10 लाख नौकरियों में भी हैं कई पेंच

कई सरकारी विभागों में नहीं हो रही थी छह साल से भर्तियां

नई दिल्ली (ब्यूरो)। केन्द्र सरकार द्वारा सेना में अग्निपथ योजना के तहत भर्ती को लेकर जहां कई राज्यों में भारी उपद्रव हो रहा है वहीं 10 लाख नौकरियों को लेकर अभी भी कई पेंच सामने आ गए हैं। इन नौकरियों को देने के लिए सरकार को अपना आकार हर साल 15 प्रतिशत बढ़ाना होगा। इनमें पदस्थ होने वाले लोगों के लिए राजस्व कहां से आएगा इसे लेकर अभी तक कोई रोड मेप नहीं दिखाया गया है, जबकि कई विभागों में पद ही समाप्त हो गए हैं।
डेढ़ साल में सरकारी विभागों में 10 लाख नौकरियां कैसे मिलेगी यह सवाल सरकार में ही खड़ा हो रहा है। अभी रक्षा मंत्रालय में 2 लाख 47 हजार पद, रेलने में 2 लाख 37 हजार पद, गृह विभाग में 1 लाख 28 हजार पद खाली हैं। वहीं अन्य सरकारी विभागों में 7 लाख 67 हजार पद खाली हैं। इनमें ग्रुप सी के अलावा ग्रुप ए में भी भर्ती की जानी है। सरकार ने यह नहीं बताया कि इसमें कितने अधिकारी बढ़ेंगे, जबकि सरकार के इस ऐलान में ही अंतर विरोध पैदा हो रहा है।
वित्त आयोग की सिफारिश पर मिनिमम गवर्मेट मैग्जिमम गवर्नेंस का नारा दिया गया था। अभी पिछले छह वर्षों से विभागों में नौकरियां समाप्त की जा रही है। सरकार ने संसद में बताया था कि सरकार के पास 3 करोड़ 1 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं और इसमें लगातार कमी हो रही है। दूसरी ओर सरकार नौकरियों का इतना बड़ा अभियान डेढ़ साल में कैसे पूरा करेगी इसका कोई रोड मेप नहीं होने के कारण यह ऐलान भी चुनाव तक केवल प्रक्रिया में ही दिखाई देगा। कई मंत्रालय मान रहे हैं कि यह प्रक्रिया लम्बी चलेगी, इसके पूर्व रेलवे की भर्ती को लेकर हुई परीक्षा का ही रिजल्ट पिछले तीन सालों से अटका हुआ है। वहीं इन नौकरियों के लिए सरकार को बड़े राजस्व की जरूरत होगी, जबकि अभी भारी वित्तय संकट से सरकार गुजर रही है।
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