
rupees inflation: मुंबई (ब्यूरो)। रुपए की हालत सुधारने को लेकर रिजर्व बैंक के तमाम प्रयास के बाद भी रिजर्व बैंक में अब घबराहट का माहौल बन रहा है। दूसरी ओर रुपये की साख बचाने में विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खाली हो रहा है।
विदेशी मुद्रा भंडार अपने 23 महीने के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है, जो अब 523 अरब डॉलर रह गया है। दूसरी ओर रुपये को बचाने में रिजर्व बैंक को बाजार में 13 अरब डॉलर छोड़ने पड़े हैं। इसके बाद भी रुपया 80 रुपए पर ही बना हुआ है। इधर रिजर्व बैंक अब रिकार्ड व्यापार घाटा, कोयला और ईंधन के आयात के बाद विदेशी मुद्रा को बचाने में जुट गया है। सितंबर माह में केन्द्र सरकार को उठाए गए कर्ज के बदले में लगभग 230 अरब डॉलर की किस्त भी जमा करनी है।
रिजर्व बैंक डॉलर की मजबूती के आगे अब घुटने टेकने की स्थिति में आ रहा है। तमाम प्रयास के बाद भी रुपया घड़ी-घड़ी डॉलर के मुकाबले 80 रुपए को छू कर वापस आ रहा है। रिजर्व बैंक लगातार डॉलर की बिकवाली कर रुपये को बचाने में लगा हुआ है।
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दूसरी ओर यह माना जा रहा है कि आगे भी यही हालत रहने वाली है। विदेशी मुद्रा भंडार 23 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। रुपये की हालत अभी नहीं सुधरेगी। इस मामले में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बीबी सुब्बाराव का कहना है कि रुपये की गिरावट में अब रिजर्व बैंक को दखल देना बंद करना चाहिए, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सही स्थिति में खड़ा हो पाए।
