गेहूं के स्टॉक में भारी कमी धान की फसल 27 लाख हेक्टेयर में मार खा गई

व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, रुपया अभी और गिरेगा

नई दिल्ली (ब्यूरो)। मानसून की कई राज्यों में कम बारिश ने सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। गेहूं का स्टॉक देश में तय सीमा से खतरनाक स्तर पर नीचे जा चुका है। सरकार की मुफ्त गेहूं बांटने की योजना पर भी अब ग्रहण लगने वाला है।

दूसरी ओर धान की फसल पर बेतरतीब मानसून की मार ने भारी नुकसान पहुंचाया है। 27 लाख हेक्टेयर में धान की फसल मार खा गई। भारतीय खाद्य निगम ने बाजार में आटा और ब्रेड बनाने वाली कंपनियों को बेचे जाने वाले गेहूं पर रोक लगा दी है। इसके कारण बाजार में आटे के भाव में और वृद्धि हो जाएगी। वहीं रुपये की लगातार गिरावट के कारण सरकार का व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर तक इस साल पहुंच रहा है। जून में यह 26 अरब डॉलर को पार कर गया है। कुल व्यापार घाटा 250 अरब डॉलर होने जा रहा है, जो सरकार के कई वित्तीय गणित में घबराहट पैदा कर रहा है।

कल वित्त मंत्रालय की समीक्षा बैठक में सरकार पर आ रहे संकटों और बड़े आर्थिक संकट के अलावा मंदी की आहट का प्रभाव पूरी तरह दिखा। वित्त मंत्रालय के चेहरे पर चिंता की बड़ी लकीरें खींच गई है। एक ओर रिजर्व बैंक के प्रयास के बाद भी रुपया लगातार टूट रहा है। मंत्रालय का मानना है कि जब तक कमोडिटी की कीमतों में कमी नहीं आएगी, तब तक रुपये में गिरावट जारी रहेगी। वहीं गिरते रुपए के कारण कच्चे तेल के आयात पर बढ़ रहे बोझ ने सरकार को बड़े वित्तीय संकट में पहुंचा दिया है। सरकार का आयात और निर्यात के बीच व्यापार घाटा 250 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच रहा है। सरकार भी मान चुकी है कि रुपये की गिरावट अभी और जारी रहेगी।

दूसरी ओर इस बार के बेतरतीब मानसून ने कई राज्यों में बाढ़ तो कई राज्यों में सूखे के हालात पैदा कर दिए हैं। इसके कारण जहां खाद्यान का स्टॉक भी और चिंता पैदा कर रहा है। देश में पहली बार सरकारी गेहूं के बंफर स्टॉक में भारी कमी हो गई है। 1 जुलाई को गेहूं का स्टॉक 275.8 टन होना चाहिए। इस साल 80 करोड़ लोगों को मुफ्त में बांटे जा रहे गेहूं पर अब सरकार लगाम लगाने जा रही है। यदि गेहूं इसी प्रकार बांटा गया तो गेहूं की कीमतें आसमान पर होगी। फूड कॉर्पोरेशन ने खुले बाजार में मिलों को गेहूं बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि कई राज्यों में गेहूं की बजाय चावल को बढ़ावा दिया जाए परंतु इस साल चावल का स्टॉक भी धान की खरीफ फसल के मार खा जाने के कारण निचले स्तर पर आ गया है। पिछले समय गेहूं के किए गए निर्यात के बाद अब सरकार को महंगी कीमत पर गेहूं आयात भी करना पड़ सकता है।

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