10 और 20 के पैकिंग की खपत 63 प्रतिशत बढ़ गई

महंगाई की मार : थोक सामान वाले भी फुटकर हुए

नई दिल्ली (ब्यूरो)। देश में लगातार बढ़ रही महंगाई ने मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के सामान खरीदने की क्षमता को बेहद कम कर दिया है। इसका असर यह हो रहा है कि थोक सामान खरीदने का व्यवहार अब फुटकर सामानों पर आ गया है।

घरेलू सामान बनाने वाली कम्पनियों ने बताया कि अब एक रुपए दो रुपए 5 रुपए और 10 रुपए के पैकिंग में सामान की मांग 63 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जबकि खाने के आयटम में यह 100 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

अनब्रांडेड सामानों की पैकिंग पर भी लगे जीएसटी ने कीमतों में और आग लगा दी है। चक्की पर पिसने वाला आटा भी जीएसटी के बाद 50 प्रतिशत महंगा हो गया है। रिसर्च कम्पनी के अनुसार अब दुकानों पर जाने वालों के क्रम में भी कमी आई है।

देश में लगातार महंगाई और जीएसटी की मार का असर जहां 32 करोड़ मध्यमवर्गीय परिवार पर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है वहीं गरीब परिवार भी अब सामान खरीदने में बड़ी कटौती कर रहा है। मार्केट रिसर्च एजेंसी कांतार के ताजा सर्वे में कई आश्चर्यजनक जानकारी सामाने आई है। इसमें बताया गया है कि घरेलू सामान बनाने वाली एफएमसीजी कम्पनियां हिन्दुस्तान लीवर और अन्य द्वारा 10 रुपए के पैकिंग के सामान में 63 प्रतिशत उछाल आया है जबकि खाद्यान्न के 10 रुपए के पैकिंग 100 प्रतिशत तक उछल गए हंै।

उल्लेखनीय है कि एक रुपए, दो रुपए, पांच रुपए, 10 रुपए के सामान के पैकेट पहले 28 प्रतिशत तक बिक रहे थे, दूसरी ओर सरकार द्वारा अपना खजाना भरने के लिए छोटी दुकानों से बिना नाम के पैकिंग कर बेच रहे सामान पर भी टैक्स लग जाने के बाद यह सामान 10 से 15 प्रतिशत तक महंगे हो गए हैं। इसमें मसाले, पोहे, पापड़, आटा, दाल, चावल सहित 50 से अधिक सामान बाजार में 50 प्रतिशत आबादी इसी प्रकार का सामान खरीदती है जो अब और महंगा सामान खरीदेगी।

लगातार बढ़ रही कीमतों के बाद कम्पनियों ने अपने छोटे पैकिंग में भरे जा रहे सामान के वजन में कमी कर दी है। यानी महंगाई की मार सीधे उपभोक्ता पर ही पहुंच गई है। कई सामानों में 11 प्रतिशत तक की कमी हो गई है। हिन्दुस्तान लीवर का कहना है कि 5 रुपए के बिस्किट, नुडल में 6 प्रतिशत तक सामान कम हो गया है तो 10 रुपए के टूथ पेस्ट, साबुन, शैम्पु सहित अन्य सामान में 7 प्रतिशत तक की कमी कर दी गई है। यानी भाव उतना ही पर सामान कम हो गया।

दुकान पर जाना भी कम हुआ

रिसर्च एजेंसी कांतार के अनुसार 2020-21 के पहले जहां एक व्यक्ति 135 बार साल भर में सामान खरीदते थे और एक बार में 1033 ग्राम सामान लेते थे। अब वे लोग 142 बार दुकानों पर जा रहे हैं पर सामान खरीदने की क्षमता 966 ग्राम हो गई है। यानी खपत की आदत में भी बड़ा अंतर आ गया है।

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