सुलेमानी चाय- कटे हाथ के ठाकुर…तू गद्दार मैं वफादार…किस्सा कुर्सी का…

कटे हाथ के ठाकुर…

भाजपा अल्पसंख्यक नेताओ का इस बार विधानसभा चुनाव में काम करना लोहे के चने चबाने जैसा रहा। एक तरफ जहां कैलाश विजयवर्गीय और आकाश विजयवर्गीय की बयान बाजी ने भाजपाई मुस्लिम का काम मुश्किल किया तो कांग्रेसियों का आसान। उस पर ज़ुल्म ये कि विधानसभा 3 और 4 उम्मीदवार अल्पसंख्यक मोहल्लों में घुसना तक नही चाहते थे। दोनों ने मुस्लिम इलाको में कोई बैठक नहीं ली, ना ही कोई सभा की। बेचारे अल्पसंख्यक नेता का हाल कटे हाथ के ठाकुर जैसा हो गया, बोले तो बोले क्या? करें तो करें क्या? 4 नंबर मे कर्बला सदर और मोरी दरगाह सदर दूसरी विधान सभाओ में अपना जौहर आजमाते रहे। नासीर शाह 5 नंबर के प्रभारी थे। पर 2 और 1 में नज़र आए। 5 नंबर से मोर्चा सदर के सूट पर शल तक नही आया, पुराने सदर की तो हालत मत पूछिए। कुल मिलाकर अल्पसंख्यकों का मतदान प्रतिशत बढ़ा है। अल्पसंख्यक नेता इस का ठिकरा, बयानबाजी और प्रत्याशियों का अल्पसंख्यक क्षेत्र को अनदेखा करना बताया जा रहा हैं।

तू गद्दार मैं वफादार…

भाजपा अल्पसंख्यक नेता समीर बा का नाता विवादों से काफी पुराना रहा हैं। बा को 3 नंबर विधानसभा का प्रभारी अल्पसंख्यक मोर्चा ने बनाया। गोलू शुक्ला के कार्यालय पर अल्पसंख्यक बैठक बुलाई, समीर दूसरे मुस्लिम भाजपाईयो को ज्ञान पेलने लगे तो वही बैठे अल्पसंख्यक मोर्चा के सदस्य मोईद ने समीर को आइना दिखाते हुए कहा कि बा तुम्हारी टीम तो पिंटू जोशी का काम कर रही है। इस पर समीर सकते में आ गए और दोनों और से इल्ज़ाम और गालियों की बौछार के साथ बात छुमा झटकी तक हो चली। बैठक के बाद फिर तू तू मै मैं हुई और मामला थाने मे एफआईआर तक पहुंचा। चुनाव को देखते हुए नेताओ ने मामले को पेंडिंग मै डाल दिया, पर इनके बूथ पर जो वोटिंग हुई उसने गोलू की नींद उड़ा दी। प्रभारी बा के बूथ से पिछले विधानसभा चुनाव में मतदान 52 प्रतिशत था। इस बार 81 प्रतिशत रहा। वही मोईद के बूथ पर 62 प्रतिशत था। इस बार 70 से भी ज़्यादा मतदान हुआ। अब गोलू सोच रहे है कि इन्होंने मेरा भला किया या बुरा इस सब मे अल्पसंख्यक मोर्चे के मुखिया अपनी उपस्थिति दर्ज कराने भी नहीं पहुँच सके। क्योंकि इस चुनाव में उनकी गाड़ी थोड़ी खराब थी। गेरेज खुद का है तो क्या हुआ। मेकेनिक तो बीमार थे।

किस्सा कुर्सी का…

प्रदेश की सबसे बड़ी मुस्लिम एजुकेशनल सोसायटी ने अपने ख़िलाफ़ चल रहे मामलों के खारिज होने पर राहत की सांस लेने की सोची, उससे पहले ही दूसरी टीम ने सभी मामले अगली कोर्ट में लगा दिए। इन सब मे सुलेमनी सूत्रों के माने तो सभी केसों के बदले एक अदद कुर्सी की मांग रखी गई है, जिसके बदले सभी केस वापसी की ग्यारंटी रहेगी, अब साहब उस कुर्सी से क्या-क्या काम अंजाम दिए जाएंगे, ये कुर्सी वाले ही जाने।

दुमछल्ला…

सुलेमानी समीकरण…

इन्दौरी ठियों पर अभी कशमकश का माहौल बना हुआ है। हर कोई अपने इलाके के विधायक को लेकर गुणा भाग में लगा हुआ है तो भय्या सुलेमनी चाय वाला कहां चुप रहे। इंदौर में एक नम्बर में कैलाश विजयवर्गीय कम जीत रहे है । दो नम्बर में दादा दयालु एक नम्बर पर है। तीन में मामला कशमश भरा है लेकिन अगर सब ठीक रहा तो ये सीट फिर जोशी परिवार में जाती दिख रही है। बात चार की करे तो भाभी अब भी भारी है। पांच में कांग्रेस के सत्तू जीत सकते है। राऊ में जीतू की जीत पक्की दिख रही है। देपालपुर में विशाल ने अपने कद को बरकरार रख सकते है। सांवेर में तुलसी की खुशबू बरकरार है।

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