Sulemani Chai: सनव्वर की नाक के नीचे…! एआईएमआईएम में ‘कुछ तो गड़बड़ है दया’…

सनव्वर की नाक के नीचे…!

साहब, प्रदेशभर में वक्फ माफियाओं का ऑपरेशन करने वाले डॉ. सनव्वर पटेल के अपने ही आंगन में क्या गुल खिल रहे हैं,उसकी भी खबर होनी चाहिए! उज्जैन के जूना सोमवारिया स्थित कब्रिस्तान की जमीन पर लियाकत नाम के शख्स पर गरीबों को प्लॉट बेचने के आरोप लगे थे। प्रशासन ने जमीन कब्जे से मुक्त कराकर वक्फ बोर्ड को सौंपी, लेकिन अब चर्चा है कि उसी जमीन पर फिर प्लॉट कट रहे हैं और मकान बनने लगे हैं। सवाल ये है कि साहब, जमीन वक्फ बोर्ड को सौंपी थी या भूमाफियाओं को, दोबारा कारोबार शुरू करने का मौका दिया था? प्रदेशभर में वक्फ की जमीनों का हिसाब मांगने वाले डॉक्टर साहब की अपने ही इलाके में आखिर नजर कमजोर क्यों ? दूसरों के मर्ज का इलाज करना आसान है डॉक्टर साहब, असली परीक्षा तो तब है जब बीमारी अपनी नाक के नीचे पल रही हो! अब देखना ये है कि लियाकत के कथित जमीन वाले खेल पर कार्रवाई होती है या फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

एआईएमआईएम में ‘कुछ तो गड़बड़ है दया’…

साहब, इंदौर में ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम का हाल देखकर सीआईडी धारावाहिक वाला दया भी माथा पकड़ ले! मोहसिन साहब की कमान में इस्तीफों का ऐसा सिलसिला चला कि पुराने सिपहसालार एक-एक कर किनारा कर रहे हैं। इंदौर से नईम अंसारी, आमिर बेकरीवाला, बुरहानपुर से जाहिर भाई कोर कमेटी के सोहेल हाशमी से लेकर खंडवा बुरहानपुर के एक एक पार्षदों के साथ करीब अस्सी कार्यकर्ता पार्टी छोड़ चले हैं। अब सवाल है—मोहसिन साहब संगठन चला रहे हैं या इस्तीफों की फैक्ट्री ? पुराने चेहरे विदा हो रहे हैं इसी के साथ इंदौर में खलील मुल्तानी की ताजपोशी पर सवाल उठ रहे हैं। लगता है संगठन में काबिलियत से ज्यादा जेबों का भारीपन टटोला जा रहा हैे। दूसरी बड़ी बात इंदौर में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस के खर्च को लेकर भी चर्चाएं हैं। अगर दो-तीन हजार के खर्च का हिसाब सात-आठ हजार बताया गया है, तो पारदर्शिता पर सवाल उठना लाजिमी है। अब हमारी तो ओवैसी साहब के लिए सलाह है कि प्रदेश में संगठन की नब्ज टटोलिए, वरना कारवां आगे बढऩे के बजाय इस्तीफों की बारात निकालता नजर आएगा। फिर तो बस यही कहना पड़ेगा—कुछ तो गड़बड़ है दया… नहीं साहब, यहां तो पूरा मामला ही गड़बड़ है!

आयोग में अयोग्य उम्मीदवार…

इंदौर के खजराने से हमारे प्यारे लाडले नेता जी का दिल अब अल्पसंख्यक आयोग की लाल बत्ती की तरफ डोलने लगा है। साहब के समझ में आ गया है कि जब तक मोहन के चूल्हे पर सनवर का कुकर रखा है उनकी सीटी नहीं बजने वाली ओर जब तक सीटी नहीं बजेगी दाल नहीं गलेगी, लाख कोशिश के बावजूद साहब की बत्ती वक्फ बोर्ड में नहीं जली। इसी के साथ प्रदेश मोर्चा भी डॉ,साहब की डिस्पेंसरी के हवाले कर दिया गया तो अब हमारे नेताजी आर ,के कंपनी के सहारे चुपचापअल्पसंख्यक आयोग से लाल बत्ती के लिए चक्कर लगा रहे हैं। अब उन्हें आयोग से बत्ती मिलेगी या लाल बत्ती जलेगी इसका पता तो वक्त पर ही चलेगा। वैसे साहब की जानकारी के लिये उनके शुभचिंतक वहां भी उनकी जड़ो में दही डालने की तैयारी में है।

दुमछल्ला… अमूल का मक्खन…

शहर के मध्य स्थित माणिकबाग की अशोका कालोनी के अमूल गार्डन के मामले में तारीख आगे बढ़ गई है। दंडाधिकारी की तरफ से तारीख पे तारिख देने का सिलसिल शुरू हो गया है लेकिन अमूल गार्डन के मक्खन का मजा लेने वाले अपने सादिक नेता के चंगु मंगू पर कब प्रशासन का चाबुक कब चलेगा इसका पता किसी को नहीं। हां लेकिन नेता जी मामले से सीधे बाहर हैं। हम उन पर किसी तरह का इल्जाम नहीं लगा रहे हैं…बाकी सब समझदार है।

मेहबूब कुरैशी
9977862299

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