शिकायत पर हटाए, सेटिंग से फिर आए

अधिकारियों ने मनमानी करते हुए नाकों की जिम्मेदारी फिर से बर्खास्त कर्मचारियों को सौंपी

शार्दुल राठौर
इंदौर। देवी अहिल्याबाई होलकर फल एवं सब्जी मंडी नाकों पर अवैध वसूली करने वाले कर्मचारियों को हटाने के बाद दोबारा नियुक्ति दे दी गई है। मंडी प्रशासन ने कृषि उपज मंडी भोपाल से निर्देश मिलने के बाद इन्हें हटाने की कार्रवाई के साथ मंडी गेट पर निगरानी रखने के लिए कैमरे भी लगवाए थे। विवादित कर्मचारी अपनी वापसी करने में तो कामयाब हो गए हैं। साथ में साठगांठ कर सीसीटीवी कैमरे की दिशा मंडी गेट से बदल कर दूसरी तरफ कर दी है।
मंडी प्रशासन की मिलीभगत से व्यवस्थाएं बिगड़ती जा रही है। हाल ही में मंडी प्रशासक और सचिव नरेश परमार चोइथराम मंडी की अव्यवस्था सुधार नहीं पाए तो एडीएम राजेश राठौर ने दौर किया था। इस दौरान उन्होंने मंडी सचिव पर नाराजगी व्यक्त कर तीन कर्मचारियों को नोटिस भी जारी किए थे। अब मंडी के नाकों पर अवैध वसूली को लेकर मंडी प्रशासन की मिलीभगत सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि करीब 35 कर्मचारियों को भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की शिकायत के चलते हटाया गया था, लेकिन इनमें से 13 कर्मचारी मंडी प्रशासन में सेटिंग के चलते वापस यहां आ गए हैं।
मंडी प्रशासन इस मामले में कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन जिनके खिलाफ जो कर्मचारी नाके पर अपनी ड्यूटी लगाने में कामयाब हो गए हंै, उनके नाम राजेश बुंदेला, अंतरसिंह सिसोदिया, विष्णु राठौर, संतोष यादव, राधेश्याम पाटीदार, राजू कुवाल, कृष्णा पटेल, संतोष खेरिया, मनोज त्रिवेदी, सत्येंद्र शर्मा, संजय पवार, कन्हैयालाल सैनी बताए जा रहे हैं। इन कर्मचारियों द्वारा अवैध वसूली को लेकर पहले कई बार विवाद की शिकायत मिलने के बाद मंडी प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की थी। तब उपज मंडी भोपाल से इन्हें हटाने के निर्देश दिए गए थे। दबाव में आकर मंडी प्रशासन ने सभी विवादित कर्मचारियों को इधर-उधर कर दिया था, लेकिन मामला ठंडा पड़ने के बाद 12 से 13 कर्मचारी यहां पर आ गए हैं। धीरे-धीरे अन्य कर्मचारियों की भी वापसी की जा रही है। खास बात तो यह है कि मंडी प्रशासन ने इन कर्मचारियों की ड्यूटी भी मंडी गेट पर लगा दी है, जहां पर अवैध वसूली को लेकर पिछले दिनों विवाद की स्थिति के बाद उन्हें हटाया था।
अवैध वसूली पर निगरानी के लिए कैमरे लगाए, दिशा बदल दी – मंडी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन कुछ दिनों बाद मंडी प्रशासन की मिलीभगत से कैमरे की दिशा नाकों और गेट से बदलकर मंडी परिसर की ओर कर दी गई है, ताकि वसूली की रिकॉर्डिंग नहीं हो सके। यह सब मंडी प्रशासन की साठगांठ के बिना संभव नहीं है और मंडी प्रशासन इस पर मौन है।
अफसरों तक पहुंचता है हिस्सा – चोइथराम सब्जी मंडी में खरीदी-बिक्री करने वाले को नियमानुसार डेढ़ प्रतिशत मंडी टैक्स चुकाना पड़ता है। इसकी बाकायदा गुलाबी रंग की रसीद दी जाती है। मेन गेट (चेकिंग नाका) पर रसीद दिखाने पर बाहर गाड़ियां बाहर निकाली जा सकती है। इसके अलावा कोई शुल्क नहीं लिया जाता है, लेकिन मंडी के सभी कर्मचारी टैक्स के अलावा गेट नंबर 1 और 2 पर आने जाने वाले वाहनों से पैसा लिए बिना गुजरने नहीं देते हैं। शिकायतें यह भी आई है कि टैक्स की रसीद दिखाने के बाद भी कर्मचारी व्यापारियों से पैसा ले रहे हंै। गाड़ी में ओवलोड माल की धमकी देकर वसूली की जाती है। यहां आने वाले किसान रोज की कीच-कीच से बचने के लिए पैसे देकर निकलने में ही अपनी भलाई समझते हैं। सूत्रों ने बताया कि हर दिन सब्जी, फल अफसरों के मंडी समिति में अपनी दखल रखते हं और नाकों से वसूली का एक हिस्सा अफसरों तक पहुचने के बदले मंडी गेट पर ड्यूटी लगवा लेते हैं।

हर माह 8 से 9 लाख का नुकसान
कर्मचारियों की रिश्वतखोरी के कारण राज्य शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है। मंडी के व्यापारियों के मुताबिक मिलीभगत करके कर्मचारी निर्धारित से कम रकम की रसीद बना देते हैं। ऊपर का पैसा अपनी जेब में रख लेते हैं। व्यापारियों के मुताबिक रोज करीब 300 से ज्यादा वाहनों की आवाजाही होती है, जिससे कि रोज 20 हजार रुपए की कुल वसूली की जाती है। कर्मचारियों की मनमानी इस तरह खुलेआम जारी है कि के बार टैक्स के नाम पर पैसा ले लेते हैं, लेकिन रसीद नहीं देते हैं। लाखों रुपए का व्यापार रोजाना मंडी में होता है। एक अनुमान के मुताबिक कर्मचारियों की मनमानी की वजह से करीब 30 हजार रुपए का रोज राजस्व का नुकसान सरकार को उठाना पड़ रहा है। एक महीने यह राशि 8 से 9 लाख रुपए की गई है।

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