शहर में 10 फीट चौड़े, 5-6 मंजिला मकान सबसे ज्यादा खतरनाक

आग लगने पर भागने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता, निगम के पास ऐसे मकानों, बिल्डिंगों का कोई रिकॉर्ड नहीं

इंदौर (राजेश यादव)। पिछले सप्ताह दिल्ली में मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास चार मंजिला बिल्डिंग में आग लगने के बाद 27 लोग जल मरे थे। बिल्डिंग में एक ही रास्ता होने के कारण लोग भाग नहीं पाए। इंदौर शहर में भी इसी तरह की हजारों बिल्डिंगें और मकान खड़े हैं। खास बात यह है कि 10 फीट चौड़े, 20-30 फीट लंबे, 5-6 मंजिला मकान की निगम जांच भी नहीं करता है और कई बड़ी मल्टियों में भी आग बुझाने के संसाधन पर्याप्त नहीं है। अधिकांश मकानों में पीछे से कोई रास्ता नहीं है जिससे कोई आगजनी की घटना हो जाए तो लोग जान बचाकर भाग सके। निगम के पास ऐसे मकानों का रिकॉर्ड भी नहीं है। शहर में 60 से 70 फीसदी मकान, बिल्डिंगें अवैध है और सुरक्षा के लिहाज से भी सही नहीं बने है।
दिल्ली की घटना के पहले शहर में भी विजय नगर क्षेत्र की अवैध स्वर्णबाग कॉलोनी के एक मकान में गाड़ी में आग लगाने से आग लग गई थी और 7 लोग जल गए थे। नगर निगम ने इस घटना में जांच की बात कही लेकिन अब तक कोई जांच शुरू नहीं हुई। इधर शहर में 60 से 70 फीसदी मकान, बिल्डिंग, दुकान, शो-रूम अवैध रूप से बन गए है या इनमें आग बुझाने या जान बचाकर भागने के लिए कोई संसाधन, रास्ता नहीं है। शहर के कई इलाकों में इस तरह की व्यवसायिक बिल्डिंगे तनी खड़ी हैं। इसके अलावा रहवासी बिल्डिंगों की हालत भी ठीक नहीं है। 5 से 10 मंजिला बिल्डिंगों में कई किरायेदार रहते है और दफ्तर भी है। बिल्डिंगों में 5-7 फीट की गली होती है और जब भी कोई त्यौहार या ऐसा मौका आता है जब खरीदी अधिक होती है तो बाजारों में भीड़ बढ़ती है और पूरी बिल्डिंग में सैकड़ों लोग एक साथ एक समय में मौजूद होते है। निगम अधिकारी ऐसी बिल्डिंगों, मकानों में जांच भी नहीं करते है न ही गलत पाए जाने पर कोई ठोस कार्रवाई होती है।

इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा भयावह स्थिति
शहर में राजबाड़ा, मारोठिया, जेल रोड, आड़ा बाजार, मच्छी बाजार, बम्बई बाजार, छत्रीपुरा, सराफा, सीतलामाता बाजार, इतवरिया बाजार, सदर बाजार, एमजी रोड, जवाहर मार्ग, मल्हारगंज, सियागंज सहित कई ऐसे बाजार और रहवासी क्षेत्र है जहां आगजनी की घटना यदि हो जाए तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी अंदर नहीं घुस सकती। कई बाजारों, कॉलोनियों में सड़कों की चौड़ाई 5-7 फीट ही है।

6 लाख से अधिक मकान, इमारतें शहर में
नगर निगम के रिकॉर्ड में 6 लाख से अधिक संपत्तियां शहर में हैं। हालांकि निगम के सभी 19 झोन में अधिकारी इन 6 लाख मकान, बिल्डिंगों में पूरी तरह से कभी जांच नहीं कर पाए। जबकि निगम आधे से अधिक संपत्तियों से संपत्तिकर वसूलता है। अप्रैल, मई, जून में सबसे अधिक आगजनी की घटनाएं होती हैं। शहर के औद्योगिक क्षेत्रों में भी आग लगने पर समय पर आग बुझाने की कार्रवाई नहीं हो पाती है। कई बार उद्योगपतियों, व्यापारियों ने भी नगर निगम और प्रशासन को पत्र लिखा, मांग की, मगर कही भी राहत नहीं मिली।
नक्शे के अनुसार ही निर्माण होना चाहिए। यदि कही अवैध निर्माण होता है तो हम कार्रवाई करते है। आगजनी की घटना को लेकर कुछ नहीं कहूंगा।
विष्णु खरे मुख्य नगर निवेशकनगर निगम

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