क्या राजनीति का शिकार हुआ मानसून…?

मेघों से मन्नत कर रहे 360 पार्षद प्रत्याशी व 19 महापौर उम्मीदवार

इंदौर (धर्मेन्द्रसिंह चौहान)।
इंदौर में मानसून की लेतलाली से शहर के लोग परेशान है। गली मोहल्लों व चौराहे पर इन दिनों चर्चा हो रही है कि चुनावी मौसम ने मानसून मौसम को ठंडा कर दिया है। शहर के 360 पार्षद व 19 महापौर उम्मीदवार रोजाना मेघनाथ से प्राथना कर रहे है कि 6 जुलाई तक पानी से भरे मेघ थाम कर रखे। इधर कतिपय नेताओं द्वारा कुछ जाने माने तांत्रिकों से भी संपर्क कर गुजारिश की है कि वे बारिश को थामने के लिए तंत्र क्रियाओं को अंजाम दे। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अगर शहर में बारिश हुई तो भाजपा के उम्मीदवारों की सबसे ज्यादा फजीहत होगी। क्योंकि पिछले 20 सालों में नगर निगम पर भाजपा का ही कब्जा है।

शहर में हो रहे निकाय चुनाव में भाजपा कांग्रेस व अन्य पार्टियों के साथ ही निर्दलीय 360 उम्मीदवार मैदान में है। वही प्रथम नागरिक बनने की दौड़ में 19 उम्मीदवार मैदान में है। यह सब मिलकर पानी के देवता वरुण से विनती करते नजर आ रहे है कि शहर में बारिश 6 जुलाई के बाद ही हो। क्योंकि अगर बारिश हो गई तो नेताओ की सारी नेतागिरी जनता जनार्दन निकाल देगी। खास कर भाजपा के उम्मीदवारों को सबसे ज्यादा खरी खोटी सुनने को मिलेगी। क्योंकि पिछले 20 सालों से नगर निगम में भाजपा की परिषद होने के साथ ही महापौर भी भाजपा का ही है। निचली बस्तियों में जल जमाव से होने वाले कीचड़ से इन 20 सालो में भी जनता को मुक्ति नही मिली पाई है। यही कारण है कि ज्यादातर भाजपा के उम्मीदवार मेघनाथ से विनम्र अपील करते देखे जा रहे है।

सरकार द्वारा पिछली बार जीन 29 गांवों को नगर निगम सीमा में जोड़ा था वहां के हालात बद से बदत्तर हो रही है। खास कर निचली बस्तियों में सड़क तो बन गई मगर पानी की निकासी नही होने से वहां जलजमाव के कारण कीचड़ व इससे होने वाली गंदगी का अंबार लगा रहता है। ज्यादातर हिस्सो में कचरा ही कचरा कई महीनों बाद उठाया जाता है। बारिस के दिनों में इससे निकलने वाली बदबू के कारण क्षेत्र के लोगो का जीना दुशवार हो रहा है। ऐसे में कांग्रेस व अन्य दलों के उम्मीदवारों को जनता से बोलने का मौका मिल गया है की भाजपा की परिषद ने कोई काम नही किया। इसी लिए हमें मैदान संभालना पड़ रहा है। अगर हमें मौका मिला तो सबसे पहले हम शहर की निचली बस्तियों को ही संवारने का काम करेंगे। क्योंकि शहर के बीच तो कुछ काम हो चुका है। मगर बाहर के हिस्सों में न तो चुने हुए पार्षदों ने जनहित में कोई काम किया है ओर न ही पिछले 20 साल से जीतते आ रहे भजपा के महापौरों ने, नतीजतन शहर की जनता हर बारिश में जलजमाव से त्रस्त हो जाती है। वहीं भाजपा के सभी उम्मीदवार यही चाहते है कि बारिश होने से उन्हें जनता को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए जितना जल्दी हो सके जनसंपर्क निपटा लिया जाए। इसलिए भाजपा के नेता 12 से 14 घंटे तक जनसंपर्क करने में जुटे हुए है। सभी यह चाहते है कि मानसून सक्रिय होने से पहले ही सभी वार्ड नाप लिए जाए।

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