Sulemani chai: न खुदा मिला न विसाले सनम, 153 में भी नहीं हैं हम…टिकट मिले तो पंजे के साथ, नहीं तो आजाद पंछी,,अय्यूब साब!

न खुदा मिला न विसाले सनम, 153 में भी नहीं हैं हम…
दो दिन पहले सुमित बाबू ने नगर कार्यसमिति की तीन कैटेगरी में कुल 153 सदस्य घोषित कर डाले। फेहरिस्त में ऐसे नाम भी हैं जो सत्ता की मलाई का लुत्फ लेने के लिए भाजपा की दस्तरख्वान तक पहुंचे और कुछ ऐसे भी, जिनका भाजपा से रिश्ता बहुत पुराना या बहुत गहरा नजर नहीं आता। मगर ताज्जुब ये कि उन मुस्लिम नेताओं के लिए 153 में भी जगह नहीं निकली, जिन्होंने उस दौर में भाजपा का झंडा थामा था, जब अल्पसंख्यक समाज भाजपा के साये से भी दूरी बनाए रखता था। उन पुराने नामों में बाबू खां पवार, आलमगीर गोरी, मुन्नू इक्का पहलवान, खुरासान पठान, कमाल खान, डॉ. अकील राज, इनायत हुसैन और नासिर शाह जैसे कई चेहरे शामिल हैं। इन लोगों ने उस दौर में पार्टी के लिए काम किया, जब सियासत में साथ खड़े होने की कीमत भी चुकानी पड़ती थी—कौम की नाराजग़ी भी झेलनी पड़ी और कांग्रेस शासन के दौर की मुश्किलें भी। आज कुछ अल्पसंख्यक युवा नेता भाजपा से आगे बढक़र संघ परिवार के विभिन्न संगठनों के कार्यक्रमों तक में पूरी शिद्दत से नजर आते हैं। इसे भक्ति कहें या सियासी उम्मीद मगर अफसोस ये है कि इतनी शिद्दत के बावजूद 153 की फेहरिस्त में भी नाम नहीं आया। अब ऐसे सियासी आशिकों की हालत पर बस यही कहा जा सकता है—न खुदा मिला न विसाले सनम न इधर के रहे न उधर के हम…।
टिकट मिले तो पंजे के साथ, नहीं तो आजाद पंछी,,अय्यूब साब!
शहर में दो वार्डों के चुनाव को लेकर सियासी बाज़ार गर्म है। हालांकि वार्ड क्रमांक 60 में माननीय उच्च न्यायालय के स्टे के बाद फिलहाल सुनहरा सपना इंसाफ के साथ कायम हे।जिसमें मुन्ना की फरारी के चलते बीजेपी से महफूज पठान की गाड़ी चल सकती थी ,वहीं वार्ड क्रमांक 58 में तस्वीर अभी धुंधली है। वार्ड 58 से कांग्रेस के करीब 35 साल पुराने वफादार सिपाही मोहम्मद अय्यूब ने चुनावी मैदान में ताल ठोक दी है। अय्यूब साहब ने कांग्रेस से टिकट की फरियाद की है, मगर साथ ही अपना प्लान-बी भी तैयार रखा है—टिकट मिला तो पंजे के साथ,नहीं मिला तो फैसला अल्लाह के हाथ, इसी के साथ राजा बाबू कहते नजर आ रहे हे कि..
वफ़ा का हक़ भी मांगा, इख़्तियार भी रख लिया,
टिकट मिले तो पंजा, न मिले तो अपना वार भी रख लिया।
बीजेपी की ए, बी, सी, डी… तो नहीं!
जब बीजेपी खुद चारों खाने चित होने की मुद्रा में दिखाई दे रही हे, विरोध के सुर चारों तरफ से उठ रहे हे, तब असदुद्दीन साहब की पार्टी प्रदेश में जाने-अनजाने बीजेपी का भला करने में जुटी नजर आ रही है। इसे सियासत का संयोग कहें या फिर बीजेपी के लिए मुफ्त की ऑक्सीजन! पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मोहसिन बाबा भोपाल में अपनी राजनीतिक जमीन तो बना नहीं पा रहे और इधर पूरे प्रदेश में यूसीसी को लेकर प्रदर्शन का सिलसिला चला रहे है। लेकिन तस्वीर का मजेदार पहलू यह है कि भोपाल से बाहर निकलते ही आंदोलन की भीड़ में भोपाल के लोग की संख्या दहाई का आंकड़ा छूने के लिए तरसती नजर आती है। सभी जगह स्थानीय लोग ही आ रहे हे सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि जब आम जनता महंगाई, बेरोजगारी, विकास और दूसरे मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछ रही है, तब अल्पसंख्यक समाज को सिर्फ धर्म का चश्मा पहनाकर अलग खड़ा करना किसकी राजनीति मजबूत कर रहा है?कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोलने का दावा किया जा रहा है, उसी की राजनीतिक दुकान को विरोध के नाम पर मुफ्त में ग्राहक उपलब्ध कराए जा रहे हैं?
दुम छल्ला,,,
आई के से निकलने लगे डॉक्टर,
शहर की सबसे पुरानी ओर एकमात्र मुस्लिम एज्युकेशनल सोसायटी इस्लामिया करीमियां सोसायटी के छावनी स्थित कैंपस से एक छात्र ने पहली ही बार में नीट एग्जाम में 99.3 परसेंट मास्क लाकर इतिहास रच दिया हे क्योंकि ये कैंपस हिंदी मीडियम होने के साथ ही सोसायटी का सबसे गरीब इदारा हे गरीब इसलिए क्योंकि यहां की बारहवीं क्लास की वार्षिक फीस मात्र पांच हजाए हे गरीब इसलिए भी के यहां के बच्चे बहुत सक्षम ओर सहूलियतो से लैस नहीं रहते बेशक नोमान खान की इस कामयाबी में स्कूल के हर उस्ताद की उस्तादी शमिल हे ,,
तो साहब इस बार का सुलेमानी सलाम प्रिंसिपल रईस खान साहब के साथ उनकी पूरी टीम के नाम,,,
मेहबूब कुरैशी ९९७७८६२२९९