शहर के तमाम जालसाज कालोनाइजर जो जिला प्रशासन के कई सख्त कदमों के बाद भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। पिछले दिनों कलेक्टर ने डायरियों पर हो रही प्लाटों की बेच खरीदी का गला दबा दिया था और इसके बाद इस प्रकार के तमाम दलालों से बांडओवर भी करवाया गया था। इसमे सबसे बड़े डायरी कारोबारी उमेश डेमला और संजय मालानी सबसे ज्यादा चर्चित रहे। अब धीरे धीरे प्रशासन की कार्रवाई ठंडी पड़ी तो एक बार फिर शहर में डायरियों का काम इन्होंने फिर शुरु कर दिया। पहले घर से करते थे अब कार्यालय खोलकर कामकाज कर रहे हैं।
शहर के सबसे बड़े डायरी कारोबारियों में उमेश डेमला और संजय मालानी द्वारा सौ करोड़ से अधिक की डायरियों का कामकाज किया गया था। जब यह मामला उजागर हुआ तो जिला प्रशासन ने लोगों के साथ हो रही धोखाधड़ी को रोकने के लिए डायरियों पर हो रही खरीदी पर रोक लगाते हुए इन सभी पर कार्रवाई प्रारंभ की। इस दौरान शहर में पचास से अधिक दलालों को प्रशासन ने पकड़ा था और इसके बाद कुछ फरारी में रहे और बाद में बांड ओवर करके मुक्त हुए।
परंतु सालभर पहले बेची गई डायरियों को लेकर अब फिर नये सिरे से तरीका बदलकर डायरियां बनाने का काम शुरु हो गया है। अब एक हजार के बजाए दस लाख लेकर सीधे दस हजार की डायरियां बनाई जा रही है। इसके लिए उमेश डेमला और संजय मालानी ने बकायदा पलासिया में कामकाज प्रारंभ कर दिया है और यहीं से बैठकर बायपास, सुपर कारिडोर की जमीनों पर भी खेल शुरु कर दिया है। इसके अलावा झलारियां और हिंगोरिया की डायरियां भी बाजार में बनना शुरु हो गई है यहां पर सौ करोड़ से अधिक का कामकाज एक बार फिर किए जाने को लेकर डायरियां बन रही हैं।
पुरानी डायरियों में भी वापस इंट्री शुरु हो गई है। इनमे से कुछ जमीनें ऐसी हैं जो योजना में जा रही है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि डायरियों का यह कारोबार सट्टे और शेयर बाजार की तर्ज पर शहर में यही बीस दलाल कर रहे हैं और दो नंबर में करोड़ों रुपए का कामकाज चल रहा है। इसी प्रकार की डायरियों में सुपर कारिडोर में संजय दासौद ने भी दस साल पहले प्लाट दे रखे हैं जिसमे न तो आजतक रेरा की कार्रवाई हुई है और ना ही इन डायरियों का निराकरण हो रहा है। मजेदार बात यह है कि इनमे से कई फर्जी डायरियां बनाकर इनपर फाइनेंस किया जा रहा है।