650 करोड़ खर्च हो गए पेट नहीं भरा, तो फिर खर्च किए 10 करोड़

कई क्षेत्रों में फिर भरेगा पानी, पूरी कान्ह गाद और जलकुंभी से भरी

इन्दौर। कान्ह नदी को संवारने के लिए केंद्र व राज्य सरकार से नगर निगम ने 600 करोड़ लेकर खर्च कर दिए, जब इससे भी पेट नही भरा तो 10 करोड़ ओर सफाई अभियान में लगा दिए। बावजूद इसके कान्ह नदी में अभी भी जलकुंभी व दलदल व गंदगी से भरी पड़ी है। निगम के अधिकारी अब नई परिषद में इसे साफ करने की प्लानिंग लेकर फिर नया बजट पारित करवा लेंगे। ऐसे में शहर को साफ व स्वच्छ नदी की सौगात एक सपना ही साबित हो रही है।

गंगा बेसीन के तहत आने वाली शहर की कान्ह नदी को साफ करने के लिए सरकार ने अभी तक करोड़ो रुपए पानी की तरह बहा दिए बावजूद इसके गाद-मलबा व गंदगी इसमे पैर पसारे बैठी है। जिसके कारण बारिश का पानी अवरुद्ध होने के साथ साथ अनुपयोगी हो रहा है। दोपहर की टीम ने आज सुबह गणगौर घाट से लोखंडे पुल तक दौरा किया तो यहां पाया गया सफाई के लिए कई बार जेसीबी, डंपर और तमाम संसाधन लगाकर अभियान चलाया गया था, लेकिन कुछ दिनों के अंतराल में यहां फिर से स्थितियां बदतर हो रही हैं। कई जगह नदी के हिस्सों में जमा पानी के कारण आसपास के रहवासी बदबू के कारण परेशान हैं और निगम अफसरों को इसकी शिकायतें भी कर रहे हैं। फिर भी ध्यान नही दिया जा रहा है। कई बार जेसीबी और डम्पर से गाद निकाली, फिर स्थिति जस की तस हो गई है। जेसीबी, पोकलन मशीनें और वर्कशाप विभाग द्वारा बनाई गई जलकुंभी निकालने वाली नई मशीन इस कार्य के लिए झोंकी गई थी, बावजूद इसके नदी के किनारे दलदल से पटे नजर आ रहे हैं। गणगौर घाट पर कई दिनों तक सफाई अभियान के बाद पूरा इलाका साफ किया गया था, लेकिन नदी अब फिर बदहाल नजर आ रहा है।
नगर निगम द्वारा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जवाहर मार्ग से चंद्रभागा के लिए रिव्हर साइड कॉरिडोर का काम अंतिम दौर में है इसके लिए बड़े पैमाने पर कई बाधाएं हटाई जा चुकी है, लेकिन यहां भी कान्ह की हालात यहां भी खराब है, गंदगी के कारण आसपास के रहवासी परेशान हैं। पूरी नदी में जगह-जगह जलकुंभी और गाद के कारण पानी का बहाव रुक गया है। नगर निगम ने कान्ह नदी के अलग-अलग हिस्सों को संवारने का काम चार वर्ष पहले शुरू किया था और इसके लिए बड़े पैमाने पर नदी का गहरीकरण करने की बात भी कही गई थी मगर धरातल पर वही ढांक के तीन पात नजर आ रहे है। नतीजतन दस साल पुरानी व करोडों रुपए खर्च करने के बाद वर्तमान की कान्ह नदी में कोई फर्क नही समझ आ रहा है। दस करोड़ की भारी भरकम राशि खर्च कर दी जिससे कुछ दिनों तक उसके किनारे बदले हुए भी नजर आए, मगर थोड़ी सी बारिश के बाद फिर से बदहाली नजर आने लगी है। वैसे तो नदी सफाई में 600 करोड़ पहले ही हो चुके है खर्च। फिर भी गणगौर घाट से लेकर कृष्णपुरा छतरियाँ व निगम मार्केट तक पूरी नदी में गाद और जलकुंभी जमी हुई है।

 

सिरपुर तालाब से कान्ह नदी तक पहुंची जलकुंभी


जलकुंभी की समस्या सिरपुर तालाब से कान्ह नदी तक पहुँच गई है। सिरपुर तालाब में लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी निगम इसे खत्म कर पाना तो दूर कम करने में भी कामयाब नहीं हो पा रहा है। कान्ह नदी में तो जलकुंभी इस तरह फैल चुकी है, की चौपाए उस पर दौड़ लगाते दिख रहे है। सिरपुर तालाब में जलकुंभी हटाने के लिए लगाई गई मशीन मशीन पर निगम 11 लाख रुपए महीना राशि खर्च कर रहा है। सिरपुर तालाब की जलकुंभी खत्म करने के लिए शहर के पर्यावरण प्रेमी नगर निगम को कोस कोस कर थक गए है। यही जलकुंभी अब कान्ह नदी में भी दिखाई देने लगी है। ऐसा नहीं है कि निगम इसे हटाने का प्रयास नहीं कर रहा है, बल्कि निगम ने इसे निरंतर चले वाली प्रक्रिया में शामिल कर लिया है। निगम ने सिरपुर तालाब की सफाई में 11 लाख रुपए महीने की मशीन लगा रखी है, जो जलकुंभी की स्थायी रूप से हटा नहीं पाई है। नाव की तरह दिखने वाली ट्रै क्लीनर मशीन चलाने वाले ठेकेदार की नज़र अब कान्ह नदी पर है। आने वाले दिनों में यहां भी जलकुंभी हटाने के लिए निगम के ख़ज़ाने से राशि खर्च करने की योजना बन सकती है। इसी तरह कृष्णपुरा छत्री के आसपास कान्ह नदी में जलकुंभी इस तरह फैल चुकी है कि इसमे चौपाए चहल कदमी करते देखे जा सकते है। चारभुजा मंदिर से नगर निगम को जोड़ने वाला पुल से बहने वाला पानी के लिए भी जलकुंभी रुकावट बन रही है। यह जलकुंभी फैलते हुए कृष्णपूराछत्री और हरसिद्धि की तरफ बहने वाली कान्ह नदी में भी दिखाई देने लगी है। अब निगम को जलकुंभी हटाने के लिए लम्बाचौड़ा बजट का प्रवधान करना पड़ेगा। इसलिए यह कहना भी गलत नही होगा कि जलकुंभी अब भ्रष्टाचार के साथ निगम के ठेकेदार के लिए पैसा कमाने की मशीन भी बन गई है।

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