देश का कर्ज जीडीपी का 130 प्रतिशत पहुंचा

कई राज्यों पर कर्ज की सीमा से डेढ़ गुना भार बढ़ा, आने वाले महीनों में जीएसटी में बड़े फेरबदल होंगे

नई दिल्ली (दोपहर आर्थिक डेस्क)। क्या भारत, श्रीलंका जैसे हालात की ओर तेजी से बढ़ रहा है। महंगाई नियंत्रण के बाहर हो चुकी है? सरकार चाहकर भी टैक्स कम करने के हालात में नहीं है। सरकार पर जीडीपी का 99 प्रतिशत कर्ज हो चुका है, जो अब तक का सर्वोच्च कर्ज हो गया है। किसी भी देश के लिए कर्ज की सीमा जीडीपी के अधिकतम 54 प्रतिशत रहती है। दूसरी ओर राज्यों की हालत और ज्यादा दयनीय हो गई है। राज्यों पर जीडीपी का 71 प्रतिशत रिकार्ड ऊंचाई पर कर्ज पहुंच गया है। आने वाले समय में केंद्र सरकार जहां राज्यों को मिलने वाले जीएसटी के क्षतिपूर्ति को अगले माह से समाप्त कर रही है और इस क्षतिपूर्ति के लिए लगाए गए सेस को आगे भी जारी रखने जा रही है। इससे अब भविष्य में जहां महंगाई और चरम पर होती जाएगी तो दूसरी ओर राज्य भी अपने यहां अगले माह से कई टैक्स में अच्छी-खासी वृद्धि कर देंगे। पांच राज्य में कर्ज की सीमा जीएसडीपी के 38 से 53 प्रतिशत तक पहुंच गई है, यानी इसे देखा जाए तो भारत पर अब कुल कर्ज जीडीपी के 128 प्रतिशत तक पहुंच गया है, यानी 100 रुपए आय होने पर 128 रुपए का कर्ज चुकाना होगा। केंद्र सरकार भी अपना खर्च चलाने के लिए इस साल 11 लाख करोड़ के नए कर्ज बांड बाजार से उठाना शुरू कर चुकी है, जो अब तक की सबसे महंगी ब्याज दर पर उठाना पड़ रहा है।
रुपए की कीमत में ऐतिहासिक गिरावट के बाद तेजी से खाली हो रहे विदेशी मुद्रा भंडार में अब डॉलर का आना कम होता जा रहा है, जो सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। देश के पास ग्यारह माह का विदेशी मुद्रा भंडार बचा है, जिससे कच्चा तेल और कोयला तो आयात करना ही है, सरकार अब आने वाले समय में कई सामानों के आयात पर कटौती कर सकती है, वहीं दूसरी ओर जून से जीएसटी की क्षतिपूर्ति राज्यों को बंद किए जाने के बाद वित्त आयोग ने इसे बांटने का नया फार्मूला तैयार कर दिया है। पुराना फार्मूला अब समाप्त हो गया है। इसमें उन राज्यों को ज्यादा प्राथमिकता होगी, जिन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, बिजली, खेती के क्षेत्र में अच्छा काम किया है। वित्त आयोग ने ग्रांट देने के लिए भी कई शर्तें लगा दी हैं। इससे भी राज्य आर्थिक मोर्चों पर मार खाएंगे। इससे इंडिया रेटिंग की नई रिपोर्ट के अनुसार आंध्र, असम, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और उत्तरप्रदेश के हिस्से में 24 प्रतिशत से लेकर 118 प्रतिशत तक की कटौती हो जाएगी, जबकि महाराष्ट्र और गुजरात को आंशिक लाभ होगा। जीएसटी कटौती की ताजा मार राज्यों की अर्थव्यवस्था को आने वाले छह महीने में हिलाकर रख देगी। केेंद्र और राज्य जीएसटी को लेकर एक गाड़ी के दो पहिये थे, अब एक पहिया पूरी तरह हट जाएगा। राज्य क्षतिपूर्ति नहीं मिलने से अपने कई खर्चों में तेजी से कटौती करेंगे।

पेट्रोल-डीजल पर सौ प्रतिशत राजस्व बढ़ा
केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर लगाए गए टैक्स से सरकार जहां अपना खजाना लगातार भर रही है, वहीं राज्य भी 66 प्रतिशत बढ़त के साथ खजाना भर रहे हैं और दोनों ही अब भविष्य में भी किसी भी प्रकार की राहत देने को तैयार नहीं हैं, यानी अब सभी महंगाई कीमतों में शामिल हो गई है, जो पीछे नहीं हट पाएगी।

सेस से कोई पैसा राज्यों को नहीं
केंद्र सरकार ने 2012 में सेस से लगे टैक्स 0.4 प्रतिशत से अपना कामकाज प्रारंभ किया था। 2014 के बाद केंद्र ने सेस पर टैक्स बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया, यानी 100 रुपए पर पहले सेस से 40 पैसे टैक्स के रूप में आते थे, वह अब बढ़कर बीस रुपए हो गए हैं। अब जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिए लगाए गए सेस को क्षतिपूर्ति समाप्त होने के बाद भी केंद्र आम लोगों पर इस बोझ को अपना खर्च चलाने के लिए बनाए रखेगा।

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