निकाय चुनाव: कांग्रेस में तार-तार होता अनुशासन…

संतुष्टि के चलते अनुशासन समिति की 21 सदस्य व मोर्चा संगठन की बना दी, महिला कांग्रेस, एनएसयूआई और युवा कांग्रेस पूरी तरह निष्क्रिय

इंदौर। नगर निगम चुनाव का बिगुल किसी भी समय बज सकता। रणबेदी सजने के लिए तैयार है और भारतीय जनता पार्टी ने त्रिदेव बूथ प्रबंधन से इसकी तैयारी भी आरंभ कर दी है। डिजीटल प्रणाली को अपनाते हुए जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने से लेकर आम जनता से सीधे संवाद स्थापित करने को लेकर क्षेत्रीय विधायकों ने युद्ध स्तर पर कार्य आरंभ कर दिए हैं। वहीं कांग्रेस के मजबूत जनाधार वाले नेताओं को भाजपा में लाने के प्रयास भी तेज कर दिए हैं।
किसी भी समय घोषित होने वाले नगर निकाय चुनाव के साथ मिशन 2023 को लेकर भाजपा ने अपनी राजनीतिक गतिविधियों को विस्तार देने में लगी है। दूसरी तरफ इन सबसे बेखबर कांग्रेस अपने ही संगठन में समन्वय नहीं बिठा पा रही है।
कांग्रेस के सदस्यता अभियान से छिड़ी अंतर्कलह से पार्टी अभी भी पार नहीं पा सकी है। आएदिन सोशल मीडिया पर कांग्रेस कार्यकर्ता और पूर्व पदाधिकारी शहर से लेकर प्रदेश स्तर तक के नेताओं के खिलाफ लिख बोल रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता खुलेआम शीर्ष नेतृत्व पर शहर के संगठन में अनुभवहीन नेताओं को बागडोर दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस कार्यालय से जनाधार वाले नेताओं ने दूरी बना ली। संगठन और कार्यकताओं पर अनुशासन की लगाम लगाने के लिए हाल ही में 21 सदस्यों के साथ मोर्चा संगठनों को शामिल कर भारी भरकम अनुशासन समिति का गठन किया गया, जिसकी अभी तक एक भी बैठक कांग्रेस मुख्यालय में सम्पन्न नहीं हुई। आधे से अधिक सदस्यों को यह पता ही नहीं की उन्हें करना क्या है? इसके पहले समिति में अध्यक्ष सहित 3 सदस्यों को शामिल किया जाता था। नवगठित समिति का भी कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के युवा संगठनों और महिला कांग्रेस का हाल तो और बुरा है। कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन तो पूरी तरह निष्क्रिय पड़ी है।
ऐसे में संगठन के भीतरी विरोध को शांत करने में असफल कांग्रेस नगर निकाय चुनाव में असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को किस तरह शांत करेगी, यह उसकी नवगठित अनुशासन समिति के लिए बड़ी चुनौती है? बहरहाल, कांग्रेस से उम्मीद लगाए बैठी जनता के विश्वास पर उसके नेता कितने खरे उतरते हैं, यह आने वाले नगर निकाय चुनाव के परिणाम ही बताएंगे।

कार्यवाहक अध्यक्ष पर उपजा असंतोष
महिला कांग्रेस में शशि यादव को शहर अध्यक्ष के पद से हटाए जाने के बाद से महिला कांग्रेस की गतिविधियों में भी विराम लग गया है। वहीं युवा कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ उसके ही 17 निर्वाचित प्रतिनिधियों ने लगातार विरोध का मोर्चा खोल रखा था, जिसके चलते दो कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए गए हैं, अब उनकी लड़ाई मुख्य संगठन के भीतर पहुंच गई है। शहर अध्यक्ष की कार्यशैली के खिलाफ भी भोपाल मुख्यालय तक लगातार शिकायतों का दौर चल रहा है। इसके चलते मुख्य कांग्रेस में भी कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए जाने की मांग आएदिन सोशल मीडिया पर उठने लगी है, जिसकी कांग्रेसी चौपालों पर आएदिन चर्चा होती रहती है। असंतुष्टों को कैसे मनाएंगे।

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