मालवा के पठार पर पहली बार लहलहा रही जाफरान की फसल

जामली की बंजर पहाड़ी पर खिल रहे केसर के फूल

इंदौर। आप माने या ना माने किंतु हकीकत यही है कि कभी कश्मिर की घाटियों और वादियों में होने वाली जाफरान की फसल इन दिनों मालवा के पठार पर भी लहलहा रही है। नजारा देखना हो तो महानगर के समीप स्थित जामली की बंजर पहाड़ी पर जाया जा सकता है जहां इन दिनों केसर के फूल ना केवल खिल रहे हैं बल्कि अपनी महक भी बिखेर रहे हैं।
देखा जाए तो हिन्दुस्तान में जाफरान की फसल जम्मू कश्मीर की वादियों में ही पैदा होती है। इसके अलावा इस फसल को उगाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार प्रयास किये जाते रहे हैं और यह अभी भी जारी है। बावजूद इसके मालवा के पठार में मानो इन दिनों चमत्कार ही हो गया है। महानगर से महज ३५ किमी दूर ग्राम जामली के केशर पर्वत पर सुप्रसिद्ध शिक्षा एवं पर्यावरणविद प्रोफेसर एसएल गर्ग ने यह चमत्कार कर दिखाया है। बताया जाता है कि यहां पर उनके अथक प्रयासों के चलते जाफरान की फसल लहलहा रही है। इतना ही नहीं दो माह पहले पहला फूल भी खिला और अब तक लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक फूल खिल चुके हैं।
केसर काफूल ही कहलाता है जाफरान
यहां यह प्रासंगिक है कि जाफरान की फसल में जो फूल खिलता है उसकी बालियों से भी केसर बनती है। इसलिए जाफरान के फूल को ही केसर का फूल कहा जाता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में केसर बेशकिमती उत्पाद के रुप में जानी जाती है। अभी तक हिन्दूस्तान में यह सिर्फ जम्मू कश्मीर में ही पैदा होती थी अब जबकि मालवा के पठार में भी जाफरान की फसल लहलहा रही है तो इससे देशभर के कृषि विशेषज्ञों में नई आशा का संचार हुआ है।

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