सुलेमानी चाय- बिन पेंदे के लोटे….तुकोगंज दरगाह कमेटी का विवादों से पुराना नाता,,,

बिन पेंदे के लोटे

प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद कांग्रेस के कई मुस्लिम नेता भजापा में फुदकी मारने के लिए फड़फड़ा रहे है । जिसमे से एक है हमारे खजराने के राजाबाबू जो कि पहले भी कांग्रेस से भाजपा मे गोता लगा चुके हैं। अब एक बार फिर जाना चाहते हैं खजराने जैसे मुस्लिम इलाके में निगम चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सबसे बड़ी हार का ठिकरा अपने सर पर फोड़ चुके है ।सुलेमनी सूत्रों की माने तो हमारे अनुशाली साहब अब संसाद शंकर लालवानी के चक्कर काट रहे है । और अगर तोहफे कुबूल हो गए तो साहब की गाड़ी पर जल्द ही फिर से भाजपा का झंडा नजर आ सकता है ।

ना मानेगे ना हारेंगे…

तुकोगंज दरगाह कमेटी का विवादों से पुराना नाता,,,

तुकोगंज दरगाह कमेटी के ना तो शिकायत करने वाले थकते है ना इंतजामिया कमेटी वाले, पुर्व सदर सलीम खान ने भी मस्जिद के पीछे कबरस्तान और दुकानों पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का प्रोजेक्ट बनाया था, दिल्ली तक जा पोहचे थे, पर कुछ लोगो की नाक ज्यादा ही तेज थी उन्हें कागज़ों में ही भ्रष्टाचार की बू आ गई थी, और महज़ प्रोजेक्ट बनाने पर उन्हें सदारत से हाथ थोना पड़ा था। इस बार दरगाह कमेटी मस्जिद के पीछे कबरस्तान में खुदाई की गई जिससे मुर्दों की हड्डियां बाहर आ गई ये इलज़ाम अकबर अहमद पदयात्री ने वर्तमान कमेटी पर लगाया । साथ ही इस निर्माण से कब्रस्तान पर दुकानें निकालेंगे वही सदर आसिफ मुलतानी वजू खाना बनाने की बात कह रहे हैं। फ़िलहाल जिला अध्यक्ष रेहान शेख़ ने निर्माण पर जैसे पे तैसा की स्तिथि बना दी है मतलब यथास्थिति।।

राम भक्त मोर्चा…

22 तारीख राम मंदिर प्राणपर्तिष्ठा को भाजपा एक चुनावी अवसर के रुप मे भुना रही हैं इसी कड़ी में धार्मिक स्थलों की सफ़ाई का भी अभियान शुरू हुआ जिसकी शुरूआत मोदी से लेकर अरविन्द मैनन कर चुके है अब समाज को भाजपा से जोड़ने में नाकाम रहा अल्पसंख्यक मोर्चा,भाजपा संगठन को ना उम्मीद कर चुका है। राम मंदिर उद्घाटन में अल्पसंख्यक मोर्चा ने भी अवसर तलाश लिया है ओर मोर्चा कर्बला मैदान की सफ़ाई कर अपने घटे हुए नंबर बढ़ाने की जुगत में हैं पर लोगो का कहना है कि देखना है ये आस्ताने की सफ़ाई करेंगे या चबूतरे की,,

रफत की रफ्तार पर उठ रहे सवाल…

प्रदेश हज कमेटी के मुखिया साहब के राज में हज के आवेदनों की आखरी तारीखों में हज पर जाने वाले काफी परेशान हो रहे है आवेदन की आखरी तारीख 15, जनवरी थी लेकिन आखरी दिनों में आवेदन करते ही सर्वर आवेदन कर्ता को बाहर का रास्ता दिखा रहा है। अब साहब हाजी साहब न बन पाने वाले सभी न हाजी रफत साहब को कोस रहे है, लेकिन सर्वर की खराबी से रफत कि रफ्तार पर सवाल उठना गलत है, लेकिन जनता जर्नादन को कोन समझाए।

You might also like