बारामत्था बगीची: एतिहासिक स्थल धीरे-धीरे खो रहा है अपनी जमीन
असामाजिक तत्वों ने कर लिए कई अवैध निर्माण, होलकर रियासत में बना था

इंदौर। जूने इंदौर में लालबाग के पास बने बारामत्था बगीचे का विकास तो नहीं हुआ किसी जमाने में यह धार्मिक और पर्यटन स्थल के रुप में भी पहचाना जाता था, परंतु अब धीरे धीरे मंदिर परिसर की खाली पड़ी भूमि पर कब्जे किए जाने के साथ अवैध निर्माण भी शुरु हो गये हैं। इस जमीन का बड़ा हिस्सा सरकारी भूमि के अंतर्गत आता है कई मंदिर यहां पर निर्मित है। कुछ मंदिरों पर लगे बोर्ड भी असामाजिक तत्वों ने हटा दिये बल्कि यहां पर बने जमनानंदजी महाराज का स्मारक भी तहस नहस कर दिया है। यदि समय रहते इस भूमि का सीमांकन नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में पूरी तरह पर खोलियों के अवैध निर्माण हो चुके रहेंगे।
बारामत्था परिसर में ही असामाजिक तत्वों ने मंदिर की भूमि पर ही अवैध रुप से कब्जा कर यहां ओटले का निर्माण कर अपनी बैठक व्यवस्था बना ली है। इसी के साथ पोर्च में लोहा का पक्का चढ़ाव बनाकर आगे भी अवैध कब्जा किया जा रहा है। इस मामले में यहां पर बने शिव मंदिर के व्यवस्थापक कैलाश मोदी ने भी कलेक्टर और मुख्यमंत्री को भी शिकायत की है। शिकायत यहां तक की जा रही है कि जो लोग रात को मंदिर में दर्शन करने आ रहे थे वे भी शराबियों के चक्कर में धीरे धीरे आना बंद कर चुके हैं। बारामत्था मंदिर का अपना एक इतिहास है महाराजा तुकोजीराव द्वितीय ने नगर की बस्ती के बाहर सुरम्य हरियाली से परिपूर्ण इस क्षेत्र में एक आकर्षण अतिथि सत्कार गृह के रुप में सुंदर राजप्रसाद बनाने का निश्चय किया था वास्तु वि शेषज्ञों द्वारा चयनित सभी प्रकार से उपयुक्त स्थल पर इसका निर्माण किया गया था। प्रसिद्ध वास्तुविद में उद्यान शाी हारवे को नियुक्त कर ७०.६३ एकड़ के विशाल भूभाग में इसी के पास लालबाग का निर्माण भी किया गया। इस जगह पर सुरम्य उद्यान एवं विहार वाटिका की सुंदर संरचना की गई थी। जिस स्थल पर नदी का पानी बांधा गया था वहां घने पेेड़ों के नीचे एक प्राचीन देव स्थान था लगभग सौ वर्ष पूर्ण इस स्थान पर बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग पास ही टीन के छप्पर के नीचे विशिष्ठ भैरव प्रतिमा स्थापित की गई थी। भैरव प्रतिमा के माथे पर धारियों में विभाजित १२ भाग थे जिस कारण प्रतिमा को बारामत्था भैरव कहा जाता था और इसी चलन के चलते इस क्षेत्र का नाम बारामत्था कहा जाने लगा। प्रारंभ में ब्रह्मचानी जमनानंदजी इस देव स्थान पर विराजित थे जो आजीवन पूजा अर्चना करते रहे धीरे धीरे इस पूरे क्षेत्र का रखरखाव बंद होने के बाद अब इस जगह पर तेजी से खाली पड़ी जमीनों पर कब्जे किए जा रहे हैं। कलेक्टर सहित मुख्यमंत्री तक शिकायत के बाद भी इस रमणीय स्थल को बचाने का कोई प्रयास नहीं हो पा रहा है। यहीं पर एक मंदिर का रखरखाव कर रहे कैलाश मोदी का कहना है कि कई बार शिकायतों के बाद भी धीरे धीरे यह जगह असामाजिक तत्वों के हाथों में जा रही है आज भी भीड़ से निकलकर यदि एकांत और शांति में बैठना हो तो बारामत्था से अच्छा जगह कोई नहीं हो सकती है।