गरीबों के सैकड़ों प्लॉट अमीरों को बेच खाए

100 से अधिक टॉउनशिप में गरीबों के भूखंडों को लेकर हुआ बड़ा फर्जीवाड़ा

इंदौर। शहर के बाहरी क्षेत्र में खड़ी हो रही टॉउनशिप में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए छोड़े गए भूखंडों को जोड़कर बेचने का काम तेजी से चल रहा है। 100 से अधिक टाउनशिप में गरीबों के स्थान पर अमीरों के बंगलें बनते देखे जा सकते हैं। जिला प्रशासन ने भी इस प्रकार के निर्माणों को पूरी तरह अवैध बताते हुए पहले ही निर्देश जारी कर रखे हैं कि गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिए स्थान रिक्त रखना पड़ेगा। कई टाउनशिप के नक्शे भी इसीलिए निरस्त कर दिए गए हैं। इसके बाद भी शहर में 500 करोड़ से ज्यादा का कारोबार गरीबों के प्लाटों को बेचकर कर लिया गया है।
पूर्व में प्रशासन आश्रय निधि में राशि जमा कर जमीन मुक्त कर देता था, परंतु बाद में इसे निरस्त कर दिया गया। शहरी क्षेत्र में अभी भी आश्रय निधि में पैसे जमा करवाकर नगर निगम यह जमीन छोड़ रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में ईएमएस यानी गरीबी रेखा के लोगों के लिए खाली प्लाट छोड़ने के निर्देश हैं। यह प्लाट न लाभ न हानि की दर पर बेचे जाने थे, परंतु प्रशासन की रोक के बाद भी कई टाऊनशिप गाइड लाइन से ऊपर जाकर प्लाटों को जोड़कर रजिस्ट्री बिल्डरों को कर दी गई है और वे यहां पर 3 मंजिला भवन बनाकर अलग-अलग रजिस्ट्रीयां भी करवा रहे हैं। जिला प्रशासन ने आदेश के स्पष्ट न होने के कारण इन सभी क्षेत्रों के नक्शे रद्द कर दिए थे और नए सिरे से आवेदन मांगे गए थे। इसके बाद भी कई टाउनशिप में गरीबों के भूखंड अभी भी गाइड लाइन से ऊपर बेचे जा रहे हैं। 90 प्रतिशत प्लाट सक्षम लोगों को बेचे जा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले चार सालों में शहर में 300 से अधिक बड़ी टाउनशिप को स्वीकृति दी गई थी जिनमें गरीबी रेखा के लोगों के लिए भूखंड छोड़े जाने थे, परंतु अब नया नक्शा लगने के पहले ही भूखंड बाजार मेंं बिक चुके हैं। प्रशासन को यहां प्राधिकरण की तर्ज पर ही भूखंड बेचे जाने की अनुमति देनी चाहिए, जिसमें 15 वर्षों तक भूखंड किसी ओर को बेचा नहीं जा सकेगा। हर टाउनशिप में 15 प्रतिशत भूमि गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिए छोड़ना अनिवार्य होता है।

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