
इंदौर। कांग्रेस की सरकार से पलायन कर भाजपा का दामन थामने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया, उनके समर्थक मंत्री भाजपा सरकार और संगठन के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा बुलाई गई कैबिनेट की बैठक से गैरहाजिर रहने वाले मंत्रियों की मनमानी से भाजपा के अंदरखाने में चर्चा जोरों पर है।
बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व हमेशा परिवारवाद का विरोध करता है और बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं कि यहां कार्यकर्ताओं को महत्व दिया जाएगा ना कि एक ही व्यक्ति के परिवार के सदस्यों को, लेकिन बीजेपी की केंद्रीय और प्रदेश की गाइडलाइन के बिल्कुल उलट सिंधिया समर्थक मंत्रियों का रुख है। इंदौर में भागवत कथा के सहारे जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने अपने पुत्र को राजनैतिक जमीन पर उतारने को लेकर भी भाजपा सांवेर नेताओं ने शिकायत की है। वहीं सरकार और संगठन की राजनीत उनके इर्दगिर्द घूम रही है जो इंदौरी नेताओं को रास नहीं आ रहा है। सागर से राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अपने भाई हीरा सिंह राजपूत को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने को लेकर भाजपा की गाइड लाइन की धजिया उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। latest bjp news mp
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जबकि उनके भाई पर बरखेरा महंत गांव के श्री जानकी रमण मंदिर की जमीन हड़पने के गंभीर आरोप लगे हुए थे। सागर में मध्यप्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के पेपर लीक को लेकर उनके कॉलेज ज्ञानवीर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड सांइस कॉलेज को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड ने भी इस बात की स्वीकृति दी थी। उनके मंत्रालय की बात करें तो हाल और बुरे है। खुद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को मुख्यमंत्री को पत्र लिखना पड़ा था की मध्यप्रदेश बॉर्डर पर बिना लेनदेन किए कोई गाड़ी आगे नहीं बढ़ती। डबरा से विधानसभा का चुनाव हारी इमरती देवी को सिंधिया के दबाव के चलते लघु उद्योग निगम का अध्यक्ष बनया गया जो प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ थाना प्रभारी को निलंबित करवाने के लिए सड़क पर धरने पर बैठ गई थी। वही सिंधिया को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए जाने की हर राजनेतिक मंच पर वकालत करती है।
