आदिवासियों को पट्टों पर बांटी गई जमीनें खरीदने वाले उलझे, अब इसे सरकारी घोषित किया जाएगा

इंदौर में आदिवासियों की 1000 करोड़ की जमीनें माफियाओं और पूर्व सांसद के कब्जे में

तत्कालीन कलेक्टर मनोज श्रीवास्तव ने निरस्त किया था इस प्रकार की खरीदी जमीनों के नामांतरण को

 land distributed on lease to tribals
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भोपाल/इंदौर। आदिवासियों की जमीन खरीदी को लेकर लंबे समय से चल रहे घोटाले पर अब सरकार ने गला कसना शुरू कर दिया है और इसके चलते अवैधानिक तरीके से खरीदी गई आदिवासियों की सभी जमीनें अब सरकारी घोषित कर दी जाएगी।

नियमानुसार आदिवासियों की जमीन को बेचने के मामले में कलेक्टर की स्वीकृति ही लगती है, परंतु इंदौर-भोपाल में कलेक्टरों ने यह पॉवर निचले अधिकारियों को देकर बड़ा खेल खेला था।

इसमें अभी दो संभागायुक्त भी उलझे हुए हैं। अब इंदौर में ही आदिवासियों के पट्टों की खरीदी गई जमीन का आंकड़ा 250 एकड़ से ज्यादा हो रहा है। इसमें पूर्व सांसद से लेकर इस सरकार के मंत्री भी शामिल हैं।

इंदौर मेंं देवगुराडिय़ा रोड़ से लेकर कंपेल, पेडमी और सिमरोल में आदिवासियों की पट्टों पर बांटी गई बड़ी जमीनें बिक गई हैं। सिमरोल रोड़ पर बने वॉटर पार्क की पूरी जमीन ही आदिवासियों की ही है। सांठगांठ के चलते इन जमीनों के फैसले राजस्व बोर्ड से कराए जाने के बाद प्रशासन ने अगली अदालतों में अपील नहीं की थी।

पूरे प्रदेश में आदिवासियों की पट्टों पर दी गई जमीनों को लेकर लंबे समय से चल रहे फर्जीवाड़े पर अब सरकार सख्त हो गई है। इसके अंतर्गत आदिवासियों की पट्टों पर दी गई सभी जमीनें अब सरकारी घोषित की जाएगी। यह आदेश राज्य सरकार पूरे प्रदेश में लागू कर रही है।

उल्लेखनीय है कि कटनी कलेक्टर ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आदिवासियों की जमीनें ओनेपोने में खरीदकर कॉलोनियां काटने के मामला पाया था। इसके बाद उन्होंने इसे सरकारी घोषित कर दिया है। अब इसी फैसले को पूरे प्रदेश में आचार संहिता समाप्त होने के बाद लागू किया जाएगा।

इंदौर-भोपाल में आदिवासियों की पट्टों पर बटी जमीनों को खरीदने में राज्य सरकार के अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा इंदौर में ही सिमरोल रोड़ पर पूर्व सांसद ने आदिवासियों की जमीन पर टॉउनशिप बना दी है।

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इसके अलावा इंदौर में देवगुराडिय़ा रोड, कंपेल, पेडमी और कनाडिय़ा रोड़ बड़ी तादाद में जमीनें आदिवासियों को पट्टों पर बटी हुई थी अब यह जमीनें भूमाफियाओं के पास जा चुकी है। आदिवासियों से यह जमीनें बेहद कम कीमत पर ली गई थी।

उल्लेखनीय है कि सिमरोल रोड पर और देवगुराडिय़ा में 250 बीघा जमीन जो आदिवासियों को आवंटित थी, इसे तात्कालीन कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव ने नामांत्रण रद्द करते हुए अधिग्रहित कर ली थी। इस फैसले के खिलाफ राजस्व बोर्ड ग्वालियर में अपील की गई थी जहां पर कलेक्टर का फैसला खारिज कर दिया गया।

इसके बाद प्रशासन भारी दबाव के चलते उच्च न्यायालय में नहीं गया। ऐसे ही कई मामले जमीनों के हैं जिसमें अपील प्रशासन द्वारा नहीं की गई। इंदौर में सिमरोल रोड़ पर बने वॉटर पार्क की पूरी जमीन आदिवासियों के पट्टों पर ही बटी हुई है। इंदौर में लगभग 250 एकड़़ जमीन, जमीन के जादूगरों ने आदिवासियों से खरीद रखी है।

इंदौर में आदिवासियों की जमीन बेचने के मामले में एक संभागायुक्त भी बुरी तरह उलझे हुए हैं। सरकार अब इन जमीनों की खरीदी में बिना वैध प्रक्रिया अपनाए नामांतरण कराए गए हैं उन्हें अब सरकारी घोषित करते हुए भूमी का बड़ा बैंक तैयार किया जाएगा। इससे सरकार को गरीबों और अन्य लोगों को जमीन देने का रास्ता आसान होगा वहीं सरकार का राजस्व भी सुधरेगा।

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