गुस्ताखी माफ़: छोरो हुओ नहीं नाम करण की तैयारी…छोरो हुओ नहीं नाम करण की तैयारी…

Gustakhi Maaf

छोरो हुओ नहीं नाम करण की तैयारी…

गुजराती समाज के झंडाबरदार यानी पंकज संघवी पिछले दिनों देश के गृहमंत्री अमित शाह से गुलदस्ता लेकर निमंत्रण देने विमानतल पहुंचे थे फिर उसी गुलदस्ते के साथ वे 19 सेकंड की मुलाकात के बाद वापस आ गये। इसके बाद वे गांव भर में सफाई देते रहे कि वे तो गुजराती समाज के सौ साल पूरे होने पर निमंत्रण देने के लिए गये थे। इधर गुजराती समाज के अन्य झंडाबरदारों का कहना है कि पंकज बाबू जिस सौ साल की बात कर रहे है ऐसे सौ साल को लेकर समाज के किसी भी अंग में कोई बातचीत नहीं हुई है। इतने विराट आयोजन को लेकर कब फैसला हो गया यह भी जानकारी नहीं है।

सबसे बड़ी बात यह है कि यह कार्यक्रम चुनाव से पहले हो रहा है या चुनाव के बाद होगा। इसे लेकर भी कोई चर्चा नहीं है जो उन्हें लेकर गये हैं वे भी समाज के पदाधिकारियों में शामिल जरुर है पर उन्हें भी कोई जानकारी नहीं है। दूसरी ओर समाज के ही सभ्य और इज्जतदार घरानों का कहना है कि इन दिनों उनका परिवार ईडी के छापों में जहां उलझा हुआ है तो दूसरी ओर मध्यप्रदेश

सरकार द्वारा शिक्षा के लिए मिल रहे अनुदान के दुरुपयोग का मामला शिकायत के तौर पर पहुंचा है। मामला ऐसा है कि शासन से मिले शिक्षा अनुदान का उपयोग गुजराती समाज में खुद की झांकी के लिए दान पुण्य के रुप में हो रहा है। जबकि यह नियमों के विपरित है। यदि यह अनुदान सरकार ने बंद कर दिया तो गुजराती समाज की शैक्षणिक संस्थाएँ नई मुसीबत में फस जाएगी। इन दिनों संघवी परिवार की हालत आसमान से गिरे और खजुर में अटके की स्थिति में आ गई है। समाज के ही लोग कह रहे है कि शादी का भी पता नहीं छोरो भी हुओ नहीं और भिया नामकरण करने पहुंच गए।

मित्र के सपनों में 1 नंबर भी…

क्षेत्र क्रमांक 1 में सुदर्शन बाबू पिछला चुनाव क्या हारे पूरे क्षेत्र की हालत गरीब की जोरु सबकी भाभी जैसी हो रही है। जो इस क्षेत्र में कभी रुची नहीं लेते थे वे भी अब समीकरण देखकर रुची लेने लगे हैं। दो दिन पहले क्षेत्र क्रमांक 1 के कार्यकर्ताओं के भाजपा कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में कार्यकर्ताओं में हवा भरने की भरपूर कोशिश नेताओं ने की पर मामला कुछ जमा नहीं इधर प्रदेश की चुनावी कमान नरेंद्रसिंह तोमर के हाथ में आने के बाद यह माना जा रहा है कि मालिनी गौड़ अब ताकतवर हो गई है जिन्हें यहां सपने आ रहे थे अब उन्हें दूसरी जगह के सपने भी देखना पड़ रहे हैं।

इसमे मित्र भी शामिल है। मित्र के आसपास के सलाहकार बता रहे हैं कि महापौर चुनाव में वे 20 हजार मतों से यहां अपने दम पर बढ़त बना चुके हैं यानि वे उम्मीदवार होंगे तो यह बढ़त तो बनी ही रहेगी। दूसरी ओर ब्राह्मण के सामने ब्राह्मण का मामला भी ठीक स्थिति में आ जायेगा। खामखा दादा दयालु को नंदानगर से यहां आकर कामकाज करना पड़ेगा। हालांकि अभी तो सूत और कपास का कोई पता नहीं $है। कहने वाले तो यह भी कह रहे हैं कि पिछली बार भी वे तय कर चुके थे तो उम्मीदवारी घर चलकर आई यदि अब तय कर लिया तो भी यही स्थिति रहेगी।

-9826667063

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