देश के पहले जुबली कुमार के नाम से वे जाने गए

20 जुलाई को 'राजेन्द्र कुमारÓ के जन्मदिन के अवसर पर

इंदौर। 20 जुलाई को सुनहरे युग के एक ऐसे सफलतम अभिनेता का जन्म दिवस है, जिनकी कई फिल्मों ने लगातार सिल्वर जुबली मनाई याने सिनेमाघरों में ये फिल्में लगातार 25 सप्ताह तक हाउस फुल में चलती रही। इसी विशेषता के कारण उन्हें ‘सिल्वर जुबली कुमारÓ कहा जाने लगा। ये है ‘राजेन्द्र कुमार साहबÓ।

आपका जन्म सन् 1929 में अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के ‘सियालकोटÓ में हुआ था। देश के विभाजन में उनका परिवार दिल्ली आ गया। फिल्मों में दिलचस्पी उन्हें मुंबई खींच लायी शुरूआत हुई ‘निर्देशक हिम्मत सिंह रवैलÓ के सहायक के रूप में। इस दौरान पतंगा, सगाई, पाकेटमार, जोगन में सहायक निर्देशक रहे। आपकी अभिनय वाली पहली फिल्म थी दिलीप कुमार और नरगिस अभिनीत ‘जोगनÓ जिसमें वो दिलीप साहब के मित्र के रूप में नज़र आये थे।

निर्माता- निर्देशक- देवेन्द्र गोयल ने राजेन्द्र कुमार साहब की प्रतिभा को समझकर उन्हें अपनी फिल्म ‘वचनÓ में नायक की भूमिका दी। फिल्म की सफलता के साथ उनकी पहचान कायम हो गयी। उन्हें अपने समय की हर बड़ी अभिनेत्री के साथ अभिनय करने का अवसर मिला उनमें- वैजयंती माला, मालासिन्हा, आशा पारेख, मीनाकुमारी, सायरा बानो, हेमामालिनी, साधना के साथ-साथ दक्षिण भारत की जमुना और बी सरोजादेवी जैसे नाम शामिल है। अपने कैरियर के सुनहरे दौर में उनके भाई ‘नरेश कुमारÓ ने अपनी स्वयं की फिल्म निर्माण कंपनी की स्थापना करके, – गंवार, तांगेवाला, गांव हमारा शहर तुम्हारा फिल्में बनाई।

आपके अभिनय से सजी कुछ फिल्में है – मदर इण्डिया, घर संसार, माँ बाप, संतान, चिराग कहाँ रोशनी कहाँ, । फिल्मकार ‘के आसिफÓ साहब एक बहुत बड़े पैमाने पर एक फिल्म बना रहे थे ‘सस्ता खून महंगा पानीÓ नायक थे राजेन्द्र कुमार साहब, लेकिन आसिफ साहब के निधन से फिल्म की कुछ ही रिले बन पायी, फिल्म अधूरी लेकिन फिल्म समीक्षकों के अनुसार ये फिल्म ‘राजेन्द्र कुमार साहबÓ के कैरियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्म होती, अगर पूरी बन जाती।

सन् 1999 में- राजेन्द्र कुमार साहब का स्वर्गवास हो गया, उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
-सुरेश भिटे

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