9 लाख करोड़ से ज्यादा बैंकों ने बाजार से उठाए
कर्ज देने वाले खुद ही कर्ज में डूबे

मुंबई (ब्यूरो)। देशभर के बैंकों में लगातार कर्ज की बढ़ रही मांग को पूरा करने के लिए अब बैंक खुद ही तेजी से कर्जदार बनते जा रहे हैं। अन्य माध्यमों से बैंक लगातार कर्ज ले रहे हैं।
ताजा आंकड़ों के अनुसार 26 जुलाई तक बैंकों द्वारा छोटी अवधि के जरिये कर्ज उठाने को लेकर जो जानकारी रिजर्व बैंक द्वारा दी गई है उसके अनुसार बैंक 9.32 लाख करोड़ रुपए बाजार से उठा चुके हैं। बैंकों में लगातार जमा हो रही राशि तेजी से घटने के बाद बैंकों के सामने कर्ज बांटने का संकट बढ़ता जा रहा है और इसी कारण बैंक अपने यहां जमा को लाने के लिए एफडी पर लगातार ब्याज बढ़ा रहे हैं। इसी के साथ शार्ट टर्म लोन भी बैंकों में उठाए जा रहे हैं। Banks raised more than Rs 9 lakh crore from the market
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बैंकों में इन दिनों कर्ज लेने वालों की तेजी से संख्या बढ़ रही है। इसमें कई छोटी औद्योगिक इकाइयां भी कर्ज की कतार में खड़ी हो रही हैं। ऐसे में जब बैंकों में छोटी बचतें अपने 47 साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं वहीं एफडी भी नहीं बढ़ रही है। ऐसे में बैंक लगातार रेपो रेट में वृद्धि नहीं होने के बाद भी एमसीएलआर यानी एफडी पर ज्यादा ब्याज देकर पैसा समेटने का प्रयास कर रही हैं।
अब जहां बैंकों में जमा 11 प्रतिशत हो गया है तो कर्ज 14 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रहे हैं। ऐसे में अब बैंक अपने एजेंट के अलावा बांड के जरिये भी लगातार कर्ज उठाए जा रहे हैं। वहीं सीडीआर के जरिये भी पैसा बैंक लगातार ले रही है। उल्लेखनीय है कि अल्प अवधि के लिए बैंक आपस में ही कर्ज लगातार लेती जा रही है। ऐसे में बैंकों ने बाजार से कर्ज देने के लिए 9.32 लाख करोड़ रुपए का कर्ज उठा लिया है। बैंक दूसरे माध्यमों से भी पैसा तेजी से बटोर रही हैं।
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