अरबों रुपये की 1200 एकड़ जमीन सरकार अधिग्रहित कर भूल गई

23 साल बाद भी अतिशेष घोषित शासकीय भूमियों की जानकारी लापता

इंदौर। वर्ष २००० में शासन द्वारा शहरी सीलिंग एक्ट से हजारों एकड़ जमीन शासकीय घोषित की गई थी। इन जमीनों को लेकर २३ साल बाद भी शासन के निर्देशों का कोई पालन नहीं होने के कारण अब यह जमीनें वापस माफियाओं के कब्जे में जा रही हैं। इनमे से कई पर अवैध कॉलोनियां तक कट चुकी हैं। इंदौर में १२०० एकड़ जमीन शासकीय घोषित करने के बाद शासन ने इस पर कब्जा भी ले लिया था। यह जमीन आवासीय, व्यवसायिक और औद्योगिक उपयोग की है। इनमे से कुछ में अभी भी अवैध कॉलोनियों का कामकाज चल रहा है और इनमे से ही कुछ पर पुराने भूस्वामियों ने वापस कब्जा भी कर लिया है।

पूर्व कलेक्टर के कार्यकाल में कनाड़िया रोड़ की ऐसी ही जमीन से मैरिज गार्डन हटाये गये थे। वर्ष २००० में शासन के निर्देश के बाद इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में लगभग दस हजार एकड़ भूमि शासकीय घोषित की गई थी। इन भूमियों पर कई जगहों पर अवैध कॉलोनियां का सर्वे भी करने के बाद इनके व्यवस्थापन को लेकर भी पिछली सरकार में कई घोषणाएँ होती रही। यहां पर प्लाट खरीदने वाले कब्जाधारियों से प्रीमियम और वार्षिक भूफाटक लेकर इनका व्यवस्थापन उस समय करना था, परंतु फिर बाद में तात्कालिन सरकार के समय अवैध कॉलोनियों को लेकर नई योजना के तहत उन्हें वैध किया गया। पर इसमे भी शासकीय भूमि पर काटी गई कॉलोनियों को दूर रखा गया।

२००५ के बाद इन अतिशेष घोषित शासकीय भूमियों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और अब इन पर बड़ी तादाद में कब्जे हो चुके हैं। अपर कलेक्टर इंदौर द्वारा पत्र क्रमांक ८६४/शहरी सीलिंग/२००१ दिनांक ३१-१२-२००१ को आयुक्त इंदौर संभाग को भी सूचित किया गया था और इसमे कुल २३७ प्रकरणों में ११९६ एकड़ भूमि पर कब्जा प्राप्त करने के साथ इनकी दस्तावेजी जानकारी दी गई थी। इसके अतिरिक्त ५८ एकड़ भूमि पर व्यवस्थापन भी कर दिया गया था। इनमे से कई प्रकरण न्यायालय में भी चले पर उसमे शासन की है जीत हुई और अतिशेष घोषित कर इसे शासकीय घोषित कर दिया गया। एक ओर जहां शासन को अपनी ही योजनाओं के लिए जमीन तलाशना पड़ रही है तो दूसरी ओर १२०० एकड़ से ज्यादा यह जमीन जो शासन भौतिक रुप से कब्जे में ले चुका है उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। इनमे से ऐसी भूमियों पर अन्य व्यक्तियों के नाम लिखा पढ़ी कर अवैध रुप से अभी भी भवन निर्माण किए जा रहे हैं। शासकीय प्रावधान के तहत इन भूमियों पर अतिक्रमण करने वालों को तीस दिन के अंदर अतिक्रमण हटाने के नोटिस भी दिये जा सकते हैं। परंतु अरबो रुपये की इस जमीन को लेकर शासन ने अब आँखे बंद कर ली। bhumafia

प्रशासन जिस जमीन पर कब्जा ले चुका उसे बेचकर साढ़े तीन करोड़ कमाये

इंदौर। खजराना में शासन द्वारा अधिग्रहित की गई जमीन को जमीनों के जादूगरों ने फिर से बेचकर करोड़ों रुपये का खेल कर लिया। खजराना की इस जमीन पर पहले से ही अवैध पटेल नगर बसाने के मामले में इस्लाम पिता सफी पटेल पर कार्रवाई चल रही है। तो दूसरी ओर इस्लाम ने सर्वे नं. ३२५ की ऐसी जमीन उज्जैन के एक कारोबारी को बेच दी जिस पर १९९९ में ही जिला प्रशासन भौतिक कब्जा लेने के साथ अपने अधीन कर चुका था।

इस मामले में दस्तावेजों के साथ की गई शिकायत के बाद कलेक्टर ने जब जांच की तो पाया कि इस सर्वे नंबर की जमीन पर अदालतों में चले प्रकरण के बाद जिला प्रशासन ने १९९९ में ही कब्जा ले लिया था। यह जमीन राजेंद्र पिता विष्णु, राधेश्याम पिता विष्णु, लीलाबाई और महेश पिता सेवाराम के अलावा मुकेश पिता सेवाराम, लक्ष्मीबाई सेवाराम और अन्य के नाम पर थी इन्होंने इस्लाम पटेल से अनुबंध किया और इसी अनुबंध के आधार पर इस जमीन का एक टुकड़ा उज्जैन के जमीन कारोबारी महेश कानड़ी को बेच दिया। इसका भुगतान ३ करोड़ १९ लाख रुपये भी ले लिए। इस काम में पटवारी और आरआई भी शामिल रहें। इस जमीन पर जिला प्रशासन पहले ही कब्जा लेने के साथ किसानों के परिवारों को पूरी तरह इस जमीन से बेदखल कर चुका था इसके बाद भी किसानों ने इस्लाम पटेल के साथ मिलकर इस जमीन पर आगे कामकाज के लिए उसे अधिकार सौंप दिये और इसे आधार पर इस्लाम ने पटवारी और आरआई से मिलकर जमीन डिग्री भी पारित करवा ली थी। अब यह मामला जिला प्रशासन में जांच के बाद अपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए तैयार शुरु कर दी है।

 

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