master plan का बेस भी अभी तक नहीं बना पर 79 गांव की जमीनों में दिग्गजों के नक्शे पास हो गये

माफियाओं ने माना दस रुपये फीट की रिश्वत पर भोपाल से निकाली जा रही है 79 गांव की डायरियों पर बेची जमीनें

The base of master plan has not been made yet but the maps of veterans have been passed in the lands of 79 villages.
The base of master plan has not been made yet but the maps of veterans have been passed in the lands of 79 villages.

इंदौर।
एक ओर जहां शहर के सुव्यवस्थित विकास को लेकर मास्टर प्लान का इंतजार किया जा रहा है वहीं इस बार मास्टर प्लान की बजाए अधिकारियों और राजनेताओं का ध्यान मास्टर प्लान को लाने के बजाए क्या लाभ लिए जा सकते हैं इस पर पूरी ताकत लगी हुई है। मास्टर प्लान के समय पर लागू नहीं होने की कीमत शहर को पहले भी चुकाना पड़ी है। पश्चिम क्षेत्र के रिंगरोड़ और बायपास का मामला आज भी अधर में पड़ा हुआ है। दूसरी ओर शहर के बाहरी सीमा से लगे ७९ गांव को नये मास्टर प्लान में शामिल करने की कवायद के बीच इन गांवों में सभी प्रकार के निर्माण की अनुमतियाां रोक दी गई है। master plan

इसके चलते यहां पर काटी गई कॉलोनियों में अब विवाद की स्थिति तो बन ही नहीं है वहीं मास्टर प्लान के पहले ही धारा १६ के तहत अधिकारियों ने शहर के कई बड़े दिग्गजों की जमीनों को आवासीय योजना में डालकर उन्हें प्लाट बेचने की अनुमति दे रखी है। इस मामले में बड़े पैमाने पर लेनदेन की शिकायत मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने खुद धारा १६ में दी जा रही छूट को बंद करते हुए इस पर रोक लगा दी है।

परंतु उनके इस आदेश के पहले ही शहर के जमीन के जादूगरों ने अपनी जमीनें धारा १६ में बाहर करवा ली है। अभी भी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि जिस मास्टर प्लान से शहर को अगले पचास सालों के लिए तैयार किया जाना है। उसका अभी तक केवल बेसमेप ही तैयार हो पाया है। ऐसे में मास्टर प्लान के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा। पर शहर के जमीन के जादूगरों ने जहां डायरियों पर पहले से ही कॉलोनियां काटकर करोड़ों रुपये एकत्र कर लिए हैं। इस मामले में खुद कॉलोनाइजर ही बता रहे हैं कि दस रुपये फीट की रिश्वत तय होने के बाद जमीनें छोड़ी गई है। अभी भी एक करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि भोपाल में बिल्डरों की उलझी हुई है। master plan

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सूत्रों के अनुसार जहां मास्टर प्लान की जमीनी तैयारियों को लेकर अभी तक कोई आधार दिखाई नहीं दे रहा है परंतु मास्टर प्लान को लेट करने के बाद शहर के कई बिल्डरों को जमीनें मुक्त करने के लिए गली बनाकर दी गई है। धारा १६ के तहत शहर के छह बड़े जमीन कॉरोबारियों की जमीनें ७९ गांव में अलग अलग हिस्सों में आवासीय अनुमति में बाहर आ चुकी है। इसमे बड़ी मात्रा में जमीनों को आवासीय में एनओसी दिये जाने के बदले में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के माध्यम से रिश्वत का बड़ा खेल हुआ है।

इसमे जमीनें मुक्त कराने को लेकर उगाए गये चंदे के एक करोड़ रुपये भोपाल तो पहुंचे पर कई दिग्गजों की जमीनें धारा १६ में बाहर आती उसके पहले ही खींचतान के चलते सभी पर रोक लग गई। इधर इसके पहले ही नीतिन अग्रवाल, सुमित मंत्री, जैन दिवाकर, भरत शाह, भूपेश व्यास, पीडी अग्रवाल लगभग ७० एकड़ के नक्शे मुक्त करा लाये। उज्जैन रोड़ पर बडऩगर वाला रुची सोया के मनीष सहारा ने भी अपनी जमीनें धारा १६ में मुक्त करा ली।

इनमे कुछ जमीनें अभी भी विवादों में बताई जा रही है। मास्टर प्लान में ही ग्रीन बेल्ट की जमीनें निकाले जाने को लेकर भी अधिकारी जमावट में लगे हुए हैं इसमे चोइथराम स्कूल के सामने की जमीन का पूरा बेल्ट ग्रीन बेल्ट से बाहर करने को लेकर लगभग सहमति बन चुकी है इसमे सभी गार्डन के अलावा पम्मी सरदार की सात एकड़ जमीन सहित २५ एकड़ जमीन मुक्त हो जाएगी। इससे जमीनों की कीमत १० हजार रुपये स्के. फीट तक चली जाएगी। अन्नपूर्णा मंदिर के पास सोसायटी की ग्रीन बेल्ट की जमीन पर बन रहे माल का लैंड यूज भी भोपाल से शानदार तरीके सेबदलवाया गया है।

जिन दिग्गजों ने ७९ गांव में फंसी अपनी जमीनों को मास्टर प्लान आने से पहले ही आवासीय योजना में परिवर्तित करवा लिया है इनमे से कुछ जमीनों का उपयोग एग्रीकल्चर के लिए भी था। जमीन कारोबारियों का कहना है कि जमीनें मुक्त कराने के बदले में अधिकारियों से लेकर राजनेताओं ने इतनी रिश्वत ली है कि इसकी कल्पना जीवन में नहीं की जा सकती। आश्चर्य की बात यह भी है कि कनाडिय़ां रोड़ पर जिन जमीनों पर बने मैरिज गार्डनों को सीलिंग की मानकर तोड़ा गया था उन पर शुभलाभ का नक्शा पास कराया गया है।

 

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