत मजबूत है। वार्ड 60, वार्ड 8, वार्ड 73, में मेहफूज पठान, अमान मेनन, रेहान शेख़, इस्माइल खान महिला वार्ड होने से पीछे हट गए है, पर बीजेपी के मुस्लिम नेताओं ने नाम छुपाने की शर्त पर बताया है, कि बीजेपी का माहौल बहुत खराब है और मुस्लिम इलाकों से चुनाव लड़ना लोहे के चने चबाने जैसा है और इनके दूध के दांत पहले से ही टूट चुके हैं, अब टूटे तो समस्या हो जाएगी। इसी के साथ अनवर दस्तक, अनवर कादरी, अयाज़ बैग, मुबारिक मंसूरी के सामने भाजपा का कोई चेहरा ढूंढे नही मिल रहा।

दुमछल्ला
रमीज़ को आई तमीज…
लंबे समय से शहर युवा कांग्रेस अध्यक्ष रमीज़ खान सुस्त बैठे हुए थे, लेकिन पिछले दिनों हमारे कालम में रमीज़ की फटी कमीज़ हेडिंग के साथ उन्हें आईना दिखया गया जिससे उनमें थोड़ी फुर्ती आई और ईद मिलन कार्यक्रम के बहाने कल बायपास पर प्रदेश के बड़े नेताओं को इंदौर बुला लिया। रमीज़ के कार्यकाल का शायद यह सबसे बड़ा आयोजन है जो कि काफी हद तक सफल रहा। राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कुछ ना कुछ करना बहुत जरूरी है। हमें उम्मीद है कि रमीज़ आगे भी इसी तरह कुछ ना कुछ करते रहेंगे।
-9977862299

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