5 लाख 66 हजार बिजली उपभोक्ताओं पर बड़ी मार की तैयारी

हर परिवार पर 250 रुपए महीने का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा

इंदौर। राज्य की तीन बिजली कम्पनियों ने कमरतोड़ महंगाई के बीच आम उपभोक्ताओं पर नया बोझ डालने की तैयारी की है। प्रदेश की सात करोड़ से ज्यादा आबादी को एक बार फिर बिजली के बिल की बढ़ी हुई दरों का झटका लगने वाला है। इससे शहर के 5 लाख 66 हजार बिजली उपभोक्ताओं को महंगी बिजली की मार पड़ेगी। इससे उपभोक्ताओं को 250 रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। एक साल में यह तीसरा मौका ही जब प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों ने बिजली का दाम बढ़ाने की तैयारी की है। पिछले 10 वर्षों का रिकार्ड देखें तो चुनावी मौसम छोड़कर शायद ही ऐसा मौका आया होगा जब बिजली कंपनियों ने विद्युत दर बढ़ने का प्रस्ताव रखा हो और सुनवाई के बाद विद्युत दर नहीं बढ़ाई हो। हर साल कंपनी टैरिफ तो बढ़ा ही रही है, बल्कि फ्यूल कास्ट के नाम पर भी तीन बार कीमतें बढ़ा चुकी है।
विद्युत वितरण कंपनी ने एक यूनिट बिजली के दाम में 58 पैसे तक की बढ़ोतरी हो सकती है। पंचायत चुनाव को देखते हुए सरकार ने बिजली दर बढ़ाने को लेकर चुप्पी साध रखी थी। चुनाव निरस्त होने के बाद प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने याचिका को सार्वजनिक कर दिया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए कम्पनी ने याचिका में सबसे ज्यादा कृषि में 10.61 प्रतिशत बिजली के दाम बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इसके बाद घरेलू बिजली 9.91 प्रतिशत, वाणिज्यिक बिजली 4.44 प्रतिशत और निम्न दाब उद्योग के लिए 5.11 प्रतिशत बिजली के दाम बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। आयोग याचिका पर आठ और 10 फरवरी को जनसुनवाई करेगा। विद्युत नियामक आयोग ने आमजन से 21 जनवरी तक अपत्ति मांगी है। विद्युत दरों के जानकार इंजीनियर राजेन्द्र अग्रवाल के मुताबिक, मध्यप्रदेश में पड़ोसी राज्यों की तुलना में सबसे महंगी बिजली दी जा रही है। राज्य सरकार 100 यूनिट तक सब्सिडी देकर उपभोक्ताओं को राहत जरूर दे रही है, उसके ऊपर बिजली के दाम बहुत ज्यादा हैं। कंपनी अधिकारियों की मनमानी पर नकेल कसने में विफल रही है। विद्युत दरों में बढ़ोत्तरी आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योगों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगी। कंपनियों को दर बढ़ाने की बजाय अपनी कार्यदक्षता बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
दाम बढ़ाना जनता के साथ धोखा
एक्सपर्ट का मानना है की अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा महंगी बिजली दी जा रही है, जबकि, यहां खपत से ज्यादा बिजली के उत्पादन का दावा किया जा रहा है। यहां कोयला और पानी प्रचुर मात्रा में होने के बावजूद बिजली के दाम बढ़ाना आम जनता से धोखा है। विद्युत वितरण कंपनियों ने दाम बढ़ाने के बजाय खर्च करने पर कभी काम नहीं किया न ही सरकार ने विद्युत कंपनियों को इस तरह ही सुझाव दिए। नियामक आयोग भी सिर्फ विद्युत दर बढ़ाने के प्रस्ताव पर सुनवाई की नौटंकी कर दरें बढ़ाने के प्रस्ताव को हरीझंडी दे देता है। बिजली कंपनी ने 8.07 प्रतिशत की बिजली दरों में वृद्धि चाही है। हालांकि यह 57 पैसे प्रति यूनिट नहीं होती है। माना जा रहा है कि कर्ज से डूब रही सरकार के लिए अब राजस्व बढ़ाने के और कोई तरीके नहीं बचे हैं। इसी के साथ रजिस्ट्री और टोल सहित कई और क्षेत्रों में भी आने वाले तीन माह में अच्छी-खासी वृद्धि देखी जाएगी।

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