अंतत: नगर में इस बार रायशुमारी की राय मानी गई

गोलू का साथ मिलने से मंत्री गुट की ताकत बढ़ी मिश्रा के लिए विरोधियों से समन्वय बैठाना बड़ी चुनौती विजयवर्गीय का सियासी दांव श्रवण पर रखा हाथ

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इंदौर(विनोद भारद्वाज)। लंबी जद्दोजहद के बाद आखिर इंदौर नगर व जिले में नए अध्यक्ष की नियुक्ति हो ही गई। नगर में रायशुमारी की राय मानी गई। वहीं जिले में चिंटू वर्मा का दोबारा अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा था, लेकिन मंत्री और 2 विधायकों के खुले विरोध के कारण बात दिल्ली दरबार तक पहुंच गई तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सियासी दांव खेलते हुए श्रवण सिंह चावड़ा पर हाथ रख दिया और अपने ही समर्थक को अध्यक्ष बनवा लाए, ताकि मंत्री तुलसी सिलावट और उषा ठाकुर, मनोज पटेल को मजबूत होने से रोक दिया जाए। पहली बार तुलसी सिलावट ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ मैदान में पकड़ की थी, परन्तु वे खाली हाथ रहे। वहीं नगर में मंत्री गुट को विधायक गोलू शुक्ला का साथ मिलना लाभदायक रहा और रायशुमारी में बाजी मार चुके सुमित मिश्रा के नाम पर मुहर लग गई।

नगर में निर्वतमान अध्यक्ष गौरव रणदिवे की कार्यशैली ने अध्यक्ष पद के दावेदारों की संख्या बढ़़ा दी थी। वहीं नेता भी इस पर अपना व्यक्ति बिठाना चाह रहे थे। मामला भोपाल तो ठीक दिल्ली दरबार तक पहुंच चुका था और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था। विधायक रमेश मैंदोला की पहली पसंद सुमित मिश्रा ही थे। जबकि विजयवर्गीय की पसंद टीनू जैन भी थे। हालाकि विजयवर्गीय गुट की जमावट कुछ दूसरी ही थी।

वहीं अन्य मजबूत दावेदारों में मुकेश राजावत, अभिषेक (बबलू) शर्मा, दिलीप शर्मा, नानूराम कुमावत, जवाहर मंगवानी, विजय मालानी थे। वहीं महिला दावेदार में दिव्या गुप्ता का नाम भी सामने आया था, लेकिन विजयवर्गीय गुट को विधायक गोलू शुक्ला का साथ मिलना फायदेमंद रहा और तीनों ने मिलकर मुख्यमंत्री मोहन यादव के समक्ष अपनी पसंद सिर्फ रखी ही नहीं, वहीं प्रदेश संगठन पर एकतरफा दबाव भी बना दिया था, जिसका फायदा सुमित मिश्रा को मिल भी गया। अब मिश्रा के सामने ताई सुमित्रा महाजन, सांसद शंकर लालवानी, मालिनी गौड़, महेन्द्र हार्डिया से समन्वय बिठाना चुनौती ही रहेगा। वैसे भी कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मैंदोला कभी भी अपने क्षेत्र में दूसरी ध्रुव नहीं बनने देते है।

इसीलिये वे अन्य क्षेत्रों से ही अध्यक्ष मनवाते र हे है। वहीं जिले में एक साल भी अध्यक्ष नहीं रह पाए चिंटू वर्मा का नुकसान हो गया। चिंटू का मंत्री तुलसी सिलावट, विधायक उषा ठाकुर और मनोज पटेल खुलकर विरोध कर रहे थे और सिलावट ये बात अपने आका ज्योतिरादित्य सिंधिया तक भी पहुंचा कर आ गए थे। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मनोज पटेल के कारण अन्य नाम पर सहमत थे, लेकिन ऐन मौके पर विजयवर्गीय ने श्रवण चावड़ा पर अपना हाथ रख दिया और सियासी दांव खेलते हुए चावड़ा पर मुहर लगवा दी, जिसके कारण मंत्री और विधायकों की तिकड़ी रोकने के चक्कर में चावड़ा की किस्मत खुल गई। वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया का साथ मिलने के बाद भी तुलसी सिलावट मार खा गए। इसका खामियाजा भी उन्हें आगे भुगतना होगा। bjp indore

सोशल मीडिया पर छाए गौरव

जैसे ही सुमित मिश्रा के नाम की घोषणा हुई, वैसे ही मिश्रा से ज्यादा गौरव रणदिवे के कार्यकाल को स्वर्णिम बताते हुए उनकी तारीफ में सैकड़ों पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। उनकी तारीफ में सिर्फ समर्थकों ने ही नहीं अन्य सामान्य जनों ने भी तारीफे गड़ी, जो आजतक किसी अन्य निर्वतमान अध्यक्ष को लेकर नहीं चली थी।

राजावत की पोस्ट चर्चा में

अध्यक्ष पद के दावेदार रहे मुकेश राजावत पिछली बार भी दावेदार रहे थे और इस बार वो बेहद मजबूत भी थे, लेकिन आखरी समय मिश्रा बाजी मार ले गए तो उनका गुस्सा सोशल मिडिया के माध्यम से निकला, जो चर्चाओं का केंद्र बन गया।bjp indore
जिद है तो जिद सही

आत्म सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं

चवन्नी का खर्चा सवा रुपए में पड़ गया
एक दावेदार के बारे में चर्चाओं का बाजार गर्म है की चवन्नी का जहां खर्चा नहीं था, वहीं उन्होंने सवा रुपए खर्चा कर दिए और हाथ कुछ नहीं लगा। एक कारोबारी की लाइजीनिंग भारी पड़ गई।

जीतू की ना से मिश्रा कामयाब

पूर्व विधायक जीतू जिराती का नाम भी एक बार दौड़ में आ गया था, लेकिन सूत्र बता रहे हंै की उन्होंने इनकार कर दिया था, जबकि उनके नाम पर भोपाल में भी बहुत पहले ही सहमति बन गई थी, लेकिन सुमित मिश्रा का भाग्य प्रबल था और रुकते-रुकते उनके नाम की घोषणा हो गई। संभवतया जिले में चिंटू वर्मा पहले अध्यक्ष हैं जो अपना कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए। कैलाश विजयवर्गीय के करीबी ओर देपालपुर विधायक मनोज पटेल के घोर विरोधी रहे चिंटू का राजनीतिक लड़ाई में बड़ा नुकसान हो गया।

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