शहर में चांदीपुरा वायरस का खतरा , सैंपल पुणे भेजे

chandipura virus in indore
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इंदौर। शहर में बढ़ते डेंगू मरीजों के बीच कल से नगर निगम ने भी एक निजी कंपनी के सहयोग से शहर में ड्रोन के माध्यम से एंटी लार्वा गतिविधियां शुरू कर दी हैं। इसके पूर्व इस प्रकार का अभियान मलेरिया विभाग (स्वास्थ्य) ने शुरू किया था और शहर में 1150 साइट्स पर एंटी लार्वा गतिविधियां की गई थीं। अब नगर निगम द्वारा अभिषेक एंटरप्राइजेस के साथ मिलकर इसकी शुरुआत की गई है। निगम द्वारा दवा का छिड़काव भी किया जा रहा है। इधर चांदीपुरा वायरस के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। खरगोन के एक मरीज में यह वायरस निकल सकता है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट का इंतजार है।

नगर निगम की मलेरिया टीम द्वारा रविवार को कृष्णपुरा छत्री के पास स्थित संजय सेतू, कान्ह नदी और आस-पास के घरों में दवा से एंटी लार्वा गतिविधियां की गई। निजी एजेंसी के पदाधिकारी ने बताया कि हमने नगर निगम के साथ एक अनुबंध किया है। इसके तहत शहर में होने के माध्यम से उन स्थानों का जानकारी निकालेंगे, जहां पर मच्छरों के लार्वा पनप सकते हैं। इसमें ऊंची इमारत, जहां पर मलेरिया विभाग की टीम नहीं जा सकती। उन इमारतों में ड्रोने में लगे कैमरों के माध्यम से देखेंगे कि कहीं छत पर रखी टंकी खुली तो नहीं। पानी जमा तो नहीं हो रहा, जिसमें लार्वा पनप सकते हैं। ऐसे स्थानों को चिह्नित कर ड्रोन के माध्यम से ही एंटी लार्वा स्प्रे दवा छिड़कते हैं, एक बार लार्वा पैदा होने के बाद उन्हें खत्म करना मुश्किल होता है। इसलिए हमारी कोशिश है कि ऐसे सभी स्थानों को चिह्नित कर मच्छरों के प्रजनन को रोका जाए और डेंगू, मलेरिया आदि बीमारी फैलाने वाले मच्छरों से रोका जाए।

चांदीपुरा वायरस क्या है

चांदीपुरा वायरस नाम सुनने में नया लग सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसका पहला केस 1965 में महाराष्ट्र के एक गांव चांदीपुरा में सामने आया था। इसीलिए इसका नाम चांदीपुरा पड़ गया। इस बार मप्र सहित गुजरात और राजस्थान में तेजी से इसके केस बढ़ रहे हैं। इसलिए यह फिर से चर्चा में आ गया है। इस वायरस का संबंध बैकुलोवायरस से है। इसका मतलब है कि यह मच्छर, टिक और सैंड फ्लाई (रेत मक्खी) जैसे वेक्टर के काटने से फैलता है। चांदीपुरा वायरस के लिए कोई विशेष एंटी वायरल उपचार उपलब्ध नहीं है। चूंकि यह घातक बीमारी है और इसके लक्षण तेजी से बिगड़ सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि जांच में इसका समय पर पता लगाया जा सके और इलाज के समय ठीक से देखभाल हो।

चांदीपुरा वायरस के क्या लक्षण हैं

इसके संक्रमण से एन्सेफलाइटिस होने का खतरा होता है। इसका अर्थ है कि वायरस के संक्रमण से मस्तिष्क के टिश्यूज में सूजन या जलन होने लगती है। आमतौर पर तेज बुखार इसका शुरुआती लक्षण होता है। इसके सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए। द लेंसेट में साल 2003 में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, चांदीपुरा वायरस का सबसे खतरनाक पहलू इसका डेथ रेट है। जब साल 2003-2004 में यह मध्य भारत में तेजी से फैला था तो फैटेलिटी रेट (मृत्यु दर) 56-75 प्रतिशत तक थी। इसका मतलब हुआ कि चांदीपुरा वायरस से संक्रमित आधे से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। इसमें छोटे बच्चों की संख्या अधिक होती है क्योंकि उनका दिमाग तीव्र सूजन सहन कर पाने में सक्षम नहीं होता है। चांदीपुरा वायरस इसलिए अधिक खतरनाक है कि इसके लक्षण एकदम अचानक आते हैं और तेजी से बिगड़ते चले जाते हैं। अगर समय पर सही इलाज और देखभाल न मिले तो घातक हो जाते हैं।

<जानवरों से बचाय: चांदीपुरा वायस्स जंगली और घरेलू जानवरों में भी फैल सकता है। उनके रहने के स्थान के आसपास रह रहे कीड़े और मच्छर संक्रमण के वाहक बन सकते हैं। इसलिए जब भी जानवरों के आसपास जाएं तो पूरे बाजू के कपड़े पहनकर जाएं। व्यक्तिगत सुरक्षा जरुरी: संभावित रुप से संक्रमित जानवरों को संभालते समय दस्ताने और मास्क जैसी जरुरी सुरक्षात्मक चीजें पहनकर स्खें। इससे संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है। chandipura virus in indore

< वेक्टर नियंत्रण जरुरी: इस वायरस को फैलाने में कीड़े और मच्छरों की संभावित भूमिका अधिक है। इसलिए जोखिम कम करने के लिए कीड़े भगाने वाली दवा और मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए। इम्यूनिटी मजबूत रखें: फल और सब्जियों से भरपूर भोजन करें। कोशिश करें कि इसमें विटामिन से भरपूर फल और सब्जियां अधिक हों। रोजाना एक्सरसाइज करो रोज 7 से 8 गिलास पानी पिएं। इससे इम्यूनिटी मजबूत रहेगी तो इन्फेक्शन के खतरे कम हो जाएंगे।

चांदीपुरा वायरस के इन्फेक्शन से बचाव के क्या उपाय हैं

<हाइजीन बनाए रखें: नियमित रुप से साबुन और पानी से हाथ थोते रहें। अगर संभावित रुप से संक्रमित वातावरण या जानवरों के संपर्क में आए हैं तो सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें।

रिपोर्ट का इंतजार, चांदीपुरा वायरस का खतरा

खरगोन के 22 साल के एक युवक में चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण मिले हैं। उसे शनिवार को इंदौर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती किया है। उसकी हालत गंभीर बताई गई है। सैंपल पुणे लैब भेजा गया है। खरगौन सीएमएचओ डॉ. एमएस सिसोदिया और सीएमएवओ डॉ. बीएस सेतिया ने बताया कि मरीज चांदीपुरा वायरस सस्पेक्टेड है। अगले सामाह रिपोर्ट मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है किसरावद क्षेत्र के पीपलगीन में रहने वाले 22 वर्षीय को शनिवार को उसे इंदौर में भर्ती किया गया था। नागरिकों को बारिश में सतर्क,सावधान रहने के लिए निर्देशित किया जा रहा है।

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