बैंकों ने बिना सूचना कर दिए कर्ज महंगे

एसबीआई के सभी कर्ज पर ईएमआई बढ़ गई

नई दिल्ली (ब्यूरो)। जहां रिजर्व बैंक ने अभी अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कोई वृद्धि नहीं की है वहीं देश की बड़ी बैंकों ने अपने यहां कर्ज के लिए ब्याज दरों में 10 बैसेस पाइंट की वृद्धि कर दी है। इससे कार और होम लोन महंगे हो गए हैं। इसका असर अब आने वाले समय में मासिक किस्तों पर भी दिखाई देने लगेगा। इस पूरी प्रक्रिया के कारण बैंक और आरबीआई में खींचतान शुरू हो गई है। रिजर्व बैंक अब समय से पहले ही रेपो रेट में अच्छी खासी बढ़त करने जा रही है। आने वाले समय में अब सस्ते कर्ज का समय समाप्त हो रहा है।
रिजर्व बैंक जून में होने वाली मौद्रिक नीति की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की तैयारी कर रहा था। अप्रैल में हुई बैठक में ब्याज दरें इस लिए नहीं बढ़ाई गई थी कि केन्द्र सरकार को बाजार से बड़ा कर्ज उठाना था, जो वह पुरानी ब्याज दरों पर ही उठाने के लिए रिजर्व बैंक पर दबाव बना रहा था। तमाम कौशिश के बाद भी केन्द्र सरकार को बांड बाजार से पूरा कर्ज नहीं मिल पाया। सरकार के 1553 करोड़ के बांड बाजार में नहीं उठ पाए। दूसरी ओर बैंकों ने बिना किसी सूचना के अपनी (एमसीएलआर) ब्याज दरों में 10 बैसेस पाइंट की बढ़ोतरी कर दी। उधर बैंक ऑफ बड़ोदा ने भी एसबीआई की तर्ज पर ही ब्याज दरों में वृद्धि कर दी है। इससे अब रिजर्व बैंक को भी समय से पहले ही रेपो रेट में वृद्धि करना होगी, जो .25 प्रतिशत से ज्यादा होगी। इसी माह से लगभग सभी लोन बैंकों से महंगे हो जाएंगे।

गरीबों के लिए ब्याज दर दहाई में हो जाएगी
बैंकों के ब्याज दरों का असर हर प्रकार के लोन की ईएमआई पर दिखाई देने लगेगा। इसी के साथ ही सबसे ज्यादा असर उन कमजोर वर्गों के लोगों पर पड़ेगा जो लोन लेने के लिए सक्षम नहीं होते हैं, जिनके पास गिरवी रखने के लिए संपत्ति नहीं होती और क्रेडिट फाइल भी कमजोर रहती है। अब इन्हें लम्बे समय बाद दहाई अंक के आंकड़े में ब्याज देना होगा। इससे वे छोटे कर्ज को भी चुकाने में सक्षम नहीं रह जाएंगे।

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