आज 10 आवासीय योजना धारा-16 में मुक्त होना थी, रिश्वत करोड़ों की पहले ही ले चुके थे

79 गांवों के भूमि उपयोग तय नहीं होने और मास्टर प्लान की देरी के बीच चल रहा था बड़ा फर्जीवाड़ा

The story behind the departure of Principal Secretary Mukesh Gupta
The story behind the departure of Principal Secretary Mukesh Gupta

इंदौर। धारा-16 के तहत रेवड़ी की तरह जमीनों को मुक्त करने और कॉलोनी काटने की अनुमति दिए जाने के मामले में सबसे ज्यादा बदनाम अधिकारी के रुप में टॉउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) के संचालक मुकेश गुप्ता अंतत: कल अपने पद से मुक्त कर दिए गए। अब उनके अचानक मुक्त किए जाने के बाद 10 से अधिक प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपए की रिश्वत लेने के बाद अब यह मामले उलझ चुके है।

आज इनको लेकर बैठक में अनुमति दी जानी थी। मास्टर प्लान नहीं आने के कारण इंदौर के 79 गांवों में जमीन के जादूगरों ने अपनी आवासीय योजनाएं डालकर डायरियों पर अरबों रुपए उगा रखे है। मुकेश गुप्ता के कारनामों की जानकारी पूर्व मुख्य सचिव के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने 4 माह पहले ही धारा-16 की अनुमति के सारें मामलों में स्वीकृति देने से रोक लगा दी थी। उनके हटते ही एक बार फिर मुकेश गुप्ता रिश्वत की बड़ी राशि लेकर इन प्रकरणों में अनुमति देने की तैयारी कर चुके थे। इसकी भनक नई मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री दोनों तक पहुंचने के बाद कल तुरत-फुरत में मुकेश गुप्ता को पद से मुक्त कर दिया गया। उनके भ्रष्टाचारों की गूंज भोपाल में जमकर थी।

मुकेशचंद गुप्ता को प्रमुख सचिव बनाए हुए 2 साल से ज्यादा हो गए थे, परन्तु इसके बाद भी वे अपनी जमावट के चलते टाउन एंड कंट्री प्लानिंग में 2 पद नीचे संचालक के पद पर भी बने रहे। उन्होंने यहां का पद नहीं छोड़ा। इधर, उन्होंने अपने कार्यकाल में कई जमीनों को मुक्त करने को लेकर भारी रिश्वत वसूली थी। इसके पूर्व इंदौर में धारा-16 की अनुमति को लेकर करोड़ों रुपए की रिश्वत के मामले में वे मंत्री तक को उलझा चुके थे। अब मास्टर प्लान नहीं आने के कारण 79 गांवों की जमीनों पर आवासीय योजनाओं को लेकर धारा-16 में छूट दिए जाने को लेकर एक सहमति बनी थी, जिसमें आदेश हुआ था कि 10 एकड़ से ज्यादा भूमि वाले आवासीय प्रोजेक्ट को मास्टर प्लान नहीं आने तक स्वीकृति दी जाए।

परन्तु मुकेश गुप्ता ने भारी रिश्वत लेकर तेजी से धारा-16 में बिना जांच के आवासीय प्रोजेक्ट को तेजी से स्वीकृति देना शुरु कर दी। जब इसकी जानकारी प्रमुख सचिव इकबाल सिंह बैस को लगी, तो उन्होंने धारा-16 के तहत दी जाने वाली स्वीकृतियों पर रोक लगाते हुए मास्टर प्लान की तैयारी और जल्दी लाने के निर्देश दिए।  mukesh gupta pramukh sachiv

इसका मुख्य कारण यह था कि मुकेश गुप्ता ने कई जगह बिना जांच उद्योगिक क्षेत्रों में भी स्वीकृति दे दी थी। इसके बाद जैसे ही निजाम बदला और नए मुख्य सचिव की नियुक्ति हुई। मुकेश गुप्ता फिर अपने कामकाज में लग गए। चूंकि धारा-16 में अनुमति नहीं दिए जाने की मौखिक रोक थी। अब नए निजाम में आज उन्हें 10 और प्रोजेक्ट में अनुमति देना थी, जिसकी मीटिंग आज थी। इन सभी से करोड़ों रुपए मुकेश गुप्ता पहले ही वसूल कर चुके है।

अब यह सभी मामले उलझ गए है। इसके पूर्व दो मीटिंग में भी धारा-16 की बैठक लेकर कई प्रोजेक्ट को अनुमति दे चुके थे। इधर, दूसरी ओर शहर के जमीन जादूगरों ने इन जमीनों पर डायरियों पर भूखंड बेच रखे है। यहां सड़क की चौड़ाई को लेकर भी अब नए विवाद सभी जगहों पर खड़े हो जाएंगे। मास्टर प्लान आने के बाद ही अब इन प्रोजेक्ट पर अब फैसला होगा। इधर, मुकेश गुप्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों की शिकायतें मुख्यमंत्री तक भी पहुंची है। मुख्यमंत्री का परिवार खुद जमीनों के एक बड़े प्रोजेक्ट में जुड़ा हुआ है। ऐसे में मुकेश गुप्ता के कारनामों से वे भी अच्छी तरह वाकिफ है।

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